निमरत कौर के पिता मेजर भुपिंदर सिंह का 32 साल पहले कश्मीर के आतंकी हमले में कत्ल हो गया था. तब निमरत कौर केवल 11 साल की थीं. वहीं ANI के साथ बात करते हुए निमरत कौर ने उस ट्रॉमा और पिता को खोने के गम के बारे में बात की. उन्होंने मां के बारे में बताया, जो उस समय बहुत यंग थीं और उन्होंने अकेले निमरत और उनकी बहन को पाला. इसके साथ कम उम्र में ही मुश्किलों का सामना करने और उनसे उबरने का सबक सिखाया. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि निमरत के पिता मेजर भूपेंद्र सिंह ने अपनी आखिरी सांस तक गर्व और बहादुरी के साथ देश की सेवा की.
पिता के आखिरी पलों को किया याद
निमरत ने कहा, "जब हमने उन्हें कश्मीर में खोया, तब मेरी मां बहुत कम उम्र की थीं. वह 30-35 साल की उम्र के आसपास थीं. उनकी दुनिया बिखर गई थी. हम दो छोटी लड़कियां थीं, जिनकी वह परवरिश कर रही थीं. उस समय हमारे साथ परिवार का सहारा था, खासकर मेरी मां का परिवार. लेकिन इसके बावजूद, हमारी जानी-पहचानी जिंदगी खत्म हो चुकी थी. ऐसी घटना के लिए कोई भी तैयार नहीं हो सकता. यहां तक कि मेरे पिता के साथ जिस तरह से यह हुआ, उसके लिए भी कोई तैयार नहीं हो सकता था और मुझे उन बातचीत से पता चला, जो उन्हें गोली मारे जाने से पहले हुई थीं, उन्होंने कहा था कि 'मेरा परिवार है, मेरी दो बेटियां हैं.'
आतंकी ने पहनी थी सेना की वर्दी
मुझे पता है कि अपनी आखिरी सोच में वह हमारे बारे में ही सोच रहे थे. मुझे लगता है कि वह बस उसी जिंदगी में वापस आना चाहते थे और मेरी मां के लिए यह दिन-ब-दिन गुजरने वाला बहुत मुश्किल समय था. उन्हें असल में आम दिन की तरह काम के दौरान अगवा किया गया था. वह ड्यूटी पर जा रहे थे और लौटते समय उन्हें उन लोगों ने अगवा कर लिया, जो सैनिक बनकर आए थे. उन्होंने सेना की वर्दी पहनी हुई थी और उन्हें ले गए."
निमरत कौर ने कहा- ताबूत में देखा
निमरत ने बताया कि परिवार को उनकी मौत की खबर मिलने से पहले सात दिनों तक आतंकवादियों ने कई मांगें रखी थीं. उन्होंने आगे कहा, "कुछ अजीबोगरीब मांगें थीं. उन्होंने भारत में कैद अन्य लोगों की रिहाई और सात दिनों के दौरान कई अन्य अजीब मांगें रखीं. सातवें दिन, हमें खबर मिली कि उनकी हत्या कर दी गई है. मैंने उस सुबह अपने पिता को काम पर जाते हुए देखा था. मुझे बस उनके जाने की बात याद है और उसके बाद मैंने उन्हें सीधे ताबूत में देखा. इसलिए, इस मामले में मन को कोई शांति या समाधान नहीं मिला."
मां के हौसलें का किया सम्मान
आगे उन्होंने कहा, "देखने पर लगता है कि बहुत समय बीत गया है, कई दशक हो गए हैं. लेकिन कोई भी चीज उस कमी को पूरा नहीं कर सकती. न मेरी मां के लिए, न मेरी बहन के लिए, न मेरे लिए और न ही परिवार के बाकी सदस्यों के लिए. मुझे सच में लगता है कि जिस तरह से मेरी मां ने हमारी परवरिश की और उस घटना के बाद अपनी और हमारी जिंदगी को फिर से खड़ा किया, ऐसी बहुत कम महिलाएं हैं, जो अकेले दम पर, इतने सम्मान और गरिमा के साथ ऐसा कर पातीं. जब आप बचपन में ही किसी ऐसी गहरी और मुश्किल घटना से गुजरते हैं. तो आपको अच्छी तरह पता होता है कि परिवार किन हालात से गुजरेगा और वे रोजमर्रा की जिंदगी कैसे जिएंगे. मेरी मां जिन हालात से गुजरीं, मैं या मेरी बहन जिन हालात से गुजरे, उस एक्सपीरियंस को आप बहुत करीब से पहचानते हैं."
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