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Success Story : 4 प्रयास में UPSC फेल, त्योहार-जन्मदिन भी छूटे, फिर ऐसे 8 घंटे पढ़कर BPSC में लाई 2nd रैंक

शशांक की कहानी बताती है कि सफलता केवल लंबे समय तक पढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि सही रणनीति, लगातार रिवीजन, अपनी गलतियों से सीखने और कठिन समय में भी लक्ष्य पर टिके रहने से मिलती है.

Success Story : 4 प्रयास में UPSC फेल, त्योहार-जन्मदिन भी छूटे, फिर ऐसे 8 घंटे पढ़कर BPSC में लाई 2nd रैंक
रिजल्ट के दिन शशांक दिल्ली में अपने कमरे पर थे. जब लिस्ट में अपना नाम और दूसरी रैंक देखी तो कुछ देर तक उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ.

“आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि आपने शुरुआत क्यों की थी. जब यह वजह याद रहती है, तो रास्ते की मुश्किलें छोटी लगने लगती हैं.” 

यह कहना है बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल करने वाले शशांक गौरव का. NDTV से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी सफलता के पीछे की सोच और संघर्ष को साझा किया. चार साल पहले शुरू हुई उनकी तैयारी की यात्रा में असफलताएं भी आई, आत्म-संदेह भी हुआ, कई परीक्षाओं में हार मिली, लेकिन उन्होंने रुकना नहीं सीखा. आज जब परिणाम सामने है तो उनके चेहरे की खुशी से कहीं अधिक संतोष उनके पिता और दोनों भाइयों के चेहरे पर दिखाई देता है.

दिल्ली विश्वविद्यालय ने बदल दिया सपना

शशांक बिहार के छपरा के रहने वाले हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से जूलॉजी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया. दिलचस्प बात यह है कि बचपन से उनका सपना सिविल सेवा में जाने का नहीं था. वह बताते हैं कि कॉलेज के दिनों में कार्यक्रमों के दौरान कई IAS और IPS अधिकारियों से मिलने का अवसर मिला. उन्हीं मुलाकातों ने उनके सोचने का नजरिया बदल दिया. उन्हें महसूस हुआ कि सिविल सेवा ऐसा मंच है जहां एक व्यक्ति
अपने जीवन से कहीं अधिक लोगों के जीवन में बदलाव ला सकता है. वहीं से इस सपने ने आकार लेना शुरू किया.

BPSC की यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली

शशांक ने पहला प्रयास बिना गंभीर तैयारी के दिया था. दूसरे प्रयास में पूरी मेहनत की, लेकिन प्रीलिम्स में महज कुछ ही नंबर से बाहर हो गए. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. गलतियों का विश्लेषण किया, अपनी कमजोरियों पर काम किया और तीसरे प्रयास में प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीनों चरण पार करते हुए BPSC में दूसरी रैंक हासिल कर ली.

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चार साल की मेहनत...लेकिन असली तैयारी 2023 के बाद शुरू हुई

शशांक बताते हैं कि उन्होंने 2022 से गंभीरता तैयारी शुरू की थी, लेकिन उनके अनुसार वास्तविक तैयारी सितंबर 2023 के बाद शुरू हुई. उसके बाद उन्होंने 2024 और 2025 में पूरी तरह खुद को पढ़ाई के लिए समर्पित कर दिया. उनका मानना है कि BPSC में सबसे कठिन चरण प्रीलिम्स है क्योंकि यहीं सबसे अधिक अभ्यर्थी बाहर हो जाते हैं. इसलिए उन्होंने सबसे ज्यादा जोर प्रीलिम्स की तैयारी और लगातार रिवीजन पर दिया.

स्वामी विवेकानंद के विचारों से मिली प्रेरणा

तैयारी के दौरान उनके कमरे की एक दीवार हमेशा उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती थी. वहां स्वामी विवेकानंद की तस्वीर लगी थी और उसके साथ लिखा था “Strength is Life, Weakness is Death.” शशांक बताते हैं कि जब भी तैयारी के दौरान निराशा या आत्म-संदेह होता, तो इस संदेश को देखकर खुद को याद दिलाते कि सफलता केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और निरंतर प्रयास से भी मिलती है.

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ऐसी थी उनकी तैयारी की रणनीति

शशांक की रणनीति बेहद स्पष्ट और व्यवस्थित थी-
 

  • प्रीलिम्स में बिहार विशेष, करंट अफेयर्स और विज्ञान पर विशेष फोकस.
  • स्टैटिक विषयों को 80 प्रतिशत और करंट अफेयर्स को लगभग 20 फीसदी समय.
  • हर पांच दिन पढ़ाई के बाद दो दिन केवल रिवीजन.
  • मेंस के लिए लगातार आंसर राइटिंग प्रैक्टिस.
  • इंटरव्यू की तैयारी केवल किताबों से नहीं, बल्कि चर्चा और पीयर रिव्यू से.

 
8-9 घंटे पढ़ाई, लेकिन बिना थके

शशांक रोजाना 8 से 9 घंटे पढ़ाई करते थे. सुबह 9 बजे पढ़ाई शुरू होती. तीन से चार अलग-अलग स्लॉट में पढ़ते, शाम को रोज टहलने जाते और फिर रात में दोबारा पढ़ाई करते. उनका मानना है कि लगातार 12-14 घंटे एक जगह बैठने से अधिक जरूरी है कि पढ़ाई छोटे-छोटे हिस्सों में
की जाए ताकि एकाग्रता बनी रहे और शरीर भी स्वस्थ रहे. 

