क्या आपका बच्चा भी सिर्फ दो कौर खाने के बाद ही मुंह फेर लेता है? अगर हां, तो यह स्टोरी आपके लिए है. कोई बच्चा सिर्फ एक‑दो चीजें ही खाना चाहता है, कोई सब्जी देखते ही मना कर देता है, तो कोई हर निवाले के लिए मां‑बाप को भाग-दौड़ करवा देता है. ऐसे में माता‑पिता अक्सर परेशान हो जाते हैं कि बच्चे को सही तरीके से खाना कैसे खिलाया जाए.
इसी सवाल का जवाब देते हुए लाइफस्टाइल और मदरहुड कंटेंट क्रिएटर कृष्णा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर की है. आइए जानते हैं कि बच्चों को खिलाते समय क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए.
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शुरुआत से बच्चे को खुद खाने की आदत डालें
जब बच्चा थोड़ा बड़ा होने लगे और हाथ से चीजें पकड़ने लगे, तब उसे खुद खाने की कोशिश करने देना फायदेमंद हो सकता है. मदरहुड कंटेंट क्रिएटर कृष्णा ने बताया कि मैंने अपनी बेटी के साथ लगभग 10 महीने की उम्र से फिंगर फूड देना शुरू किया. इससे उसे खाना सिर्फ खिलाया नहीं गया, बल्कि उसने खुद छूकर, पकड़कर और चखकर खाने को समझा.
बच्चे पर खाना खाने का दबाव न डालें
कई बार हम चाहते हैं कि बच्चा प्लेट का सारा खाना खत्म करे, लेकिन हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है. कृष्णा का कहना था कि मैंने यह तरीका अपनाया कि मैं खाना परोसती हूं और उसे थोड़ा समय देती हूं. अगर वह नहीं खाती, तो मैं बस इतना कहती हूं “लगता है अभी तुम्हें भूख नहीं है” और प्लेट हटा देती हूं. जबरदस्ती खिलाने से बच्चे का खाने से मन और भी हट सकता है, इसलिए धैर्य यहां बहुत जरूरी है.
मना करने पर दूसरा खाना तुरंत न दें
बहुत से घरों में ऐसा होता है कि बच्चा दाल-सब्जी या घर का खाना मना करता है, तो उसके लिए तुरंत कुछ और बना दिया जाता है, लेकिन मैंने यह नियम रखा कि अगर वह खाना नहीं खाती, तो उसके लिए अलग से दूसरी डिश नहीं बनाई जाएगी. मैं बस यही कहती हूं “आज घर में यही बना है.” इसका मतलब बच्चे को भूखा रखना नहीं है, बल्कि उसे यह समझाना है कि हर बार मनपसंद विकल्प तुरंत नहीं मिलेगा.
परिवार के साथ बैठकर खाना खाएं
बच्चे सिर्फ बातों से नहीं, देखने से भी बहुत कुछ सीखते हैं. इसलिए साथ बैठकर खाना खाना एक बहुत असरदार आदत हो सकती है. जब बच्चा देखता है कि घर के बाकी लोग भी वही खाना खा रहे हैं, तो उसके मन में उसे चखने की इच्छा बढ़ सकती है.
यहां देखिए वीडियो...
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