पुरी. 'ओलिव रिडले' कछुओं के प्रजनन काल को सुरक्षित बनाने के लिए ओडिशा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. 1 नवंबर से 31 मई तक धामरा से देवी मुहाने के बीच 160 किलोमीटर के समुद्री दायरे में मछली पकड़ने और मशीनीकृत नावों के चलने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. दुनियाभर में प्रसिद्ध गहिरमथा अभयारण्य सहित तटीय इलाकों से 20 किलोमीटर अंदर तक का क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. कछुओं की सुरक्षा के लिए तटों पर 14 विशेष शिविर बनाए गए हैं और सशस्त्र पुलिस बल तैनात किया गया है. हालांकि, विभाग के पास गश्ती बोट खराब होने जैसी संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है. इसके बावजूद, वन विभाग तीन नए ट्रॉलरों के जरिए गश्त मजबूत कर मेहमान कछुओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है.
क्यों जरूरी है यह पाबंदी?
गहिरमथा समुद्री अभयारण्य दुनिया में ओलिव रिडले कछुओं का सबसे बड़ा आशियाना माना जाता है. कछुओं की सुरक्षा के लिए गहिरमथा में तो सालभर पाबंदी रहती है, लेकिन अब प्रजनन काल को देखते हुए तट से 20 किलोमीटर अंदर तक के इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया गया है. इस दौरान ट्रॉलरों और नावों का शोर या उनकी आवाजाही इन मेहमानों के जीवन को खतरे में डाल सकती है.
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चुनौतियां भी कम नहीं
कछुओं के अंडों और उनकी सुरक्षा के लिए तट पर 14 विशेष सुरक्षा कैंप बनाए जा रहे हैं. बाबूबाली और शासनपेटा जैसे संवेदनशील इलाकों में सशस्त्र पुलिस बल (APR) भी तैनात रहेगा. वन विभाग अवैध शिकार को रोकने के लिए समुद्री गश्त तेज करने का दावा कर रहा है.
अवैध गतिवधियों को रोका जाएगा
हालांकि, जमीनी हकीकत थोड़ी चिंताजनक है. कछुओं की सुरक्षा में तैनात वन विभाग खुद संसाधनों की कमी से जूझ रहा है. विभाग को मिली दो मुख्य स्पीड बोट लंबे समय से खराब पड़ी हैं और फिलहाल उनके पास सिर्फ एक ट्रॉलर ही चालू हालत में है. इसके बावजूद, डीएफओ भरतराज गांवकर का कहना है कि 1 नवंबर से तीन नए ट्रॉलरों को गश्त पर लगाकर अवैध गतिविधियों को पूरी तरह रोका जाएगा.
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