बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार की फाइल फोटो
- कुशवाह किसी भी हाल में एनडीए सहयोगी के तौर पर मंज़ूर नहीं हैं
- नीतीश ने रविवार को पार्टी के कुशवाह जाति के नेताओं की सुध ली
- जिनको राजनीति में खड़ा किया वही लोग उनपर हमला करते हैं
पटना:
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार को उपेन्द्र कुशवाहा किसी भी हाल में एनडीए सहयोगी के तौर पर मंज़ूर नहीं हैं. इतना ही नहीं नीतीश ने उपेन्द्र कुशवाहा की विदाई के लिए उनके खीर के जवाब में सब्ज़ी बेचने को तैयार हैं. सालों बाद मुख्यमंत्री नीतीश ने अपने रविवार को पार्टी के कुशवाहा जाति के नेताओं की सुध ली. करीब पूरे राज्य के आठ सौ से ज़्यादा ब्लॉक से लेकर राज्य स्तरीय नेताओं के सामने नीतीश ने अपनी मन की बात कही और वादा किया कि उनके मान सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. नीतीश ने पार्टी के कुशवाहा नेताओं से बातचीत के दौरान बिना उपेन्द्र कुशवाहा का नाम लिए कहा कि जिनको उन्होंने राजनीति में खड़ा किया वही लोग उनपर हमला करते हैं. निश्चित रूप से उनका इशारा उपेन्द्र पर था क्यों पहली बार नीतीश ने ही उन्हें विधायक बनाने के अलावा विपक्ष का नेता भी मनोनीत किया था.
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इसके अलावा उपेन्द्र पहली बार राज्यसभा नीतीश के पार्टी से गये थे. इसके अलावा नागमणी जो हर दिन उनका नाम लेकर आलोचना करते हैं उन्हें विधायक और उनकी पत्नी को अपने मंत्रिमंडल में सदस्य बनाया. नीतीश ने हालांकि अपने पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं को नसीहत दी कि वो इन लोगों के सार्वजनिक आलोचनाओं का जवाब देकर उनका महत्व नहीं बढ़ाए, लेकिन नीतीश के तेवर से साफ है कि वो चाहते हैं कि कुशवाहा एक बार उनके विरोधी महगठबंधन से हाथ मिलाकर लोकसभा चुनाव में जोर आजमायश कर ले, लेकिन नीतीश ने अपने भाषण में सबको भरोसा दिलाया कि जहां लोकसभा चुनाव में उनकी हिस्सेदारी उनकी पार्टी के प्रत्याशियों की सूची में पर्याप्त होगी.
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वहीं उन्होंने कहा कि जल्द अब पूरे राज्य में एक ऐसी व्यवस्था होगी कि सरकार सारी सब्जी खरीद खुद बाजार में सीधे या सब्जी के खुदरा विक्रेता को देगी. नीतीश की इस घोषणा से निश्चित रूप से सब्ज़ी का उत्पादन करने वाले कुशवाहा समाज के अधिसंख्य लोगों को राहत मिलेगी. इसके अलावा नीतीश ने भरोसा दिलाया कि हर स्तर पर इस समाज के लोगों की भागीदारी दी जाएगी, जिससे तय माना जा रहा है कि बोर्ड और निगम में इस समाज के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी.
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नीतीश के इस कदम और तेवर के बाद बीजेपी के नेता मान रहे हैं कि वो चाहते कि उपेन्द्र को एनडीए से विदा किया जाए. इसके पीछे आकलन है कि लोकसभा चुनाव में जब नीतीश और पीएम नरेंद्र मोदी दोनों एक साथ एक तरफ से वोट मांगने जाएंगे तब गैर यादव पिछड़ा वोट एकजुट होकर एनडीए प्रत्याशियों को ही मिलेगा. वहीं कुशवाहा समर्थक नेताओं का मानना है कि नीतीश के बयानों और इस कदम से साफ है कि वो फिलहाल इस समाज के वोटर को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं हैं.
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इसके अलावा उपेन्द्र पहली बार राज्यसभा नीतीश के पार्टी से गये थे. इसके अलावा नागमणी जो हर दिन उनका नाम लेकर आलोचना करते हैं उन्हें विधायक और उनकी पत्नी को अपने मंत्रिमंडल में सदस्य बनाया. नीतीश ने हालांकि अपने पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं को नसीहत दी कि वो इन लोगों के सार्वजनिक आलोचनाओं का जवाब देकर उनका महत्व नहीं बढ़ाए, लेकिन नीतीश के तेवर से साफ है कि वो चाहते हैं कि कुशवाहा एक बार उनके विरोधी महगठबंधन से हाथ मिलाकर लोकसभा चुनाव में जोर आजमायश कर ले, लेकिन नीतीश ने अपने भाषण में सबको भरोसा दिलाया कि जहां लोकसभा चुनाव में उनकी हिस्सेदारी उनकी पार्टी के प्रत्याशियों की सूची में पर्याप्त होगी.
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वहीं उन्होंने कहा कि जल्द अब पूरे राज्य में एक ऐसी व्यवस्था होगी कि सरकार सारी सब्जी खरीद खुद बाजार में सीधे या सब्जी के खुदरा विक्रेता को देगी. नीतीश की इस घोषणा से निश्चित रूप से सब्ज़ी का उत्पादन करने वाले कुशवाहा समाज के अधिसंख्य लोगों को राहत मिलेगी. इसके अलावा नीतीश ने भरोसा दिलाया कि हर स्तर पर इस समाज के लोगों की भागीदारी दी जाएगी, जिससे तय माना जा रहा है कि बोर्ड और निगम में इस समाज के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी.
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