Who gets IAS, IPS and IFS cadre : UPSC सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक है. हर साल लाखों युवा IAS, IPS और IFS बनने का सपना देखते हैं. लेकिन फाइनल रिजल्ट के बाद किसे कौन सा कैडर मिलेगा, यह डिपेंड करता है उम्मीदवार की ऑल इंडिया रैंक, कैंडिडेट की कैटेगरी, दी गई सर्विस प्रेफरेंस और उस साल की वैकेंसी की संख्या पर. अक्सर उम्मीदवार यही जानना चाहते हैं कि IAS, IPS या IFS के लिए कितनी रैंक जरूरी होती है. तो चलिए इसे समझने की कोशिश इस आर्टिकल के माध्यम से करते हैं.
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IAS कैडर किसे मिलता है?
IAS यानी इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस को UPSC की सबसे ऊंची और प्रभावशाली सेवा माना जाता है. आमतौर पर जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को IAS के लिए टॉप 1 से 80 रैंक के भीतर रहना होता है. सीटें सीमित होने और डिमांड ज्यादा होने की वजह से यहां तगड़ा कॉम्पिटिशन रहता है. आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवारों को थोड़ी ज्यादा रैंक पर भी IAS मिल सकता है.
IFS के लिए कितनी रैंक जरूरी होती है?
IFS यानी इंडियन फॉरेन सर्विस भी बेहद रेप्युटेड सर्विस है. जिसमें देश का प्रतिनिधित्व विदेशों में किया जाता है. आमतौर पर IFS के लिए टॉप 1 से 115 रैंक के बीच रहना जरूरी माना जाता है. वैकेंसी कम होने की वजह से यहां रैंक की मांग काफी ज्यादा होती है और ज्यादातर टॉप रैंकर्स ही इसे चुनते हैं.
IPS कैडर किस रैंक पर मिलता है?
IPS यानी इंडियन पुलिस सर्विस का चयन रैंक के हिसाब से IAS और IFS के बाद होता है. सामान्य तौर पर जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को लगभग 1 से 230 रैंक तक IPS मिलने की संभावना रहती है. IPS की सीटें IAS और IFS से ज्यादा होती हैं. इसलिए इसकी रैंक रेंज भी थोड़ी बड़ी होती है.
IAS, IPS और IFS के बाद कौन सी सर्विस मिलती है?
अगर रैंक IAS, IFS या IPS की रेंज से बाहर हो, तो उम्मीदवारों को IRS जैसी सेवाएं मिलती हैं. IRS (इनकम टैक्स और कस्टम्स) आमतौर पर 240 से 650 रैंक के बीच मिल जाती है.