Labour Code Law : इन दिनों नोएडा में मजदूर वर्ग ने न्यूनतम वेतन को लेकर कंपनी मालिकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दरअसल, हरियाणा सरकार की तरफ से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाए जाने के बाद नोएडा के मजदूर भी अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें महीने का 10-11 हजार मिल रहा है, जो सरकार द्वारा तय मानकों से बहुत कम है. इतनी महंगाई में घर चलाना मुश्किल है. मजदूर महीने की 20 हजार की मांग कर रहे हैं. साथ ही उनकी शिकायत है कि उनसे ओवरटाइम भी कराया जाता है जिसका पैसा नहीं मिलता है. और तो और वीकली ऑफ भी नहीं दिए जाते हैं.
ऐसे में आइए सुप्रीमकोर्ट के वकील धर्मवीर यादव से समझते हैं कि भारतीय कानून के तहत, अगर किसी कंपनी द्वारा कर्मचारी से ओवरटाइम करवाया जाता है और उसके लिए अतिरिक्त भुगतान करने से इनकार किया जाता है या अनुचित रूप से साप्ताहिक छुट्टी देने से मना किया जाता है, तो कर्मचारी क्या कानूनी उपाय और कार्रवाइयां कर सकता है.
वीकली ऑफ और ओवरटाइम न देने पर कहां करें शिकायत
धर्मवीर यादव जी बताते हैं कि अगर कोई कंपनी ऐसा करती है तो कंपनी को एक लीगल नोटिस भेजें, जिसमें शिकायतों का विस्तृत विवरण हो, और इसके साथ ज्वाइनिंग लेटर, एंप्लायमेंट कॉन्ट्रैक्ट, सैलरी स्लिप और ईमेल जैसे डॉक्यूमेंट संलग्न करें. फिर आप लोकल लेबर कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज करें, स्पेशली यदि वेतन रोक दिया गया हो.
धर्मवीर आगे बताते हैं कि वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 के अंतर्गत मामला दर्ज करें, अगर वेतन बिना उचित कारण के रोक दिया जाता है या अधिनियम के अनुसार महीने की 7वीं या 10वीं तारीख के बाद भी प्राप्त नहीं होता है तब.
इसके अलावा अगर कर्मचारी "औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947" के तहत "श्रमिक" की श्रेणी में आता है, तो वह इस अधिनियम के माध्यम से विवाद शुरू कर सकता है.
अब आप ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं-
आप SAMADHAN पोर्टल (labour.gov.in) या CPGRAMS (pgportal.gov.in) के माध्यम से शिकायतें दर्ज भी कर सकते हैं.
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