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बसपा और सपा ने बनाया प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा भी दे रही पूरा महत्व; यूपी में क्यों इतना अहम पाल समाज

यादव और कुर्मी के बाद पाल-बघेल समाज की अच्छी आबादी है. कुछ आंकड़ों के अनुसार यूपी में इनकी आबादी लगभग 4 फीसदी है.

बसपा और सपा ने बनाया प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा भी दे रही पूरा महत्व; यूपी में क्यों इतना अहम पाल समाज
  • भाजपा ने यादव और जाटव वोटबैंक से अलग ओबीसी और दलित वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई है
  • पाल-बघेल समाज की आबादी लगभग चार प्रतिशत है और यह कौशांबी, फतेहपुर, प्रयागराज, आगरा जैसे जिलों में अहम है
  • भाजपा ने पूजा पाल को उपाध्यक्ष और प्रकाश पाल को राज्यसभा में भेजा है और वोटबैंक साधे रखने का प्रयास किया है
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा की कोशिश रही है कि सपा के यादव वोट बैंक से इतर ओबीसी वर्ग में सेंध लगाई जाए. इसके अलावा बसपा के जाटव वोटबैंक से इतर दलितों के बीच पैठ बनाई जाए. इसके तहत भाजपा दशकों से कोशिश में रही है. लोधी, विश्वकर्मी, सुनार, कुम्हार जैसी कई जातियां लगातार भाजपा को वोट देती रही हैं. इसके अलावा भाजपा ने पाल-बघेल समाज पर भी बीते कुछ सालों में फोकस बढ़ाया है. इस समाज का बड़ा हिस्सा पहले भी भाजपा समर्थक माना जाता रहा है, लेकिन सपा और बसपा ने इस पर फोकस बढ़ाया तो अब भाजपा भी काउंटर करती दिख रही है. 

सूबे में यदि यादव समाज की आबादी 9 से 12 फीसदी तक मानी जाती है. ओबीसी वर्ग की यह सबसे ज्यादा आबादी वाली जाति है, लेकिन भाजपा इसके काउंटर में कई जातियों की गोलबंदी करती रही है, जो मिलकर इस आंकड़े से अधिक हो जाती हैं. इसी में से एक पाल समाज भी है. यादव और कुर्मी के बाद पाल-बघेल समाज की अच्छी आबादी है. कुछ आंकड़ों के अनुसार यूपी में इनकी आबादी लगभग 4 फीसदी है. इसके अलावा यूपी के कौशांबी, फतेहपुर, प्रयागराज, आगरा, प्रतापगढ़ जैसे जिलों में इनकी आबादी काफी अधिक है. यहां की ऐसी कई सीटें हैं, जहां पाल समाज नतीजा ही बदलने का दम रखता है. 

इसके अलावा नैरेटिव के हिसाब से भी ये काफी अहम हैं. सपा हमेशा किसी यादव को ही अहम पद पर रखने की धारणा से बचने के लिए श्याम लाल पाल को प्रदेश अध्यक्ष बना चुकी है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष पहले से ही विश्वजीत पाल हैं. ऐसे में भाजपा अपने परंपरागत वोट बैंक को साधने के लिए एक्टिव हुई है. माना जाता है कि इसी के तहत उसने पूजा पाल को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है. इसके अलावा वह काफी मुखर रहती हैं. उनके पति राजू पाल की हत्या में अतीक अहमद का हाथ माना जाता था. ऐसे में पूजा पाल को आगे रखने का एक बड़ा महत्व है. वह पाल समाज की हैं और फिर महिला भी हैं. 

इसी तरह प्रकाश पाल को अब भाजपा ने आगे बढ़ाया है. उन्हें राज्यसभा भेजा जा रहा है. इसके अलावा ओबीसी मोर्चा के भी वह अध्यक्ष हैं. इस तरह 4 फीसदी की आबादी वाला पाल समाज अचानक से महत्वपूर्ण हो चला है. जानकार मानते हैं कि ज्यादातर अन्य जातियों का बड़ा हिस्सा किसी दल विशेष का वोटबैंक हो चुका है. ऐसे में पाल समाज का वोट यदि पलटता है तो फिर नतीजे भी बदल सकते हैं. बता दें कि भाजपा पहले भी एसपी सिंह बघेल जैसे नेता को आगे बढ़ाती रही है. इसके अलावा आरएसएस ने अहिल्या बाई होलकर के सम्मान में भी देश भर में आयोजन किए हैं. वह धनगर समाज की थीं, जो यूपी में पाल-बघेल कहलाते हैं. इसलिए वैचारिक स्तर से लेकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक में भाजपा पाल समाज को महत्व देती दिख रही है. 

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