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कभी मंत्री नहीं बने और ना मोकामा से बाहर निकले, फिर क्यों छोटे सरकार कहे जाते हैं अनंत सिंह?

अनंत सिंह बिहार के मोकामा से 2005 से लगातार राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं. उन्होंने जेडीयू, निर्दलीय और राजद के टिकट पर चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की. अदालत से सजा के कारण उनकी सदस्यता जाने पर उनकी पत्नी नीलम देवी भी विधायक चुनी गईं.

कभी मंत्री नहीं बने और ना मोकामा से बाहर निकले, फिर क्यों छोटे सरकार कहे जाते हैं अनंत सिंह?
फाइल फोटो
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बिहार की मोकामा सीट से विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निकाल दिया गया है. उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में रहने के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित किया गया है. इतना ही नहीं उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिखा गया है. अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी को भी निष्कासित किया गया. 

दरअसल, बीते कुछ वक्त से  अनंत सिंह बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के दौरान जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ काम करने और विपक्षी जन सुराज पार्टी (JSP) के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन कर रहे थे. लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि बिहार की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले अनंत सिंह कभी मंत्री नहीं बने और उनकी राजनीति भी मुख्य रूप से मोकामा तक ही सीमित रही. इसके बावजूद उनकी पहचान सिर्फ एक विधायक की नहीं, बल्कि 'छोटे सरकार' के रूप में बनी. मोकामा और आसपास के इलाकों में उनका प्रभाव इतना मजबूत माना जाता रहा कि यह उपनाम धीरे-धीरे उनकी राजनीतिक पहचान बन गया.

जब पहली बार लड़े चुनाव

अनंत सिंह ने पहली बार 2005 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. इसके बाद 2010 में भी उन्होंने जेडीयू के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता. नीतीश कुमार से रिश्तों में खटास आने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी, लेकिन इसका उनकी चुनावी ताकत पर खास असर नहीं पड़ा. 

2015 का विधानसभा चुनाव उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और उस समय जेल में रहने के बावजूद जीत हासिल कर ली. इसके बाद 2020 में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर चुनाव लड़कर लगातार पांचवीं बार मोकामा से विधायक बने.

हालांकि बाद में एक मामले में अदालत से सजा मिलने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई. 

इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी राजद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरीं और सीट बचाने में सफल रहीं. बाद में अदालत से राहत मिलने और नीतीश कुमार से रिश्ते बेहतर होने के बाद अनंत सिंह फिर जेडीयू में लौट आए. 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर जेडीयू के टिकट पर जीत दर्ज कर यह दिखा दिया कि मोकामा में उनकी राजनीतिक पकड़ अब भी बरकरार है.

क्यों कहा जाता है छोटे सरकार?

अनंत सिंह को 'छोटे सरकार' कहे जाने के पीछे कोई सरकारी पद नहीं, बल्कि उनकी स्थानीय साख और प्रभाव को वजह माना जाता है. मोकामा क्षेत्र में लंबे समय तक ऐसा माना जाता रहा कि लोगों के आपसी विवाद, सामाजिक मसले या स्थानीय समस्याएं उनके पास पहुंचती थीं और उनकी राय को खास महत्व दिया जाता था.

यही कारण है कि समर्थकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें 'छोटे सरकार' कहना शुरू कर दिया. समय के साथ यह नाम इतना लोकप्रिय हो गया कि पूरे बिहार में उनकी पहचान इसी उपनाम से होने लगी.

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हत्या का चला मुकदमा

अनंत सिंह कई बार अपने अलग अंदाज की वजह से भी चर्चा में रहे हैं. वर्ष 2013 में उन्होंने तब खूब सुर्खियां बटोरी थीं, जब वे अपनी मर्सिडीज कार छोड़कर घोड़ा-गाड़ी से बिहार विधानसभा पहुंचे थे. इसके अलावा वे दो अलग-अलग मौकों पर जानलेवा हमलों का भी सामना कर चुके हैं और दोनों बार बच निकले.

इसके अलावा, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बाहुबली विधायक अनंत सिंह पर दुलारचंद यादव की हत्या का आरोप लगा था.  फिर पटना हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में दुलारचंद यादव हत्या मामले में अनंत सिंह को जमानत दे दी थी, जिसके बाद वे जेल से बाहर आ गए थे. जेल में रहते हुए ही उन्होंने मोकामा से चुनाव जीता था.

यह भी पढ़ें: क्या जेडीयू के संविधान के खिलाफ जाकर हुआ अनंत सिंह पर एक्शन? विधायक को हटाने का अधिकार किसके पास

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