नोट्स बनाने का अनोखा तरीका

शशांक शुरुआत में नोट्स नहीं बनाते थे. उनका कहना है कि किसी भी किताब को तीन-चार बार पढ़ने के बाद ही नोट्स बनाने चाहिए. इससे नोट्स छोटे, सटीक और उपयोगी बनते हैं. उन्होंने अपने नोट्स में फ्लोचार्ट, डायग्राम और छोटे-छोटे बिंदुओं का इस्तेमाल किया ताकि रिवीजन तेज़ी
से हो सके. बाद में उन नोट्स को PDF बनाकर मोबाइल में रखते और बार-बार देखते थे. जिन बातों में कमजोरी महसूस होती, उन्हें अलग से मार्क कर दोहराते थे. इतना ही नहीं, उन्होंने कई विषयों पर अपने ही छोटे-छोटे वीडियो बनाकर निजी रूप से यूट्यूब पर अपलोड किए. खाली समय में उन्हें 2X पर सुनते थे. उनका कहना है कि यह तरीका याददाश्त मजबूत करने में बेहद कारगर साबित हुआ.

सेल्फ स्टडी या कोचिंग?

इसपर शशांक का मानना है कि इसका कोई एक जवाब नहीं हो सकता.  BPSC प्रीलिम्स तक उनकी पूरी तैयारी लगभग सेल्फ स्टडी पर आधारित रही. मेंस से पहले  उन्होंने टेस्ट, फीडबैक और पीयर रिव्यू के लिए एक कोचिंग का सहयोग लिया. वह कहते हैं कि अगर किसी अभ्यर्थी को लगता है कि उसकी समझ या कंटेंट अभी मजबूत नहीं है तो कोचिंग लेनी चाहिए. लेकिन केवल सेल्फ स्टडी से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.

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असफलताएं ही सबसे बड़ी प्रेरणा बनीं

BPSC से पहले शशांक ने UPSC के 4 प्रयास दिए. कई बार मेंस तक पहुंचे, कुछ बार उससे पहले ही बाहर हो गए. CAPF में भी फिजिकल में असफल रहे. लगातार असफलताओं के बीच कई बार उन्हें खुद पर संदेह हुआ कि क्या वे सचमुच इस परीक्षा के लिए बने हैं. ऐसे समय में उनके पिता और बड़े भाई उनका सबसे बड़ा सहारा बने. उन्होंने कभी उनका मनोबल टूटने नहीं दिया. बार-बार यही कहा गलतियों को सुधारो, रिवीजन करो और आगे बढ़ो. 

जन्मदिन भी पढ़ाई में बीता, त्योहार भी छूट गए

इस सफलता की कीमत भी कम नहीं थी. छठ, दिवाली, होली जैसे त्योहारों पर कई बार घर नहीं जा सके. परिवार की कई शादियां छूट गई. मेंस से
ठीक पहले उनका जन्मदिन आया, लेकिन उस दिन भी कोई उत्सव नहीं हुआ. पूरा दिन किताबों के साथ बीता. वह कहते हैं कि तैयारी के दौरान ऐसे
त्याग करने पड़ते हैं जिन्हें केवल वही समझ सकता है जो इस रास्ते से गुजर रहा हो.

इंटरव्यू में पहला सवाल ही सबसे कठिन था

इंटरव्यू बोर्ड ने सबसे पहले उनसे जूलॉजी के सभी फाइलम और उनकी श्रेणियों के बारे में पूछा. यह ऐसा सवाल था जिससे कई उम्मीदवार घबरा सकते थे, लेकिन शशांक ने पूरे आत्मविश्वास के साथ क्रमवार उत्तर दिया. उन्हें लगता है कि यही वह क्षण था जब इंटरव्यू बोर्ड उनके जवाब से प्रभावित हुआ.

जब रिजल्ट आया

रिजल्ट के दिन शशांक दिल्ली में अपने कमरे पर थे. जब लिस्ट में अपना नाम और दूसरी रैंक देखी तो कुछ देर तक उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ. पहला फोन उन्होंने अपने पिता और बड़े भाई को किया फोन पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा- “पापा… आपका बेटा SDM बन गया.”

सफलता का सबसे बड़ा मंत्र

आज शशांक हर एस्पिरेंटस से केवल एक बात कहते हैं- “अपना ‘क्यों' कभी मत भूलिए. आपने तैयारी शुरू क्यों की थी, यह याद रहेगा तो मुश्किल से मुश्किल समय भी आपको रोक नहीं पाएगा.” उनके अनुसार अभ्यर्थियों की तीन सबसे बड़ी गलतियां होती हैं-

  • करंट अफेयर्स को गंभीरता से न पढ़ना 
  • स्टैटिक विषयों की अधूरी तैयारी
  • परीक्षा हॉल में प्रश्नों को हल करने की

गलत रणनीति

शशांक की कहानी बताती है कि सफलता केवल लंबे समय तक पढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि सही रणनीति, लगातार रिवीजन, अपनी गलतियों से सीखने और कठिन समय में भी लक्ष्य पर टिके रहने से मिलती है. शायद यही वजह है कि कुछ ही अंक से चूकने वाला वही कैंडिडेट आज BPSC की मेरिट सूची में दूसरे नंबर पर खड़ा है.

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