आपका बच्चा स्कूल में करीब 7 घंटे बिताकर घर लौटता है. पूरे दिन आप यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि उसका दिन कैसा गुजरा. उसने स्कूल में क्या किया, दोस्तों के साथ क्या बातें हुईं, टीचर ने क्या पढ़ाया, लंच ब्रेक में क्या हुआ या किस बात पर वह हंसा. ऐसे में आप सबसे सामान्य सवाल पूछते हैं जैसे- आज स्कूल में दिन कैसा रहा, लेकिन ज्यादातर बच्चों का जवाब होता है, अच्छा था. बस, बातचीत वहीं खत्म हो जाती है. आप और जानना चाहते हैं, लेकिन बच्चा ज्यादा कुछ नहीं बताता. इस स्थिति को व्यवहार विशेषज्ञ (Behaviour Analyst), शिक्षिका जेना मैजिलो अच्छी तरह समझती हैं.
जेना मैजिलो ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटी ग्रेस से उसके स्कूल के दिन के बारे में कैसे बात करती हैं. उनका तरीका बच्चों पर दबाव डालने, बार-बार सवाल पूछने या जवाब निकलवाने की कोशिश करने पर आधारित नहीं है. इसके बजाय, वह कुछ ऐसे आसान तरीके अपनाती हैं, जिनसे उनकी बेटी खुद ही खुलकर अपनी बातें साझा करने लगती है. इससे बातचीत स्वाभाविक ढंग से आगे बढ़ती है और बच्चों को ऐसा नहीं लगता कि उनसे पूछताछ की जा रही है.
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सवाल नहीं, प्यार से बात करें
जब आपका बच्चा स्कूल से घर लौटता है, तो वह करीब 7 घंटे तक पढ़ाई, दोस्तों के साथ बातचीत और कई तरह की गतिविधियों में व्यस्त रहने के बाद आता है. ऐसे में वह मानसिक रूप से थोड़ा थका हुआ भी हो सकता है. इसलिए घर आते ही उससे ढेर सारे सवाल पूछना उसे अच्छा नहीं लगता. इसी वजह से जेना मैजिलो अपने बच्चे से सबसे पहले प्यार भरे शब्दों से उसका स्वागत करती हैं. जैसे- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, तुम्हें देखकर बहुत अच्छा लगा और आज मैंने तुम्हारे बारे में सोचा था. इन बातों में कोई सवाल नहीं होता और न ही बच्चे पर जवाब देने का कोई दबाव होता है. इससे बच्चे को महसूस होता है कि घर एक सुरक्षित जगह है, जहां उसे प्यार और अपनापन मिलता है.
बच्चे जो कर रहे हैं, उसमें 10 मिनट उनके साथ बिताएं
स्कूल से आने के बाद बच्चों को थोड़ा आराम और रिलैक्स होने का समय चाहिए होता है. ऐसे में उनसे तुरंत सवाल पूछने के बजाय उनकी पसंद की गतिविधि में शामिल हो जाएं. अगर बच्चा ड्रॉइंग कर रहा है, तो उसके साथ बैठ जाएं. अगर वह गाना गा रहा है, तो ध्यान से सुनें. बस 10 मिनट उसके साथ बिताएं, बिना ज्यादा सवाल किए.
पहले अपनी बात शेयर करें, फिर बच्चों को बोलने का मौका दें
डिनर के समय जेना अपनी बेटी से सीधे सवाल पूछने के बजाय पहले अपने दिन की कोई छोटी-सी बात शेयर करती हैं. इसके बाद परिवार एक मजेदार गेम खेलता है, जिसे "Rose, Bud, Thorn" कहा जाता है. इससे बच्चों को बिना दबाव के अपनी बातें शेयर करने में आसानी होती है.
- Rose- दिन की सबसे अच्छी बात
- Bud- वह चीज जिसका इंतजार है
- Thorn- दिन की कोई मुश्किल या पसंद न आने वाली बात
ऐसे सवाल पूछे जिनका जवाब सिर्फ 'हां' या 'ना' में न हो
आज दिन कैसा था. पूछने की बजाय ऐसे सवाल करें. आज किसने तुम्हें हंसाया, कोई मजेदार घटना बताओ, आज ब्रेक में किसके साथ खेला और आज कुछ अजीब या दिलचस्प हुआ क्या. सबसे जरूरी बात, जब बच्चा जवाब दे तो उसे ध्यान से सुनें. बीच में टोके नहीं और तुरंत सलाह देने न लगें. जब बच्चों को लगता है कि उनकी बात सुनी जा रही है, तो वे भविष्य में और खुलकर बातें करते हैं.
जब बच्चा बात नहीं करना चाहे, तो उसकी इच्छा का सम्मान करें
यह टिप सबसे आसान नहीं, लेकिन सबसे जरूरी है. अगर बच्चा कहता है, "मैं अभी बात नहीं करना चाहता," तो उसे मजबूर न करें. जेना मैजिलो के अनुसार, ऐसे समय पर सिर्फ कोई बात नहीं कहकर आगे बढ़ जाना चाहिए. न दबाव डालें, न बार-बार पूछें और न ही इसे दिल पर लें. जब बच्चे को लगता है कि उसकी बात और उसकी पसंद का सम्मान किया जा रहा है, तो उसका भरोसा बढ़ता है. फिर जब वह तैयार होता है, तो वह खुद आपके पास आकर अपनी बातें शेयर करता है, क्योंकि उसे पता होता है कि उसे सुना जाएगा, जज नहीं किया जाएगा.
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