BPSC Success Story : सिविल सेवा की तैयारी का सफर जितना लंबा होता है, उतना ही कठिन भी. कई बार सालों की मेहनत के बाद भी सफलता हाथ नहीं लगती. लेकिन कुछ लोग असफलताओं को अपनी मंजिल का अंत नहीं, बल्कि नए रास्ते की शुरुआत मानते हैं. ऐसा ही उदाहरण पेश किया है दिल्ली में पली-बढ़ी मुस्कान ठाकुर ने, जिन्होंने तीन बार UPSC की परीक्षा दी, एक बार मेंस परीक्षा तक पहुंचीं, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 252वीं रैंक हासिल कर बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) में चयनित होकर SDM बनने का सपना पूरा किया.
हिंदू कॉलेज ने जगाया प्रशासनिक सेवा का सपना
मुस्कान का जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ. शुरुआती शिक्षा से लेकर स्कूली पढ़ाई तक सब कुछ दिल्ली में ही हुआ. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से इकोनॉमिक्स (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया.
कॉलेज जीवन के दौरान वह हिंदू कॉलेज की पार्लियामेंट से भी जुड़ी रहीं. लगातार दो सालों तक सचिव और मंत्री की जिम्मेदारी निभाने के दौरान शासन, नीति-निर्माण और प्रशासन से जुड़े विषयों में उनकी रुचि बढ़ती गई. यहीं से उनके भीतर सिविल सेवा में जाने का सपना आकार लेने लगा.
पहले ही प्रयास में BPSC, सीधे बनी SDM
BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा उनका पहला प्रयास था. पहली ही कोशिश में सफलता और बिहार प्रशासनिक सेवा में चयन उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है.
मुस्कान का कहना है कि उनका लक्ष्य हमेशा प्रशासनिक सेवा में जाना था. BPSC ने उन्हें यह अवसर दिया और यही सपना पूरी तैयारी के दौरान उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बना रहा.
सुबह 9 से शाम 7 बजे तक लाइब्रेरी…
सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण उन्होंने अपनी निरंतरता और अनुशासन को बताया. तैयारी के दौरान उनका रोज का एक तय कार्यक्रम था. वह सुबह ठीक 9 बजे लाइब्रेरी पहुंच जाती थी और शाम 7 बजे तक वहीं पढ़ाई करती थी. उन्होंने पूरे दिन को दो हिस्सों में बांट रखा था. हर हिस्से में एक विषय पर पूरा फोकस करती थीं. चाहे सामान्य अध्ययन हो या करेंट अफेयर्स, दोनों को समान महत्व देती थीं. उनके अनुसार, करेंट अफेयर्स को अलग से नहीं बल्कि एक विषय की तरह पढ़ना चाहिए. मेंस की तैयारी के लिए उन्होंने मॉक टेस्ट दिए. इससे अनस्वर्स राइटिंग बेहतर हुई.
UPSC देने के बाद हुआ सेल्फ डाउट
BPSC भले ही उनका पहला प्रयास था, लेकिन इससे पहले वह UPSC की परीक्षा तीन बार दे चुकी थी. एक बार मेंस तक पहुंचने के बावजूद लास्ट सिलेक्शन नहीं हुआ.
लगातार प्रयासों के बाद असफलता का सामना करना आसान नहीं था. कई बार उन्हें अपनी तैयारी, रणनीति और मेहनत पर भी संदेह हुआ. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों को स्वीकार किया और उनसे सीखते हुए आगे बढ़ीं. यही सोच आखिरकार उन्हें सफलता तक ले गई.
माता-पिता और भाभी का मिला पूरा साथ
इस पूरी यात्रा में परिवार और दोस्तों का साथ उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना.वह बताती हैं कि उनके पिता ने उन्हें निरंतर मेहनत करना सिखाया, जबकि मां ने हमेशा वास्तविकता के साथ लक्ष्य पर केंद्रित रहने की सीख दी. वह अपनी भाभी का भी विशेष रूप से जिक्र करती हैं, जो उनके परिवार की पहली वर्किंग वूमेन हैं. उनके अनुसार, भाभी ने हमेशा उन्हें अपने करियर और सपनों पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया. मुश्किल समय में दोस्तों ने भी उनका पूरा साथ दिया. उनका मानना है कि परिवार और दोस्तों के सहयोग के बिना यह सफलता संभव नहीं थी.
अखबार, UPSC के नोट्स और टेस्ट सीरीज पर रहा भरोसा
तैयारी के दौरान वह प्रतिदिन अखबार पढ़ती थीं. उनका मानना है कि इससे विश्लेषणात्मक सोच विकसित हुई, जो मेंस और इंटरव्यू दोनों में बेहद उपयोगी साबित हुई. साथ ही उन्होंने UPSC और BPSC दोनों के लिए कुछ विशेष किताबों का अध्यन किया.
छोटे-छोटे नोट्स और बार-बार रिवीजन
भविष्य के एस्पिरेंट को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पहले बुनियादी विषयों को अच्छी तरह समझना जरूरी है. उसके बाद अपने छोटे-छोटे नोट्स तैयार करें और बार-बार उनका रिवीजन करें.
उनका मानना है कि हर नई किताब या नए स्टडी मटेरियल के पीछे भागने से तैयारी बिखर जाती है. सीमित संसाधनों के साथ बार-बार अभ्यास करना ही सफलता की असली कुंजी है.
अखबारों ने बढ़ाया आत्मविश्वास
उन्होंने बताया कि BPSC इंटरव्यू का अनुभव काफी सकारात्मक रहा. उनके इंटरव्यू बोर्ड की अध्यक्ष दीप्ति मैम थीं, जिन्होंने शुरुआत में ही सहज माहौल बना दिया. इंटरव्यू के लिए उन्होंने अलग से कोई विशेष तैयारी नहीं की. उन्होंने अपना पूरा ध्यान समाचार पत्रों और समसामयिक घटनाओं पर केंद्रित रखा, जिसने पर्सनालिटी टेस्ट में उनका आत्मविश्वास बढ़ाया.
शिक्षा और स्वास्थ्य पर रहेगा विशेष फोकस
एक भावी प्रशासनिक अधिकारी के रूप में मुस्कान की प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की है. उनका मानना है कि किसी भी राज्य के विकास की सबसे मजबूत नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं होती हैं.
अपनी सफलता का संदेश देते हुए मुस्कान कहती हैं कि हर अभ्यर्थी का सफर अलग होता है. इसलिए दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी गलतियों से सीखना और सकारात्मक बने रहना ज्यादा जरूरी है.
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