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This Article is From Jul 08, 2018

बिहार में एनडीए का कुनबा संभालने की जिम्मेदारी अब भाजपा के हाथों में...

रविवार को दिल्ली में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की बैठक के बाद साफ़ है कि बिहार के मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार फ़िलहाल इस मामले में किसी जल्दबाज़ी में नहीं हैं.

बिहार में एनडीए का कुनबा संभालने की जिम्मेदारी अब भाजपा के हाथों में...
बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
पटना: बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में कौन रहेगा और किसकी विदाई होगी और किसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ज़रूरत है, ये सब अब ये दोनों नेता तय करेंगे. रविवार को दिल्ली में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की बैठक के बाद साफ़ है कि बिहार के मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार फ़िलहाल इस मामले में किसी जल्दबाज़ी में नहीं हैं और वो इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि भाजपा आख़िर उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए कितनी सीटों का ऑफ़र देती है.

नीतीश के इस बयान से कि सीटों के तालमेल पर फ़िलहाल भाजपा की तरफ़ से ऑफ़र तो आने दीजिए, संतुष्ट होंगे तो ठीक हैं नहीं तो देखा जाएगा, इससे फ़िलहाल गठबंधन के भविष्य को लेकर लग रहे क़यासों पर विराम लगेगा. माना जाता है कि नीतीश ने गेंद एक तरह से भाजपा के पाले में डाल दी है कि अगर आप सहयोगी के रूप में चाहते हैं तो सम्‍मानजनक सीटों की संख्या बताएं नहीं तो पार्टी फिर अपना भविष्य सोचेगी.

लेकिन इस बैठक में नीतीश ने जैसे पार्टी को एलिमिनेट करने और किनारा करने के प्रयास के बारे में चर्चा की उससे भाजपा के नेताओं का मानना है कि शायद मुख्‍यमंत्री को इस बात का आभास हो गया है कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्‍व में इस बात पर जो बहस छिड़ी है कि नीतीश को अलग-थलग कर के त्रिकोणीय संघर्ष में चुनाव लड़ा जाये जिससे भाजपा को फ़ायदा होगा. हालांकि बिहार भाजपा के पुराने नेताओं का कहना है कि ज़मीनी हक़ीक़त इससे विपरीत है, नीतीश के बिना चुनाव में जाना आत्मघाती होगा.

हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व का एक प्रभावशाली गुट जो नीतीश को अलग-थलग कर चुनाव में जाने कि तैयारी में लगा है, उसने ने हाल के समय में नीतीश का लालू से कोई मेल मिलाप नहीं हो इसके लिए वो चाहे लालू यादव हों या तेजस्वी यादव या मीसा भारती या तेजप्रताप यादव, सबके ख़िलाफ़ चल रहे मामले में जांच एजेंसियों को धीमी गति से फ़िलहाल चलने के लिए कहा है. ये एक बड़ा कारण है कि तेजस्वी यादव आजकल नरेंद्र मोदी से ज़्यादा नीतीश को निशाने पर रखते हैं.

VIDEO: मिशन 2019: सीट बंटवारे को लेकर बिहार में सियासी घमासान

लेकिन इसके बाद अब सब कुछ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के पटना दौरे पर निर्भर होगा. हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि भले नीतीश भाजपा का ऑफर आने तक इंतजार करने की बात कर रहे हों लेकिन भाजपा इतनी जल्दी सारे पत्ते नहीं खोलने वाली.
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