पति-पत्नी का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें प्यार के साथ तकरार भी होती है. दोनों के बीच छोटी-मोटी बातों पर नोकझोंक होना आम बात है. क्योंकि शादी सिर्फ एक दो लोगों का एक साथ रहना नहीं, बल्कि ये प्यार, सम्मान, भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव पर टिकी होती है. अक्सर लोगों को लगता है जो पति-पत्नी कम झगड़ते हैं, उनकी शादी ज्यादा खुशहाल है, लेकिन कई बार इन खुश दिखने वाले रिश्तों के पीछे गहरा अकेलापन और भावनात्मक दूरी छिपी होती है, जिसके बारे में वे किसी से खुलकर बात भी कर पाते.
रिश्ते में प्यार है, फिर भी क्यों बढ़ रही है दूरी?
एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम आर्टेमिस हॉस्पिटल, को-हैड ऑफ फिजियोलॉजी सर्विस, डॉ. चंद्रिमा मिश्रा मुखर्जी के अनुसार, कई कपल्स ऐसी भावनात्मक जुदाई का सामना करते हैं, जिसकी वजह से वे रिश्ते में रहते हुए भी खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं. कई पति-पत्नी एक साथ बैठकर खाना खाते हैं, लेकिन फिर भी उनके मन में यह सवाल उठता है कि रिश्ते में न कोई बड़ा झगड़ा होता है, न बेवफाई और न ही कोई समस्या, फिर भी कुछ कमी महसूस होती है.
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डॉ. चंद्रिमा मिश्रा मुखर्जी के अनुसार, भावनात्मक दूरी अचानक नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे रिश्ते में जगह बनाती है. इसकी शुरुआत अक्सर छोटे-छोटे बदलावों से होती है. जैसे बातचीत केवल घर के काम, ऑफिस की जिम्मेदारियों या परिवार से जुड़ी बातों को लेकर ही होती है. समय के साथ पति-पत्नी अपने डर, सपने, भावनाएं और डेली के अनुभव एक-दूसरे से शेयर करना कम कर देते हैं. उन्हें लगने लगता है कि सामने वाला बहुत व्यस्त है या उनकी बातों को समझ नहीं पाएगा. यही छोटी-छोटी दूरियां आगे चलकर रिश्ते में अकेलेपन और भावनात्मक दूरी की वजह बन सकती है.
पार्टनर के बीच भावनात्मक दूरी को समझना
दरअसल, किसी की बात सुनने और उसे समझने में बड़ा अंतर होता है. कई बार लाइफ पार्टनर आपकी बातें तो सुन लेता है, लेकिन उन बातों के पीछे छिपी भावनाओं को नहीं समझ पाता. जब रिश्ते में भावनात्मक जरूरतें पूरी नहीं होतीं, तो व्यक्ति अपने पार्टनर के साथ रहते हुए भी खुद को अकेला महसूस कर सकता है. इससे दूरी बढ़ने लगती है और साथ रहते हुए भी अकेला लगने लगता है.
रिश्ते में अकेलेपन को कैसे दूर करें?
रिश्ते का अकेलापन दूर करने के लिए अपने पार्टनर के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश करें. इसकी शुरुआत छोटी-छोटी आदतों से की जा सकती है. इसके लिए एक-दूसरे से खुलकर बात करें, अपने पार्टनर की बातों का ध्यान रखें, पार्टनर के डेली रूटीन पर बात करें और पार्टनर की जरूरतों का ध्यान रखें.
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