क्या कभी किसी की छोटी-सी बात या मैसेज को लेकर आप घंटों सोचते रहे हैं? क्या आपको लगा कि सामने वाले ने जानबूझकर आपको नजरअंदाज किया, लेकिन बाद में पता चला कि मामला कुछ और था? रिलेशनशिप में ऐसी स्थिति अक्सर बन जाती है. मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास के अनुसार, कई बार परेशानी असल घटना से ज्यादा उस कहानी की वजह से बढ़ती है, जो हम अपने मन में उस घटना को लेकर बना लेते हैं. इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह समझना जरूरी है कि वास्तव में क्या हुआ और हम उसके बारे में क्या सोच रहे हैं.
रिश्तों में दूरी बढ़ा सकती है ओवरथिंकिंग
गौर गोपाल दास के अनुसार, कोई घटना अपने आप में एक तथ्य हो सकती है, लेकिन उसकी व्याख्या हर व्यक्ति अलग तरह से कर सकता है. हमारे पुराने अनुभव, डर और असुरक्षाएं इस व्याख्या को प्रभावित करते हैं. कई बार हमारी समझ सही होती है, लेकिन कई बार हम बिना पूरी जानकारी के खाली जगहों को अपनी धारणाओं से भर देते हैं. इसके अलावा कहा कि किसी का देर से जवाब देना हमें इग्नोर किए जाने जैसा लग सकता है. सामने वाला कम बात करे तो हमें लग सकता है कि वह नाराज है. इसी तरह किसी बहस को हम व्यक्तिगत हमला समझ सकते हैं. ऐसी धारणाएं बिना पुष्टि के बनती हैं और धीरे-धीरे ओवरथिंकिंग, तनाव और रिश्तों में दूरी बढ़ा सकती हैं.
मान लेने के बजाय पूछें सवाल
गौर गोपाल दास ने सलाह दी है कि तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय थोड़ा रुककर स्थिति को समझने की कोशिश करें. अगर किसी की बाात बुरी लगी है या उसके व्यवहार का मतलब समझ नहीं आ रहा, तो सीधे सवाल पूछना बेहतर है. बातचीत से कई बार वह बात साफ हो जाती है, जिसे हम अपने मन में कुछ और समझझ बैठे थे.
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खुद से पूछें ये दो सवाल
उन्होंने बताया कि किसी रिश्ते में गलतफहमी बढ़ने लगे तो खुद से दो सवाल पूछे जा सकते हैं वास्तव में क्या हुआ और जो हुआ, उसके बारे में मैं खुद से क्या कह रहा हूं. इन दोनों सवालों के बीच का अंतर समझना जरूरी है. इससे पता चल सकताा है कि परेशानी तथ्य से जुड़ी है या हमारी बनाई हुई धारणा से है.
रिश्तों में सेल्फ अवेयरनेस क्यों है जरूरी?
हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी भावनाओं और धारणाओं को पहचानना रिश्तों में बेहतर संवाद की शुरुआत हो सकती है. किसी स्थिति को समझने के लिए तथ्य और अपनी व्याख्या को अलग रखनाा गलतफहमियां कम करने में मदद कर सकता है. कई बार रिश्ते को सुधारने के लिए सामने वाले को बदलने से पहले अपनी बनााई कहानी पर दोबारा गौर करना जरूरी होता है.
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