Parenting Tips: आज के समय में बच्चों की पढ़ाई को लेकर माता-पिता और स्कूलों की सबसे बड़ी चिंता अच्छे नंबर, टॉप रैंक और बेहतर करियर को लेकर होती है. लेकिन क्या केवल किताबों का ज्ञान ही बच्चों को जिदगी में सफल बना सकता है? सच यह है कि बदलते दौर में बच्चों के लिए पढ़ाई जितनी जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है इमोशनल एजुकेशन यानी भावनात्मक शिक्षा. जो बच्चे भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं, वे न सिर्फ पढ़ाई में बेहतर करते हैं, बल्कि जिंदगी की चुनौतियों का सामना भी आत्मविश्वास के साथ कर पाते हैं.
इमोशनल एजुकेशन का मतलब बच्चों को अपनी भावनाओं को समझना, उन्हें सही तरीके से व्यक्त करना और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाना है. गुस्सा, डर, दुख, खुशी या निराशा, ये सभी भावनाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन इन्हें संभालना सीखना बहुत जरूरी है. अगर बच्चा छोटी उम्र से ही यह सीख ले कि वह अपने मन की बात कैसे कहे और मुश्किल हालात में कैसे शांत रहे, तो वह मानसिक रूप से कहीं ज्यादा मजबूत बनता है.
इमोशनल एजुकेशन देने के फायदे | Benefits of Providing Emotional Education
1. आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ता है
भावनात्मक रूप से शिक्षित बच्चे खुद को बेहतर तरीके से पहचानते हैं. उन्हें अपनी ताकत और कमजोरियों का एहसास होता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है. ऐसे बच्चे दूसरों से तुलना करने के बजाय खुद को सुधारने पर ध्यान देते हैं.
2. तनाव और दबाव से निपटना आता है
आजकल बच्चों पर पढ़ाई, प्रतियोगिता और सोशल मीडिया का बहुत दबाव होता है. इमोशनल एजुकेशन बच्चों को यह सिखाती है कि तनाव आने पर घबराने के बजाय उससे कैसे निपटें. इससे एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा भी कम होता है.
3. रिश्ते बेहतर बनते हैं
जो बच्चे अपनी भावनाओं को समझते हैं, वे दूसरों की भावनाओं को भी समझ पाते हैं. इससे दोस्ती, परिवार और स्कूल के रिश्ते मजबूत होते हैं. ऐसे बच्चे टीमवर्क, सहानुभूति और सहयोग का महत्व समझते हैं.

4. फैसले लेने की क्षमता बढ़ती है
भावनात्मक रूप से मज़बूत बच्चे जल्दबाज़ी में फैसले नहीं लेते. वे सही-गलत में फर्क कर पाते हैं और अपने फैसलों की जिम्मेदारी भी लेते हैं. यह गुण आगे चलकर उन्हें जिंदगी में सही रास्ता चुनने में मदद करता है.
5. माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका
इमोशनल एजुकेशन सिर्फ़ स्कूल की किताबों से नहीं आती. माता-पिता का बच्चों से खुलकर बात करना, उनकी भावनाओं को नजरअंदाज़ न करना और उन्हें सुना जाना बहुत जरूरी है. स्कूलों में भी बच्चों को भावनाओं पर बात करने, सवाल पूछने और अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए.
अच्छे नंबर बच्चों को नौकरी दिला सकते हैं, लेकिन इमोशनल एजुकेशन उन्हें जिंदगी जीना सिखाती है. अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे खुश, आत्मनिर्भर और मजबूत इंसान बनें, तो पढ़ाई के साथ-साथ भावनात्मक शिक्षा को भी उतनी ही अहमियत देनी होगी.
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