Kuno National Park: मध्यप्रदेश में स्थित कूनो नेशनल पार्क में एक बार फिर से कुछ ऐसा कर दिया गया है जिसे लोग याद रखेंगे. बता दें कि इस बार पार्क में दक्षिण अफ्रीका के देश बोत्सवाना से आए नौ और चीतों को सुरक्षित तरीके से शनिवार को कुनो नेशनल पार्क (KNP) पहुंच गए हैं. इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है. बता दें किअफ्रीकी चीते भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान से भारत लाए गए हैं. यह पूरी प्रक्रिया देश की चार साल की ‘चीता पुनर्वास योजना' के तहत की जा रही है. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव इन चीतों को पार्क में विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़ों में छोड़ने वाले हैं.
प्रोजेक्ट चीता के निदेशक उत्तम शर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम में IAF अहम भागीदार रहा है. इससे पहले सितंबर 2022 में नामीबिया से और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से भी चीतों को भारत लाने का काम IAF ने ही किया था. बता दें कि इन 8 चीतों में 6 मादा और 2 नर शामिल हैं. इनके आने के बाद देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई है. चीतों की वापसी सिर्फ वन्यजीव संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि पर्यटन के लिए भी एक बड़ा अवसर है. अगर आप भी वाइल्ड लाइफ लवर हैं या फैमिली के साथ कोई ट्रिप प्लान करने की सोच रहे हैं तो, अब सच में एक ट्रिप इस पार्क की तो बनती ही है.
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क्यों खास है कूनो नेशनल पार्क?
कूनो नेशनल पार्क मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है. बता दें कि यहां का जंगल सूखा पर्णपाती है, जो चीतों के रहने के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. यहां पर आपको चीतों के साथ, तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा, नीलगाय, चीतल जैसे अन्य कई दुर्लभ पक्षी भी देखने को मिल सकते हैं. इस पार्क में जंगल सफारी का अनुभव आपके लिए यादगार हो सकता है.
कहां रूक सकते हैं?
फिलहाल यह मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व्स की तुलना में लोगों के बीच ज्यादा फेमस नहीं है, इसलिए यहां पर स्टे करने के लिए अच्छे ऑप्शन मिलते हैं.
कुनो नेशनल पार्क (KNP) में विभाग की ओर से 4 रेस्ट हाउस उपलब्ध हैं. इन्हें कुनो कार्यालय में बात कर फोन नंबर या ईमेल के जरिए बुक किया जा सकता है. रेस्ट हाउस की बुकिंग का अधिकार सीसीएफ लायन प्रोजेक्ट और डीएफओ कुनो, श्योपुर के पास सुरक्षित है.
इसके अलावा मध्य प्रदेश पर्यटन का एक रिजॉर्ट पार्क के बहुत नजदीक स्थित है, जिसे पर्यटक एम.पी. टूरिज्म कुनो रिजॉर्ट (रेस्ट हाउस) से संपर्क कर आसानी से बुक कर सकते हैं.

कूनो नेशनल पार्क जाने का सही समय क्या है?
अगर आप कूनो नेशनल पार्क घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो यहां जाने का बेस्ट समय अक्टूबर से मार्च का है. इस समय पर ना ज्यादा गर्मी होती है और ना ही ज्यादा ठंड. वैसे ये पार्क पार्क पर्यटकों के लिए आमतौर पर 1 अक्टूबर से 30 जून तक खुला रहता है. जबकि मानसून के दौरान (1 जुलाई - 30 सितंबर) यह बंद रहता है.
पार्क की टाइमिंग: अगर आप सफारी पर जाने का प्लान कर रहे हैं तो इसका समय सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक है. हालांकि मौसम के अनुसार इन समय में कुछ बदलाव भी हो सकते हैं.
कैसे कराएं सफारी की बुकिंग
वैसे तो आप वहां पर जाकर ही सफारी की बुकिंग कर सकते हैं. लेकिन अगर आप इसे पहले से ही ऑनलाइन बुक कर लें तो बेहतर होगा.
कैसे जाएं कूनो नेशनल पार्क
आप यहां जाने के लिए ग्वालियर की फ्लाइट ले सकते हैं . ये पार्क के तीनों प्रवेश द्वार—टिकटोली, अहेड़ा और पीपल बावड़ी का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है. ग्वालियर, कोटा और जयपुर शहरों में एयरपोर्ट हैं, जिनमें से जयपुर की देश के अलग-अलग हिस्सों में सबसे ज्यादा एयर कनेक्टिविटी है.
अगर आप ट्रेन से जाने का प्लान कर रहे हैं तो इसी तरह ग्वालियर, सवाई माधोपुर, कोटा, जयपुर और झांसी इस पार्क के नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं, जो कुनो नेशनल पार्क तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराते हैं.
दिल्ली से कूनो कैसे जाएं?
अगर आप दिल्ली से यात्रा कर रहे हैं, तो ये विकल्प आपके लिए आसान रहेंगे:
फ्लाइट
ग्वालियर की फ्लाइट बुक कर सरते हैं. वहां से कूनो की दूरी लगभग165 किमी है. एयरपोर्ट से आप टैक्सी या बस से आसानी से वहां पहुंच सकते हैं.
ट्रेन
ग्वालियर या शिवपुरी की ट्रेन टिकट करें. स्टेशन से टैक्सी या लोकल बस से कूनो पहुंच सकते हैं.
बाय रोड
दिल्ली से कूनो की दूरी लगभग 380-400 किमी है. कार से जाने में लगभग 7-8 घंटे का समय लगेगा. ये रास्ता दिल्ली से आगरा फिर ग्वालियर और फिर श्योपुर पहुचाएगा.

कूनो में और क्या-क्या घूमें?
- जंगल सफारी
- बर्ड वॉचिंग
- पास के गांवों में भी घूम सकते हैं
- गांधी सागर अभयारण्य की सैर
हालांकि अभी यहां पर जाने का शुल्क क्या है इसकी जानकारी उनकी वेबसाइट पर कुछ उपलब्ध नहीं हैं. ज्यादा जानकारी के लिए आप उनकी वेबसाइट पर जाकर उनसे संपर्क कर सकते हैं.
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