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Peace Index

'Peace Index' - 3 News Result(s)
  • ये हैं दुनिया के टॉप-10 खतरनाक देश, आपको चौंकाएंगे कुछ नाम

    ये हैं दुनिया के टॉप-10 खतरनाक देश, आपको चौंकाएंगे कुछ नाम

    दुनिया के सबसे खतरनाक देशों (World's Most Dangerous Countries 2024) की लिस्‍ट में पहला नाम यमन का है. ग्‍लोबल पीस इंडेक्‍स ने यह सूची जारी की है, जिसमें ज्‍यादातर ऐसे देश हैं जो युद्ध से जूझ रहे हैं.

  • 2017 वैश्विक शांति सूचकांक में भारत 137वें स्थान पर 

    2017 वैश्विक शांति सूचकांक में भारत 137वें स्थान पर 

    इंस्टीट्यूट आफ इकोनामिक्स एंड पीस ने कहा कि यह मोटे तौर पर कानून प्रवर्तन बढ़ने से हिंसक अपराध के स्तर में कमी आने के चलते हुआ है. इस बीच कश्मीर में 2016 के मध्य में अशांति बढ़ने से भारत और उसके पड़ोसी पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था , बाहरी संघर्ष से दोनों देशों में मृतक संख्या बढ़ गई.  

  • क्या आर्थिक विकास के लिए अशांति जरूरी है?

    क्या आर्थिक विकास के लिए अशांति जरूरी है?

    इंस्‍टीट्यूट ऑफ इकोनोमिक्स एंड पीस की रिपोर्ट वैश्विक शांति सूचकांक (ग्लोबल पीस इंडेक्स, 2015) बताती है कि विश्व में लगातार अशांति बढ़ रही है. क्या हमने कभी यह सोचा है कि दुनिया की 720 करोड़ लोगों की आबादी में से दुनिया के 20 शांत देशों में कुल 50 करोड़ लोग रहते हैं, जबकि 230 करोड़ लोग दुनिया के 20 सबसे अशांत देशों में रह रहे हैं.

'Peace Index' - 3 News Result(s)
  • ये हैं दुनिया के टॉप-10 खतरनाक देश, आपको चौंकाएंगे कुछ नाम

    ये हैं दुनिया के टॉप-10 खतरनाक देश, आपको चौंकाएंगे कुछ नाम

    दुनिया के सबसे खतरनाक देशों (World's Most Dangerous Countries 2024) की लिस्‍ट में पहला नाम यमन का है. ग्‍लोबल पीस इंडेक्‍स ने यह सूची जारी की है, जिसमें ज्‍यादातर ऐसे देश हैं जो युद्ध से जूझ रहे हैं.

  • 2017 वैश्विक शांति सूचकांक में भारत 137वें स्थान पर 

    2017 वैश्विक शांति सूचकांक में भारत 137वें स्थान पर 

    इंस्टीट्यूट आफ इकोनामिक्स एंड पीस ने कहा कि यह मोटे तौर पर कानून प्रवर्तन बढ़ने से हिंसक अपराध के स्तर में कमी आने के चलते हुआ है. इस बीच कश्मीर में 2016 के मध्य में अशांति बढ़ने से भारत और उसके पड़ोसी पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था , बाहरी संघर्ष से दोनों देशों में मृतक संख्या बढ़ गई.  

  • क्या आर्थिक विकास के लिए अशांति जरूरी है?

    क्या आर्थिक विकास के लिए अशांति जरूरी है?

    इंस्‍टीट्यूट ऑफ इकोनोमिक्स एंड पीस की रिपोर्ट वैश्विक शांति सूचकांक (ग्लोबल पीस इंडेक्स, 2015) बताती है कि विश्व में लगातार अशांति बढ़ रही है. क्या हमने कभी यह सोचा है कि दुनिया की 720 करोड़ लोगों की आबादी में से दुनिया के 20 शांत देशों में कुल 50 करोड़ लोग रहते हैं, जबकि 230 करोड़ लोग दुनिया के 20 सबसे अशांत देशों में रह रहे हैं.