आज के समय में जहां लोग ग्लोइंग स्किन के लिए महंगे फेस सीरम, क्रीम और ब्यूटी ट्रीटमेंट्स का सहारा लेते हैं, वहीं पहले के दौर में महिलाएं प्राकृतिक घरेलू नुस्खों पर ज्यादा भरोसा करती थीं. ऐसे ही पारंपरिक उपायों में जली हुई लौंग का इस्तेमाल भी शामिल था, जिसे त्वचा की देखभाल और चेहरे पर निखार लाने के लिए अपनाया जाता था. पीढ़ियों से चला आ रहा यह नुस्खा आज भले ही कम प्रचलित हो गया हो, लेकिन कई जगहों पर लोग अब भी इसे प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाने के उपाय के रूप में जानते हैं. चलिए बताते हैं जली हुई लौंग का ब्यूटी सीक्रेट क्या है और इसके पीछे क्या मान्यताएं हैं.
जली हुई लौंग का यह नुस्खा आजकल इंटरनेट पर वायरल होने वाले DIY ब्यूटी ट्रेंड्स से बिल्कुल अलग है. इसकी जड़ें आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में मानी जाती हैं. भारत के कई हिस्सों में लोग इसे पीढ़ियों से घरेलू नुस्खे के रूप में अपनाते आए हैं. हालांकि जली हुई लौंग को कोई चमत्कारी उपाय नहीं माना जाता, लेकिन माना जाता है कि यह मुंहासों और त्वचा से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है. यही वजह है कि पहले शादी जैसे खास मौकों से पहले इसके इस्तेमाल की परंपरा रही है.
जली हुई लौंग का इस्तेमाल कैसे किया जाता था?
जली हुई लौंग का यह पारंपरिक नुस्खा पहले त्वचा की देखभाल के लिए अपनाया जाता था. इसमें साबुत लौंग को आग या आंच पर भूनकर जला लिया जाता था. इसके बाद जली हुई लौंग को पीसकर बारीक पाउडर बना लिया जाता था. फिर इस पाउडर को घी, गुलाब जल, शहद, मलाई, चंदन पाउडर या नारियल तेल जैसी चीजों के साथ मिलाकर एक लेप तैयार किया जाता था. इस लेप को पूरे चेहरे पर लगाने के बजाय केवल उन जगहों पर लगाया जाता था, जहां मुंहासे, दाग-धब्बे या अन्य त्वचा संबंधी समस्याएं होती थीं. माना जाता था कि यह नुस्खा त्वचा को साफ रखने और चेहरे के निखार को बढ़ाने में मदद कर सकता है. हालांकि, इसके फायदों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं और यह मुख्य रूप से एक पारंपरिक घरेलू उपाय के रूप में जाना जाता है.
मुंहासों को कम करने के लिए
पहले चेहरे पर पिंपल निकल आना कई लड़कियों के लिए चिंता की बात माना जाता था. पारंपरिक चिकित्सा में लौंग का इस्तेमाल त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए किया जाता रहा है. लौंग में यूजेनॉल नाम का तत्व पाया जाता है, जिसमें एंटीबैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं. हालांकि, कुछ रिसर्च में लौंग के इन गुणों की पुष्टि करते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि लौंग मुंहासों का पूरी तरह प्रभावी इलाज है. इसे मुख्य रूप से एक पारंपरिक घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.
त्वचा की लालिमा को कम करने के लिए
लौंग को जलाने के बाद उसकी इंटेंसिटी कुछ हद तक कम हो जाती है. जब जली हुई लौंग को घी, चंदन या अन्य ठंडक देने वाली चीजों के साथ मिलाकर लगाया जाता था, तो माना जाता था कि यह त्वचा को आराम पहुंचाने और लालिमा को कम करने में मदद कर सकती है. कई लोग इसे रात में लगाते थे, ताकि सुबह त्वचा अधिक शांत और साफ दिखाई दे.
क्या यह मुंहासों और त्वचा के लिए सुरक्षित उपाय है?
एक्सपर्ट के अनुसार, यह हर किसी के लिए नहीं है. लौंग एक काफी प्रभावशाली प्राकृतिक सामग्री है, इसलिए इसका इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए. खासकर कच्ची या अधिक मात्रा में लौंग लगाने से कुछ लोगों को त्वचा में जलन, सूजन, एलर्जी, रूखापन और संवेदनशीलता जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है या आपको एक्जिमा, रोसेशिया जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं हैं, तो बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के इस नुस्खे को नहीं अपनाना चाहिए.
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