Holi 2026: होली आते ही बाजार रंगों से भरने लगते हैं, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ गुलाल या पिचकारी की नहीं है. जयपुर की एक पुरानी शाही परंपरा फिर से लोगों का ध्यान खींच रही है. नाम है गुलाल गोटा, जो इस बार त्योहार की सबसे ज्यादा डिमांड वाली चीजों में शामिल हो गया है. सोशल मीडिया पर इन रंगीन गेंदों की खूब तस्वीरें और वीडियो घूम रहे हैं. कई इन्फ्लुएंसर खास तौर पर जयपुर पहुंचकर इनके बॉक्स खरीदते दिख रहे हैं. देखने वालों को यह नया ट्रेंड लग सकता है, लेकिन सच यह है कि गुलाल गोटा का इतिहास करीब 300 से 400 साल पुराना माना जाता है.
बताया जाता है कि जयपुर के राजघराने होली खेलने के लिए इसी तरीके को पसंद करते थे. उस समय इसे होली खेलने का सलीकेदार और हल्का-फुल्का तरीका माना जाता था. धीरे-धीरे यह परंपरा महलों से निकलकर आम लोगों तक पहुंच गई और आज फिर से चर्चा में है.
Holi 2026: सोशल मीडिया पर क्यों छाया गुलाल गोटा, जयपुर की शाही परंपरा फिर चर्चा में
क्या होता है गुलाल गोटा
गुलाल गोटा असल में लाख से बने नाजुक रंगीन गोले होते हैं. इन्हें हल्के से फेंका जाता है. जैसे ही ये किसी सतह से टकराते हैं, पतली लाख की परत टूटती है और अंदर भरा सूखा गुलाल बाहर फैल जाता है. यही वजह है कि इसे खेलने का अंदाज मजेदार भी लगता है और ज्यादा रंग भी नहीं फैलता.
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इनकी नाजुक बनावट ही इन्हें खास बनाती है. कारीगरों का कहना है कि इन्हें दूर तक भेजना आसान नहीं होता क्योंकि ट्रांसपोर्ट के दौरान लाख की खोल टूट जाती है. यही कारण है कि लोग इन्हें सीधे जयपुर से खरीदना पसंद कर रहे हैं और पिंक सिटी इन दिनों गुलाल गोटा का बड़ा केंद्र बनी हुई है.
मुस्लिम कारीगर तैयार करते हैं ये रंगीन गोले
इन रंगीन गोलों को जयपुर का मुस्लिम मणिहार समुदाय हाथ से तैयार करता है. हर पीस को आकार देना, उसमें गुलाल भरना और सील करना पूरी तरह हाथ का काम है. यह हुनर पीढ़ियों से चला आ रहा है और आज भी उसी सावधानी से निभाया जा रहा है. इंस्टाग्राम पर कंटेंट क्रिएटर आशीष वाधवानी के एक वीडियो में एक कारीगर ने इसकी पूरी प्रक्रिया दिखाई है. वीडियो देखा जा सकता है कि गर्म लाख को किस तरह पतली खोखली खोल में बदला जाता है. कारीगर बताते हैं कि यह काम दिखने में आसान लगता है, लेकिन काफी मेहनत मांगता है.
बेहद मुश्किल है बनाना
लाख की चूड़ियां बनाने जैसी प्रक्रिया होती है, लेकिन गुलाल गोटा बनाना ज्यादा चुनौती भरा है. गर्म लाख को संभालते समय हाथों पर छाले तक हो जाते हैं. काम की शुरुआत लाख को गर्म कर मुलायम बनाने से होती है. फिर ब्लो पाइप की मदद से कारीगर इसे पतली खोखली शक्ल देते हैं. इसके बाद खोल को पानी में डालकर ठंडा किया जाता है. और फिर इनके सूखने के बाद हर खोल में हाथ से गुलाल भरा जाता है ताकि वह आसानी से फूटे और किसी को नुकसान न पहुंचे. आखिर में रंगीन कागज से उसका मुंह बंद कर दिया जाता है.
हाथों की कारीगरी
इस पूरी प्रक्रिया में मशीनों का इस्तेमाल नहीं होता. हर गुलाल गोटा कारीगरों के धैर्य और अनुभव का नतीजा होता है. होली से करीब एक महीना पहले मणिहार परिवारों के घर और वर्कशॉप में इसकी तैयारी शुरू हो जाती है. दिलचस्प बात यह भी है कि यह त्योहार भले उनके धर्म से जुड़ा न हो, लेकिन परंपरा और रोजी-रोटी के कारण यह काम उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है. आज इंटरनेट के दौर में गुलाल गोटा को एक बार ट्रेंड में ला दिया है.
तो अगर आप भी राजस्थान की इस परंपरागत और राजस्थानी होली का मजा लेना चाहते हैं, तो आपको किसी ई-कॉमर्स सर्विस के जरिए तो शायद ही मिल सके. इन्हें लेना है तो जयपुर ही आना होगा.
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