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साइंस+ फैशन का कमाल: टी‑रेक्स के कोलेजन से बना दुनिया का सबसे अनोखा हैंडबैग

T-Rex Leather Bag Price: वैज्ञानिकों ने टी‑रेक्स के फॉसिल से कोलेजन निकालकर लैब‑ग्रोन लेदर से लक्ज़री हैंडबैग बनाया है, जिसकी कीमत 5 करोड़ रुपये तक हो सकती है.

साइंस+ फैशन का कमाल: टी‑रेक्स के कोलेजन से बना दुनिया का सबसे अनोखा हैंडबैग
World's first T-Rex leather product unveiled

T-Rex Leather Bag Price: आज साइंस और फैशन मिलकर ऐसी-ऐसी चीजें बना रहे हैं, जिनके बारे में सुनकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. एक बार फिर कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसने सभी को चौंका दिया है. वैज्ञानिकों और डिजाइनरों ने दुनिया के सबसे खतरनाक डायनासोर टी-रेक्स के जीवाश्म से निकाले गए कोलेजन प्रोटीन का इस्तेमाल करके एक लग्ज़री हैंडबैग बनाया है. देखा जाए, तो एक तरह से करोड़ों साल पुरानी चीज़ आज के मॉडर्न फैशन का हिस्सा बन चुकी है.

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क्यों है ये बैग इतना खास?

इसे किसी जानवर की खाल से नहीं, बल्कि लैब में तैयार किए गए कोलेजन से बनाया गया है. वैज्ञानिकों ने टी-रेक्स के फॉसिल में मिले कोलेजन के छोटे-छोटे हिस्सों से शुरुआत की और फिर उसे दोबारा बनाकर नया कोलेजन तैयार किया जिसे प्रोसेस करके लेदर जैसा मटेरियल बनाया गया.

कहां रखा गया है ये बैग?

हरे-नीले रंग का यह शानदार बैग इस समय एम्स्टर्डम के आर्ट जू म्यूजियम में रखा गया है. इस बैग को इसे एक पिंजरे में, चट्टान के ऊपर, टी-रेक्स की बड़ी-सी प्रतिकृति के नीचे प्रदर्शित किया गया है. 

लोग इसे कब तक देख सकते हैं?

लोग इसे 11 मई तक देख सकते हैं, उसके बाद यह बैग नीलामी में जाएगा, और इसकी कीमत की शुरुआत ही लगभग 5 करोड़ रुपये से होने की उम्मीद है.

ये बैग किसने बनाया है?

यह हैं बैग फैशन ब्रांड Enfin Leve ने डिजाइन किया है और इसमें स्टर्लिंग सिल्वर, काले हीरे और बेहद फाइन हैंडवर्क का इस्तेमाल किया गया है.  इस मटेरियल का एक छोटा-सा सैंपल भी बनाया गया है जिसकी कीमत 11 से 22 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है.

यह मटेरियल किसने तैयार किया है?

इस मटेरियल को तीन कंपनियों VML, The Organoid Company और Lab-Grown Leather Ltd ने मिलकर तैयार किया है. 

इस बैग को कैसे तैयार किया?

सबसे पहले टी-रेक्स के फॉसिल से कोलेजन के हिस्से लिए, कंप्लीट स्ट्रक्चर दोबारा बनाया, उसे कोशिकाओं में डालकर नया कोलेजन तैयार करवाया और फिर इस कोलेजन को चमड़े जैसी सामग्री में बदल दिया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह काम आसान नहीं था. ऑर्गेनॉइड कंपनी के सीईओ थॉमस मिशेल ने भी कहा था कि "इसमें काफी चुनौतियां थीं."

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