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क्या आप साथ रहने की सोच रहे हैं? एक्सपर्ट से जानिए 3 ऐसी बात, जो साथ रहने के फैसले से पहले जरूर सोचनी चाहिए

किसी के साथ रहने की सोचना और फिर आगे चलकर अपने ही फैसले पर पछताने से बेहतर है कि आपको पहले ही कुछ बातों के बारे में सोचना चाहिए.

क्या आप साथ रहने की सोच रहे हैं? एक्सपर्ट से जानिए 3 ऐसी बात, जो साथ रहने के फैसले से पहले जरूर सोचनी चाहिए
रिलेशनशिप टिप्स
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अगर, आप किसी को पसंद करते हैं और उसके साथ रहना चाहते हैं तो यह एक बड़ा कदम हो सकता है. लिव-इन या शादी के बाद साथ रहना किसी भी कपल के रिश्ते में एक बड़ा और रोमांचक कदम होता है. किसी के साथ रहने की सोचना और फिर आगे चलकर अपने ही फैसले पर पछताने से बेहतर है कि आपको पहले ही कुछ बातों के बारे में सोचना चाहिए. क्योंकि, किसी को प्यार करना, फोन पर बात करना और दिन का ज्यादातर समय एक साथ बिताना अलग बात है, लेकिन हर समय एक साथ रहना अलग बात है. जब दो लोग एक साथ रहते हैं तो असल सच और प्यार तभी पता चलता है. हालांकि, इस फैसले को लेने से पहले कुछ जरूरी बातों पर गंभीरता से विचार करना भी बहुत जरूरी है. थेरेपिस्ट और कपल्स काउंसलर जेफ गुंथर ने ऐसे ही तीन जरूरी सवाल शेयर किए, जिन पर कपल्स को साथ रहने का अंतिम फैसला लेने से पहले जरूर विचार करना चाहिए.

मैं से हम बनने वाली भावनाओं को कैसे संभालेंगे?

जेफ के अनुसार, साथ रहने का फैसला जितना रोमांचक होता है, उतना ही यह कुछ भावनात्मक बदलाव भी लेकर आता है. उन्होंने कहा कि दो लोगों की जिंदगी का एक होना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ कुछ चीजों को छोड़ना भी पड़ता है. जैसे अपनी कुछ आदतें, रोजमर्रा की दिनचर्या या निजी स्पेस. अगर आप लंबे समय से पूरी तरह स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं, तो यह बदलाव कभी-कभी उदासी या भावनात्मक असहजता भी पैदा कर सकता है. जेफ का कहना है कि यह एक सामान्य लेकिन थोड़ा अजीब भावनात्मक अनुभव हो सकता है. ऐसे समय में पार्टनर का साथ और समझ बहुत मददगार साबित हो सकती है. जरूरत पड़ने पर आप किसी करीबी दोस्त या थेरेपिस्ट से भी बात कर सकते हैं.

एक-दूसरे को कितना भावनात्मक सहारा दे सकते हैं?

जेफ के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति कितना ही संवेदनशील और समझदार क्यों न हो, वह हर समय भावनात्मक रूप से उपलब्ध नहीं रह सकता. उन्होंने कहा कि ऐसे दिनों के बारे में भी सोचना जरूरी है, जब आपके पास मानसिक या भावनात्मक एनर्जी कम हो. उस समय आप क्या करेंगे? क्या थोड़ी देर अकेले रहना पसंद करेंगे, पार्टनर के साथ समय बिताएंगे लेकिन गंभीर बातचीत से बचेंगे या उन्हें किसी दोस्त से बात करने के लिए कहेंगे? जेफ का मानना है कि भावनात्मक सहयोग को लेकर स्पष्ट सीमाएं तय करना जरूरी है. इससे रिश्ते में थकान और मानसिक दबाव बढ़ने से बचता है. साथ ही, यह दोनों लोगों के बीच समझ और संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है.

रिश्ते में जिम्मेदारियों और फैसलों का संतुलन कैसे बनाएंगे?

जेफ के अनुसार, साथ रहने के बाद कई बार रिश्ते में कुछ ऐसे फर्क या असंतुलन आ सकते हैं, जो शुरुआत में नजर नहीं आते. उदाहरण के लिए, क्या घर किसी एक व्यक्ति का है या किराए का एग्रीमेंट सिर्फ एक के नाम पर है? क्या दोनों की कमाई में बड़ा अंतर है? क्या साथ रहने का फैसला किसी एक ने ज्यादा जोर देकर लिया था? घर के काम, पालतू जानवरों या बच्चों की जिम्मेदारी कौन ज्यादा निभा रहा है?

जेफ का कहना है कि इस तरह के पावर डायनेमिक्स लगभग हर रिश्ते में होते हैं, लेकिन अगर इन्हें नजरअंदाज किया जाए, तो मन में नाराजगी और शिकायतें जमा होने लगती हैं, जो आगे चलकर रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

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