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घर के लिए सब कुछ, खुद के लिए कुछ नहीं, क्यों ऐसा करते हैं पिता?

भारतीय परिवारों में पिता अक्सर अपने से पहले घर वालों के बारे में सोचते हैं. वे अपनी जरूरतों और इच्छाओं को पीछे रख देते हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है? जानिए इसके पीछे की भावनात्मक और सामाजिक वजहें.

घर के लिए सब कुछ, खुद के लिए कुछ नहीं, क्यों ऐसा करते हैं पिता?
पापा क्यों नहीं लेते खुद के लिए कुछ? इसके पीछे छुपी है बड़ी वजह
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क्या आपने कभी गौर किया है कि घर में सबके लिए नई चीजें आ जाती हैं, लेकिन पापा सालों तक उसी घड़ी, उसी मोबाइल या उसी चप्पल से काम चला लेते हैं? बच्चों की पढ़ाई हो, परिवार की जरूरतें हों या घर का कोई बड़ा खर्च, पिता अक्सर सबसे पहले दूसरों के बारे में सोचते हैं. कई बार तो वे अपनी छोटी-छोटी इच्छाएं भी सिर्फ इसलिए टाल देते हैं ताकि परिवार की कोई जरूरत अधूरी न रह जाए. यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि लाखों भारतीय परिवारों की सच्चाई है. आखिर ऐसा क्यों होता है कि पिता खुद को सबसे आखिर में रखते हैं? आइए इसकी वजह समझते हैं.

जिम्मेदारी का एहसास बचपन से मिलता है | A Sense of Responsibility

भारतीय समाज में अक्सर लड़कों को बचपन से ही परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार किया जाता है. बड़े होते-होते यह सोच उनकी आदत का हिस्सा बन जाती है और परिवार उनकी प्राथमिकता बन जाता है.

परिवार की खुशी में ढूंढते हैं अपनी खुशी | Finding Happiness in Family

कई पिता मानते हैं कि अगर उनके बच्चे और परिवार खुश हैं तो वही उनकी सबसे बड़ी खुशी है. यही वजह है कि वे अपनी जरूरतों को पीछे रख देते हैं.

खर्च करने से पहले कई बार सोचते हैं | They Think Before Spending

बहुत से पिता अपने ऊपर खर्च करने से पहले कई बार सोचते हैं. उन्हें लगता है कि वही पैसा बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतों या भविष्य के लिए बचाया जा सकता है.

भावनाएं कम दिखाते हैं | They Rarely Express Emotions

भारतीय परिवारों में अक्सर पिता को मजबूत और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा जाता है. इसी कारण कई पिता अपनी परेशानियां, इच्छाएं और भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते.

खुद की जरूरतों को टालना बन जाती है आदत | A Habit of Self-Sacrifice

समय के साथ कई पिता अपनी जरूरतों को टालने के इतने आदी हो जाते हैं कि उन्हें खुद के लिए कुछ खरीदना या अपने ऊपर खर्च करना जरूरी ही नहीं लगता.

अब बदल रही है तस्वीर | Things Are Slowly Changing

हालांकि अब धीरे-धीरे यह सोच बदल रही है. नई पीढ़ी के कई पिता परिवार के साथ-साथ अपनी सेहत, पसंद और जरूरतों पर भी ध्यान देने लगे हैं. जानकार मानते हैं कि खुद का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है जितना परिवार का.

पिता भी इंसान हैं, सिर्फ जिम्मेदारियां नहीं | Fathers Need Care Too

हम अक्सर मां के त्याग की बात करते हैं, लेकिन पिता के त्याग पर कम चर्चा होती है. सच यह है कि पिता भी इंसान हैं. उनकी भी इच्छाएं, शौक और जरूरतें होती हैं. इसलिए परिवार के लिए सब कुछ करने वाले पिता को कभी-कभी यह एहसास दिलाना भी जरूरी है कि उनकी खुशियां और जरूरतें भी उतनी ही मायने रखती हैं.

हो सकता है आपके घर में भी कोई ऐसा पिता हो, जिसने अपने लिए बहुत कम और परिवार के लिए बहुत ज्यादा जिया हो. ऐसे में कभी-कभी उनका धन्यवाद करना, उनके लिए कुछ खास करना या उनकी पसंद का ध्यान रखना भी उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है.

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लेखक के बारे में
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दीक्षा सोनी
Sub-Editor
दीक्षा सोनी पिछले 4 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इन्हें फीचर और न्यूज राइटिंग का अनुभव है. बतौर सब एडिटर 2022 से एनडीटीवी में कार्यरत... और पढ़ें
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