टीवी के मशहूर कॉमेडी शो ‘साराभाई वर्सेज साराभाई' में रोशेश का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले राजेश कुमार ने एक समय एक्टिंग से दूरी बना ली थी. साल 2017 में उन्होंने मुंबई छोड़कर अपने गांव गया, बिहार का रुख किया. यहां उन्होंने खेती में हाथ आजमाने का फैसला किया. मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं था. वह किसानों की परेशानियों को करीब से समझना चाहते थे. लेकिन खेती का यह सफर उनके लिए आसान नहीं रहा. करीब पांच साल तक उन्होंने कई प्रयोग किए. बाढ़, कोरोना और पानी की कमी ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. इस दौरान उन पर करीब 2 करोड़ रुपये का कर्ज भी हो गया.
सद्गुरु की बात से मिली खेती की प्रेरणा
राजेश कुमार की खेती में दिलचस्पी सद्गुरु से मुलाकात के बाद बढ़ी. वह ईशा फाउंडेशन से जुड़े कई कार्यक्रमों का हिस्सा भी रहे. उन्होंने सद्गुरु के ‘रैली फॉर रिवर्स' अभियान के लिए भी कई कार्यक्रम होस्ट किए. इसी दौरान सद्गुरु की एक बात ने राजेश को काफी प्रभावित किया. उन्होंने युवाओं से खेती की दिशा में काम करने की बात कही थी. राजेश को लगा कि सिर्फ किसानों को सलाह देना सही नहीं है. उन्हें खुद खेती करके देखना चाहिए.
राजेश ने बताया था कि वह किसानों को कीटनाशक का इस्तेमाल न करने की सलाह देते थे. लेकिन बाद में उन्हें लगा कि किसान किन परिस्थितियों में ऐसा करते हैं, यह समझने के लिए खुद खेत में उतरना जरूरी है. इसके बाद उन्होंने हॉर्टिकल्चर यानी बागवानी से शुरुआत की.
बाढ़ ने उजाड़ दी पूरी मेहनत
राजेश के लिए खेती का अनुभव लगातार मुश्किल होता गया. उन्होंने बताया कि खेती और जमीन को समझने में उन्हें करीब पांच साल लग गए. उन्होंने शुरुआत में पौधे लगाए. उनकी मेहनत रंग लाने वाली थी. तभी इलाके में करीब 35 साल बाद भयंकर बाढ़ आ गई. बाढ़ में उनके लगाए हुए सारे पौधे बह गए. राजेश ने हार नहीं मानी. उन्होंने दोबारा करीब 15 हजार पेड़ लगाए. लेकिन इस बार कोरोना महामारी ने उनकी योजना को प्रभावित कर दिया.
उन्होंने इसके बाद एक और कोशिश की. मगर तब पानी की समस्या सामने आ गई. उनके पास जितने पैसे थे, उससे करीब 500 फीट तक बोरवेल खुदवाया गया. लेकिन वहां पानी की एक बूंद भी नहीं मिली.
2 करोड़ के कर्ज में डूब गए राजेश
खेती में लगातार नुकसान का असर राजेश की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा. उनके पास कमाई का कोई नियमित जरिया नहीं था. खेती में लगातार पैसा लग रहा था. लेकिन उससे आमदनी नहीं हो रही थी. राजेश ने एक बातचीत में बताया था कि उन्होंने अपनी सारी बचत लगा दी थी. इसके बाद उन्हें करीब 2 करोड़ रुपये के कर्ज में जाना पड़ा. उन्होंने उस दौर को आर्थिक रूप से बेहद मुश्किल बताया था. हालात ऐसे भी आए जब उन्होंने अपने बेटे के स्कूल के बाहर सब्जियां बेचकर गुजारा किया. हालांकि राजेश ने इस पूरे दौर को अपनी हार नहीं माना.
अब सिर्फ 10-15 फीसदी कर्ज बाकी
मुश्किल समय में राजेश ने आध्यात्मिकता को अपना सहारा बताया. उनके मुताबिक, इस वजह से वह तनाव, गुस्से या डिप्रेशन में नहीं गए. उन्होंने कहा कि काम और कोशिश रुकनी नहीं चाहिए. समय के साथ उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी. अप्रैल में राजेश ने बताया था कि अब उनका करीब 10 से 15 फीसदी कर्ज ही बाकी है. यानी 2 करोड़ रुपये के कर्ज से निकलकर अब वह करीब 20 लाख रुपये के कर्ज तक पहुंच चुके हैं.
एक्टिंग से दूर रहने के बाद राजेश ने धीरे-धीरे पर्दे पर वापसी भी की. ‘साराभाई वर्सेज साराभाई' के रोशेश के रूप में उनकी पहचान आज भी कायम है. हाल के वर्षों में वह ‘सैयारा', ‘है जवानी तो इश्क होना है', ‘ओह माय डॉग' और ‘निशानची' जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आए हैं. खेती ने उन्हें आर्थिक नुकसान जरूर दिया, लेकिन राजेश के लिए यह अनुभव जिंदगी की बड़ी सीख बन गया.
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