बच्चों का गुस्सा करना, बात-बात पर चिल्लाना या अपनी नाराजगी में चीजें फेंकना या गुस्से में किसी के साथ मारपीट करना आज कई माता-पिता के लिए चिंता का विषय बन गया है. हाल ही में पंचकुला के एक स्कूल में 6 साल की छात्रा पर तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने मारपीट की. इसके बाद बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई. इस घटना के बाद बच्चों के बढ़ते गुस्से और आक्रामक व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आखिर कम उम्र में बच्चों का गुस्सा इतना बढ़ क्यों रहा है? क्या मोबाइल, खेलकूद की कमी और घर का माहौल इसके पीछे की वजह हो सकते हैं. आइए जानते हैं छोटी-छोटी बात पर बच्चों को गुस्सा क्यों आ रहा है.
ज्यादा मोबाइल स्क्रीन टाइम से बढ़ सकती है चिड़चिड़ाहट
वीडियों में बताया कि बच्चों का जरूरत से ज्यादा समय मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम पर बिताना उनके व्यवहार और दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है. लगाातार स्क्रीन पर रहने से बच्चों का सोने-जागनेे का समय बिगड़ सकता है और वे दूसरी गतिविधियों से दूर हो सकते हैं. जब अचानक मोोबाइल बंद करने या मनपसंद वीडियो देखने से रोका जाता है तो कुछ बच्चे गुस्सा और चिड़चिड़ाहट दिखाने लगते हैं. इसलिए माता-पिता को बच्चों का स्क्रीन टाइम उनकी उम्र के अनुसार सीमित रखना चाहिए.
आउटडोर गेम्स से दूरी भी बन सकती है वजह
पहले बच्चे दोस्तों के साथ मैदान में दौड़ते, खेलते और अपनी ऊर्जा का इस्तेेमाल करते थे. अब कई बच्चे घर के अंदर ही ज्यादा समय बिताते हैं. शारीरिक गतिविधियों की कमी से उनकीी दिनचर्या और भावनात्मक सेहत प्रभावित हो सकती है. बच्चों को रोजाना उम्र के मुतााबिक खेलने, दौड़ने और दूसरी शारीरिक गतिविधियों का मौका देना जरूरी है.
घर का माहौल देखकर सीखते हैं बच्चे
बच्चे अपने आसपास के लोगों के व्यवहार से बहुत कुछ सीखते हैं. अगर घर में छोटी-छोटी बातों पर चिल्लाना, गाली देना या मारपीट करना आाम है तो बच्चा भी ऐसे व्यवहार की नकल कर सकता है. माता-पिता को बच्चों के सामने अपने गुस्से पर नियंत्रण रखने की कोशििश करनी चाहिए.
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बच्चों का गुस्सा कम करने के लिए क्या करें?
बता दें कि सबसे पहले रोज कुछ समय बच्चे के साथ बिना मोबाइइल के बिताएं. उनकी बात ध्यान से सुनें और भावनाओं को समझने की कोशिश करें. मोबाइल और टीवी देखने का समय तय करें. बच्चों को बाहर खेलने और दोस्तों से मिलने का मौका दें. गुस्सा आने पर माारने या चिल्लाने के बजाय अपनी बात शब्दों में बताना सिखाएं. बार-बार आक्रामक व्यवहार दिखने पर बाल मनोवैज्ञानिक या बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें. साथ ही हर बच्चे का गुस्सा एक जैसा नहीं होताा और किसी एक वजह से आक्रामक व्यवहार पैदा नहीं होता है. बच्चे को डांटने या मारने के बजाय उसकी परेशानीी समझना जरूरी है. अगर गुस्सा लगातार बढ़ रहा है या किसी को चोट पहुंचाने की कोशिश हो रही है तो एक्सपर्ट की मददद लेने में देर न करें.
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