सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट मेला को 8 दिन हो गए हैं. ये हरियाणा के सूरजकुंड में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला है. ‘लोकल टू ग्लोबल, आत्मनिर्भर भारत की पहचान' थीम पर आधारित इस मेले को लोग दूर-दूर से देखने आ रहे हैं. इस अंतरराष्ट्रीय मेले में 50 से ज़्यादा देशों और 700 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी है. शिल्प, लोककला और संस्कृति के इस उत्सव में इस बार भारत की विविधता के साथ वैश्विक रंग भी साफ नजर आ रहे हैं. इस बारे में एनडीटीवी के रिपोर्टर Jitendra Beniwal ने वहां मौजूद लोगों से बात की.
शिल्प के साथ संगीत और संस्कृति का महोत्सव-
सूरजकुंड मेला इस बार सिर्फ शिल्प तक सीमित नहीं है. मुख्य चौपाल और महा स्टेज पर हर शाम लोक, बॉलीवुड, सूफी, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और हास्य की प्रस्तुतियां होंगी. देश-विदेश के नामचीन कलाकार मेले की सांस्कृतिक संध्याओं को खास बनाएंगे.
इस वर्ष 50 से अधिक देशों के करीब 700 प्रतिभागी मेले में शामिल हुए हैं, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है.
सबसे अच्छी बात कि यहां बच्चों से लेकर बड़े तक मजे कर रहे हैं. आपको यहां मेला घूमने के साथ-साथ लोकल स्वाद भी मिलेगा. इतना ही नहीं आप यहां आकर अपनी पसंद की शॉपिंग कर सकते हैं. यानि अगर आपको कश्मीरी कपड़े पसंद हैं, तो यहां आपकर आप ले सकते हैं.
लोग क्यों कह रहे सूरजकुंड में आकर हरियाणा अपणा घर नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा-
सूरजकुंड मेला में बनाया गया हरियाणा अपना घर पवेलियन हरियाणवी प्राचीन संस्कृति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है और सहज ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है.
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