लखनऊ जाएं या नहीं? लंबा सफर है, इतने घंटों तक बस में कैसे बैठे रहेंगे, क्या आप भी यही सोचकर जाने से पहले दो बार सोचते हैं? अब नहीं सोचना पड़ेगा. दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट से न सिर्फ दिल्ली से उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों तक पहुंचना आसान होगा, बल्कि राज्य के अंदर भी यात्रा का समय काफी कम हो सकता है, इससे लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों के बीच सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज, आरामदायक और सुविधाजनक हो जाएगा. ऐसे में अब लंबी दूरी की थकान और समय की चिंता छोड़िए, क्योंकि यह प्रोजेक्ट आपकी यात्रा को आसान और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 17 जून को डीएम मनीष कुमार वर्मा की बैठक हुई, इसमें स्टेशन का प्लान, वहां तक पहुंचने के रास्ते और दूसरी जरूरी सुविधाओं को जोड़ने पर बात हुई. राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन के लोगों ने दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की जानकारी दी साथ ही बताया कि प्रयागराज में स्टेशन कहां-कहां बन सकता है.
कितने समय लग सकता है?
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो इस हाई-स्पीड रेल परियोजना के तहत दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब 2 घंटे में और दिल्ली से वाराणसी की यात्रा लगभग 4 घंटे में पूरी हो सकती है. यही नहीं, प्रयागराज से लखनऊ की दूरी करीब 55 मिनट और प्रयागराज से वाराणसी का सफर लगभग 30 मिनट में तय होने का अनुमान है.
कई बड़े शहरों को जोड़ेगा कॉरिडोर
यह प्रस्तावित कॉरिडोर नोएडा जेवर, आगरा, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे अहम शहरों को जोड़ने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि इससे उत्तर प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर होगा, इसके साथ ही पर्यटन, कारोबार और रोजमर्रा की यात्रा को भी नई रफ्तार मिल सकती है.
महाकुंभ और माघ मेले में मिल सकती है बड़ी राहत
प्रयागराज में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, खासकर महाकुंभ और माघ मेले के दौरान. ऐसे में बुलेट ट्रेन स्टेशन को धार्मिक पर्यटन से जोड़कर भी देखा जा रहा है. कोशिश यह है कि स्टेशन को मेट्रो, मुख्य सड़कों और मौजूदा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से इस तरह जोड़ा जाए, ताकि यात्रियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान हो सके.
चार जगहों पर चल रहा विचार
प्रयागराज में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए चार संभावित जगहों की पहचान की गई है नीबी खुर्द, शांतिपुरम, प्रयाग स्टेशन क्षेत्र और परेड ग्राउंड या एयरपोर्ट के आसपास का इलाका. अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि स्टेशन ऐसी जगह बने, जहां सड़क, एयरपोर्ट और शहर के दूसरे हिस्सों से कनेक्टिविटी सबसे बेहतर हो.
कई जिलों में जमीन अधिग्रहण, मुआवजे का भरोसा
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर करीब 865 किलोमीटर लंबा हो सकता है, इसके लिए मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी समेत कई जिलों में जमीन की जरूरत पड़ेगी. अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण NHSRCL के नियमों के अनुसार किया जाएगा और प्रभावित किसानों व भूस्वामियों को मुआवजा दिया जाएगा.
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