अगर आप पांच लोगों से पूछें कि त्वचा पर पिगमेंटेशन क्यों होता है, तो शायद आपको पांच अलग-अलग जवाब मिलेंगे. कोई इसकी वजह धूप को बताएगा, तो कोई तनाव, हार्मोनल बदलाव या बढ़ती उम्र को जिम्मेदार ठहराएगा. यही भ्रम इस बात को दिखाता है कि पिग्मेंटेशन आज त्वचा से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक होने के बावजूद अभी भी लोगों के लिए पूरी तरह समझना आसान नहीं है. सोशल मीडिया पर वायरल स्किन केयर टिप्स और रातों रात असर दिखाने वाले दावों के दौर में यह मान लेना आसान है कि हर काले दाग का तुरंत इलाज संभव है, लेकिन हकीकत यह है कि पिगमेंटेशन एक दिन में नहीं होता और न ही एक रात में गायब हो जाता है. इसके पीछे के असली कारणों को समझना जरूरी है, ताकि हम गलतफहमियों और सच्चाई के बीच फर्क कर सकें और त्वचा की बेहतर देखभाल के लिए सही फैसले ले सकें.
पिगमेंटेशन सिर्फ धूप की वजह से होता है?
धूप में ज्यादा समय बिताना पिगमेंटेशन की एक बड़ी वजह जरूर है, लेकिन यह इसका एकमात्र कारण नहीं है. त्वचा में मेलानिन का उत्पादन कई अन्य कारणों से भी बढ़ सकता है. इनमें मुंहासों के निशान, हार्मोनल बदलाव, त्वचा में सूजन, कुछ दवाओं का असर, बार-बार होने वाली जलन आदि कारण शामिल हैं. पिगमेंटेशन हर व्यक्ति में अलग तरह से दिखाई देता है और उसका इलाज भी अलग हो सकता है. इसलिए पिगमेंटेशन का सही कारण जानना और उसी के अनुसार उपचार करना सबसे ज्यादा जरूरी माना जाता है.
ज्यादा स्किन केयर प्रोडक्ट्स लगाने से पिगमेंटेशन जल्दी ठीक हो जाता है?
आजकल स्किनकेयर से जुड़ी जानकारी और प्रोडक्ट्स पहले से कहीं ज्यादा आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन कई लोग यह मानने लगे हैं कि जितने ज्यादा प्रोडक्ट्स इस्तेमाल किए जाएंगे, उतना ही अच्छा और तेज रिजल्ट मिलेगा. इसी वजह से कई लोग एक साथ कई तरह के सीरम, एक्सफोलिएंट और ट्रीटमेंट क्रीम लगाने लगते हैं. हालांकि, त्वचा तेजी नहीं बल्कि संतुलन के आधार पर काम करती है. बहुत सारे एक्टिव इंग्रीडिएंट्स एक साथ इस्तेमाल करने से त्वचा पर दबाव बढ़ सकता है. इससे त्वचा में रूखापन, संवेदनशीलता और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो पिगमेंटेशन को और बढ़ा सकती हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, सही प्रोडक्ट्स का नियमित और सही इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होता है.
दाग हल्के पड़ गए तो इलाज खत्म हो गया?
बहुत से लोग सोचते हैं कि जब काले धब्बे हल्के दिखने लगे तो पिगमेंटेशन पूरी तरह खत्म हो गया है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. पिगमेंटेशन के निशान भले कम दिखाई दें, लेकिन अगर इसकी असली वजह का समाधान नहीं किया गया है, तो यह दोबारा लौट सकता है.
बचाव बाद में भी किया जा सकता है?
कई लोग तब तक त्वचा की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते, जब तक पिगमेंटेशन साफ नजर आने न लगे, लेकिन तब तक त्वचा लंबे समय से नुकसान झेल रही होती है. पिगमेंटेशन अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होता है. रोजमर्रा के छोटे-छोटे एक्सपोजर, जैसे धूप में बाहर निकलना, ऑफिस जाना, गाड़ी तक पैदल जाना या दिन के समय बाहर समय बिताना, समय के साथ त्वचा पर असर डालते हैं. ये चीजें भले उस समय मामूली लगें, लेकिन महीनों और सालों में पिगमेंटेशन की वजह बन सकती हैं. ऐसे में पिगमेंटेशन होने के बाद उसे कम करने की कोशिश करने से बेहतर है कि शुरुआत से ही त्वचा की सही देखभाल की जाए.
क्या किसी एक चमत्कारी प्रोडक्ट से पिगमेंटेशन खत्म हो सकता है?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फिक्सडर्मा की सीईओ और को-फाउंडर शाइली मेहरोत्रा का कहना है कि पिगमेंटेशन को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह है कि कोई एक जादुई प्रोडक्ट इसे पूरी तरह ठीक कर सकता है, जबकि त्वचा की समस्याएं इतनी सरल नहीं होती. पिगमेंटेशन को सिर्फ एक कॉस्मेटिक समस्या मानकर छिपाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. यह अक्सर त्वचा के अंदरूनी या बाहरी तनाव का संकेत भी हो सकता है. पिगमेंटेशन से बेहतर तरीके से निपटने के लिए धैर्य, नियमित देखभाल और व्यक्ति की त्वचा के अनुसार सही उपचार जरूरी है.
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