Noida protest: नोएडा के औद्योगिक हब में अक्सर अपनी मांगों को लेकर मजदूरों और मैनेजमेंट के बीच खींचतान देखने को मिलती है. कई बार मजदूर हड़ताल या प्रदर्शन का रास्ता चुनते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा डर यह होता है कि कहीं कंपनी उन्हें नौकरी से न निकाल दे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय श्रम कानून (Labour Law) मजदूरों को इस मामले में सुरक्षा प्रदान करता है?
कानूनी सुरक्षा का अधिकार
भारत के Industrial Disputes Act, 1947 के तहत मजदूरों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी मांगों को रखने का अधिकार है. कानून के मुताबिक, अगर कोई मजदूर ट्रेड यूनियन के माध्यम से या सामूहिक रूप से अपनी जायज मांगों (जैसे वेतन वृद्धि या बेहतर कार्य स्थिति) के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करता है, तो उसे सिर्फ इसी आधार पर बर्खास्त नहीं किया जा सकता.
कब नहीं निकाल सकती कंपनी?
प्रक्रिया का पालनकिसी भी कर्मचारी को निकालने से पहले कंपनी को 'ड्यू प्रोसेस' का पालन करना होता है. इसमें कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) और डोमेस्टिक इंक्वीयरी (Domestic Inquiry) जरूरी है.
शांतिपूर्ण विरोधयदि प्रदर्शन हिंसक नहीं है और कंपनी की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है, तो इसे 'मिस्कंडक्ट' (Misconduct) मानकर सीधे नौकरी से निकालना गैरकानूनी है.
प्रोटेक्शन ड्यूरिंग पेंडेंसीयदि विवाद लेबर कोर्ट या ट्रिब्यूनल में लंबित है, तो सेक्शन 33 के तहत मैनेजमेंट बिना अनुमति के कर्मचारी की सेवा शर्तों में बदलाव या उसे बर्खास्त नहीं कर सकता.
आम आदमी के लिए सलाह
अगर आप नोएडा या किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, तो हमेशा अपनी मांगों को लिखित रूप में दें. रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियन के माध्यम से की गई हड़ताल को कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है. यदि कोई कंपनी मनमाने ढंग से निकालती है, तो मजदूर क्षेत्रीय श्रम विभाग (Labour Department) में शिकायत कर सकते हैं.
साफ शब्दों में कहें तो, नियम मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए बने हैं. बस जरूरत है सही जानकारी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की.
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