रितेश देशमुख ने खास अंदाज में लोगों की दी आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं

फिल्म स्टार रितेश देशमुख ने खास अंदाज में अपने फैन्स को आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं दी है. एक्टर रितेश ने अपने चाहने वाले को लिए मराठी भाषा में फेसबुक पर वीडियो पोस्ट कर आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं दी है. जिसे खूब पसंद किया जा रहा है.

रितेश देशमुख ने खास अंदाज में लोगों की दी आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं

फिल्म स्टार रितेश देशमुख ने खास अंदाज में अपने फैन्स को आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं दी.

नई दिल्‍ली :

आषाढ़ी एकादशी का त्यौहार उत्साह के साथ पूरे देश में मनाया जा रहा है. इस खास दिन भक्त भगवान विट्ठल की आराधना कर रहे है. आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर फिल्म स्टार रितेश देशमुख ने खास अंदाज में वीडियो शेयर कर फैन्स को शुभकामनाएं दी है. 6 सेकंड के इस वीडियो में रितेश सबको राम-राम कहकर आषाढ़ी एकादशी की बधाई दे रहे हैं. दरअसल, महाराष्ट्र और आसपास के इलाकों में इस त्योहार को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. सभी देशवासी खासतौर पर मराठी मानुष के लिए आज का दिन बेहद खास है. सभी एक दूसरे को आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं दे रहे है. देशभर में भक्ति भाव के साथ आज आषाढ़ी एकादशी मनाई जा रही है.

हिंदू पंचाग के आषाढ़ के 11वें चंद्र दिवस (शुक्ल पक्ष) के दिन भक्त भगवान विट्ठल की आराधना करते है. ऐसे में फिल्म स्टार रितेश देशमुख ने खास अंदाज में अपने फैन्स को आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं दी है. एक्टर रितेश ने अपने चाहने वाले को लिए मराठी भाषा में फेसबुक पर वीडियो पोस्ट कर आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं दी है. जिसे खूब पसंद किया जा रहा है. वीडियो में कमेंट के माध्यम से फैन्स भी उनको आषाढ़ी एकादशी की खूब शुभकामनाएं दे रहे है.


इस त्यौहार के अवसर पर लोग एक दूसरे से मुलाकात करते है. लेकिन कोरोना महामारी के कारण सभी मशहूर हस्तियां सोशल मीडिया पर ही आषाढ़ी एकादशी की शुभकामनाएं दे रही है. बालीवुड और मराठी फिल्म स्टार रितेश देशमुख की तरह महानायक अमिताभ बच्चन, स्वानिल जोशी, अमृता खानविलकर, रवि जाधव और सोनाली कुलकर्णी सहित दूसरे मराठी सेलेब्स ने भी इस खास अवसर पर अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से विशेष पोस्ट साझा कर फैन्स को शुभकामनाएं दी है.

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बता दें कि, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आषाढ़ी एकादशी कहा जाता है. माना जाता है कि इस दिन से सृष्टि का संचालन करने वाले भगवान विष्णु चार महीने के लिए शयन करने के लिए चले जाते है. इसी दिन से आने वाले चार माह देवताओं की रात्रि होती है. इसलिए इस दिन को आषाढ़ी एकादशी, देवशयनी ग्यारस, हरिशयनी एकादशी और शयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. देवताओं के शयन करने के कारण अगले चार महीने तक कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते है. चातुर्मास के दौरान भगवान भोले की आराधना की जाती है. देवताओं के शयन में रहने के दौरान भगवान शिव शंकर ही जगत के पालनहार होते है.