भारत में मंदिरों के साथ कई ऐसे गुरुद्वारे भी हैं, जहां हर धर्म के लोग शांति और आस्था का अनुभव करने पहुंचते हैं. गुरुद्वारा सिख धर्म का पवित्र पूजा स्थल होता है. यहां गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ, कीर्तन और प्रार्थना की जाती है. गुरुद्वारे की सबसे खास परंपरा लंगर है, जहां सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन करते हैं. भारत में स्वर्ण मंदिर के अलावा भी कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं, जो अपनी धार्मिक मान्यता, सुंदरता और अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं. अगर, आप आस्था और यात्रा का सुंदर मेल देखना चाहते हैं, तो इन जगहों को अपनी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर शामिल करें.
गुरुद्वारा क्या होता है?
गुरुद्वारा शब्द दो पंजाबी शब्दों से मिलकर बना है. ‘गुरु' यानी शिक्षक और ‘द्वारा' यानी दरवाजा. इसका अर्थ है ‘गुरु तक पहुंचने का द्वार'. यहां गुरु ग्रंथ साहिब को सम्मान के साथ एक ऊंचे मंच पर रखा जाता है. गुरुद्वारे में हर जाति, धर्म, लिंग और सामाजिक वर्ग के व्यक्ति का स्वागत होता है. लंगर में सभी लोग एक साथ भोजन करते हैं, जो बराबरी और सेवा की भावना को दर्शाता है.
भारत के 5 प्रसिद्ध गुरुद्वारे
स्वर्ण मंदिर, अमृतसर- पंजाब का श्री हरमंदिर साहिब अपनी सुनहरी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. यहां अक्टूबर से मार्च तक का समय यात्रा के लिए अच्छा माना जाता है.
मणिकरण साहिब, हिमाचल प्रदेश- कुल्लू जिले में पार्वती नदी के किनारे स्थित यह गुरुद्वारा पहाड़ों से घिरा है. यहां गर्म पानी के प्राकृतिक झरने हैं. खास बात यह है कि लंगर का भोजन भी कई बार इसी गर्म पानी से पकाया जाता है. अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर के बीच यहां जाना अच्छा रहता है.
बंगला साहिब, दिल्ली- दिल्ली का यह प्रसिद्ध गुरुद्वारा अपने शांत वातावरण और सुंदर सरोवर के लिए जाना जाता है. सुबह का समय प्रार्थना और सुकून के लिए खास है, जबकि शाम को रोशनी में इसका नजारा बेहद सुंदर लगता है.
तख्त श्री पटना साहिब, बिहार- यह सिख धर्म के पांच तख्तों में से एक है. मान्यता है कि यह गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान है. सफेद संगमरमर से बना यह गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसके आसपास गुरु का बाग और कंगन घाट जैसे ऐतिहासिक स्थल भी हैं.
तख्त श्री हजूर साहिब, महाराष्ट्र- नांदेड़ में गोदावरी नदी के किनारे स्थित यह गुरुद्वारा सिख धर्म के पांच पवित्र तख्तों में शामिल है. मान्यता है कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने अंतिम दिन यहीं बिताए थे. यहां का आध्यात्मिक वातावरण, कीर्तन और सिख इतिहास इसे खास बनाते हैं. अक्टूबर से मार्च तक यहां घूमना सुविधाजनक रहता है.
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