पशु-पक्षियों के अधिकारों की वकालत करने वाले समूह PETA ने एक ऐसा वीडियो जारी किया है जिसे देखकर रूह सिहर जाती है. PETA ने पहली बार दिखाया है कि यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर में 2 दिन पहले पैदा हुए मासूम बंदरों पर कैसे एक्सपेरिमेंट किए गए हैं. इन एक्सपेरिमेंट में पहले तो मादा बंदरों को एक जहर (न्यूरोटॉक्सिन) दिया जाता था. फिर जब उनके बच्चे पैदा होते थे तो उन नन्हे बंदरों को मांओं से अलग करके उन पर न्यूरोलॉजिकल टेस्ट किए गए थे. आखिर में उन्हें मार दिया गया.
दिल दहलाने वाला एक्सपेरिमेंट
PETA के अनुसार इन नवजात बंदरों में से कुछ केवल दो दिन के थे. इन नन्हें बंदरों का इस्तेमाल डोमोइक एसिड पर रिसर्च में किया गया था. डोमोइक एसिड समुद्र में पाए जाने वाले शैवाल (एलगी) से पैदा होने वाला एक विषैला पदार्थ है जो शंखों में जमा हो जाता है और मनुष्यों में बीमारी का कारण बन सकता है. ये एक्सपेरिमेंट एक प्रोजेक्ट का हिस्सा थे जो 2014 से 2020 तक 6 साल तक चला.
वीडियो में बंदरों के सिर पर इलेक्ट्रोड लगे हुए दिखाई दे रहे हैं. उन बंदरों पर यह जांच की जा रही थी कि क्या गर्भ में डोमोइक एसिड के संपर्क में आने से उनके मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा है. जब यह बच्चे अपनी मां के गर्भ में थे तब ही उन मांओं को इस विषैले पदार्थ के संपर्क में ला दिया गया था. वीडियो में छोटे बंदर डरे हुए दिख रहे हैं. वे कंबल पकड़े हुए हैं, अपनी उंगलियां चूस रहे हैं, चीख रहे हैं और झटके खा रहे हैं, जबकि वैज्ञानिक उनका सिर मूंड रहे हैं और उनकी याददाश्त और रिफ्लेक्स टेस्ट कर रहे हैं.
यूनिवर्सिटी में हो रहा था एक्सपेरिमेंट
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की 'इन्फेंट प्राइमेट रिसर्च लैबोरेटरी' में मैकाक बंदरों के बच्चों को पाला गया था. ये प्रोजेक्ट ये देखने के लिए था कि डोमोइक एसिड नाम का जहर, बंदरों जैसे जानवरों के छोटे बच्चों के दिमाग और नसों पर क्या बुरा असर डालता है. इसके लिए रिसर्चर्स ने 32 गर्भवती मैकाक बंदरियों को रोजाना डोमोइक एसिड की खुराक दी. जन्म के बाद, 28 बच्चों को उनकी माताओं से अलग कर दिया गया, उन्हें बोतल से दूध पिलाया गया और इनक्यूबेटर में रखा गया. तीन सप्ताह के होने पर, इन बच्चों को अलग-अलग रखा गया.
PETA के वैज्ञानिकों ने भी माना- यह क्रूर था
PETA में प्राइमेट मामलों की मुख्य विज्ञान सलाहकार डॉ. लिसा जोन्स-एंगल के अनुसार ये बंदर इतने छोटे हैं कि इनके शरीर पर अभी भी नवजात मकाक बंदरों वाले खास काले बाल हैं. लेकिन अपनी माताओं से चिपके रहने के बजाय, ये धातु की मेजों पर रखे कंबल को पकड़े हुए थे. जंगल में, मकाक बंदर मिलजुलकर सामाजिक समूहों में रहते हैं. लंबी पूंछ वाले मकाक बंदरों की विशेषज्ञ डॉ. मालेन हैनसेन के अनुसार, इन बंदरों के बच्चों को अपने सामाजिक और व्यवहार संबंधी विकास के लिए लंबे समय तक अपनी मां की देखभाल की जरूरत होती है. वे अपनी मां के बिना पनप नहीं सकते. वे कहती हैं, "ऐसी रिसर्च करना अनैतिक है, जिसमें मकाक बंदर के बच्चों को उनकी मां से अलग कर दिया जाए. बस, बात खत्म."
यह प्रोजेक्ट 2014 से 2020 तक चला और इसे अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) से 4.2 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग मिली. कुछ एक्सपेरिमेंट कई सालों तक चले. PETA के अनुसार एक्सपेरिमेंट पूरे होने के बाद बंदरों को मार दिया गया.
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