हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने हुए हैं जो अपने संगीत और सुरीली आवाज के साथ अपने मजेदार अंदाज और बोल के लिए याद किए जाते हैं. इसके साथ ही उन गानों का शूट उनको एक अलग ही रंग दे देता है. आज हम 58 साल पुराने एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जिसमें हिरोइन ने मालन बनकर अपने दिल का हाल बयां किया था. हम बात कर रहे हैं साल 1968 में आई फिल्म 'राजा और रंक' के गाने 'मेरा नाम है चमेली, मैं हू मालन अकेली' की, जिसमें वो खुद को फूलों से जुड़ा बताती है, बीकानेर से आने की बात करती है और दरोगा से जी गुजारिश करती है. इस गाने को लता मंगेशकर की आवाज में एक अलगी ही रंग दिया, इसलिए आज भी इस गाने को सुनते ही एक मस्तीभरा माहौल बन जाता है.
राजा और रंक का गाना, लता मंगेशकर की आवाज
साल 1968 में आई फिल्म राजा और रंक में आया गाना 'मेरा नाम है चमेली, मैं हू मालन अकेली' एक ऐसा ही गाना है, जिसमें एक लड़की अपना नाम बताने के साथ ही अपनी कहानी भी सुनाने लगती है. वो खुद को फूलों से जुड़ा हुआ और बीकानेर से अकेले आने की बात करती है और दरवाजे पर खड़े होकर दरोगा बाबू से उसे खोलने की गुजारिश करती है. गाने के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे और इसका संगीत तैयार किया था लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी चुलबुली आवाज से यादगार बना दिया. गाने की खासियत इसके बोलो में नजर आने वाला नटखट अंदाज था, जिसे लता जी ने अपनी आवाज से बखूबी सजाया. इसके साथ ही इसमें कुमकुम के मजेदार और चुलबुले अंदाज ने गाने को मजेदार बना दिया. इस फिल्म में संजीव कुमार, कुमकुम, अजीत, निरूपा रॉय, नाजिमा, मुकरी और मोहन चोटी ने अभिनय किया था. फिल्म का डायरेक्शन के.पी. आत्मा ने किया था, जबकि इसके प्रोड्यूसर थे एल.वी. प्रसाद.
बीकानेर का जिक्र बना गाने की खास पहचान
इस गाने को दिलचस्प बनाते हैं इसके बोल, जिसमें बीकानेर से लेकर के, चमेली होने का जिक्र भी आता है. इसके साथ ही वो बागों से लाई चंपा की कलियों की बात भी करती है और खुद को फुलों की रानी और बहारों की सहेली कहती है. गाने के बोलों में एक ऐसा किरदार झलकता है जो बेझिझक अपनी बात कहता है. गाने में दिखने वाली शर्म और बेबाकी और शरारत गाने को बाकी रोमांटिक गानों से अलग बनाती है. गाने के बोल इस तरह हैं-
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मेरा नाम है चमेली
मैं हूँ मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से
मेरा नाम है चमेली
मैं हूँ मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से
ओ दारोगा बाबू बोलो
जरा दरवज्जा तो खोलो
खड़ी हूँ मैं दरवज्जे पे बड़ी देर से
मेरा नाम है चमेली
मैं हूँ मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से
फिल्म की कहानी भी है मजेदार
साल 1968 में आई फिल्म राजा और रंक सिर्फ अपने गानों के लिए ही नहीं बल्कि इसकी कहानी भी काफी दिलचस्प थी. फिल्म की कहानी मार्क ट्वेन के फेमस नॉवेल द प्रिंस एंड द पॉपर पर बेस्ड थी. इसमें एक राजकुमार और आम लड़के की जिंदगी के बीच होने वाली अदला-बदली दिखाई गई थी.
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