यूपी में बीजेपी और बीएसपी के दो विधायकों को सरकारी ठेकेदारी करने के इल्ज़ाम में बर्खास्त कर दिया गया है। बलिया ज़िले की रसड़ा सीट से बीएसपी विधायक उमा शंकर सिंह और महाराजगंज ज़िले की फरेन्दा सीट से बीजेपी विधायक बजरंग बहादुर सिंह के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की गई थी कि वे बड़े पैमाने पर सरकारी ठेकेदारी कर रहे हैं।
लोकयुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने जांच में दोनों विधायकों के खिलाफ इल्ज़ाम सही पाए और सरकार को उन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश की थी।
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लोकायुक्त ने बीएसपी विधायक उमाशंकर सिंह के बारे में एनडीटीवी से कहा, 'इतना एस्टेब्लिश हुआ था कि उमाशंकर सिंह ने अब तक एक हज़ार करोड़ के ठेके पीडब्लूडी से लिए हैं। जो पहले के ठेके हैं, वे भी चल रहे हैं और जो बाद के हैं वे भी चल रहे हैं। इसी तरह जांच में बजरंग बहादुर सिंह पर भी ठेके लेने के आरोप सही पाए गए हैं। वह भी काफी बड़े सरकारी ठेकेदार हैं।'
लोकायुक्त की सिफारिश सरकार ने राज्यपाल के पास भेज दी थी। राज्यपाल ने मामला निर्वाचन आयोग को भेजा था। निर्वाचन आयोग ने मामले पर सुनवाई की और पाया कि संविधान के अनुच्छेद 191 के तहत कोई भी विधायक केंद्र या किसी राज्य सरकार के तहत लाभ के पद पर नहीं रह सकता है। जबकि दोनों विधायक, विधायक के तौर पर सरकार से वेतन भी ले रहे हैं और सरकारी ठेकेदारी से भी लाभ कमा रहे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने राज्यपाल से उन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश की थी।
राज्यपाल राम नाइक ने एनडीटीवी को बताया कि बीएसपी विधायक उमाशंकर सिंह चूंकि विधायक बनने से पहले से सरकारी ठेकेदारी कर रहे हैं, इसलिए उन्हें विधायक बनने की तारीख से बर्खास्त किया गया हैं। लेकिन चूंकि बीजेपी विधायक बजरंग बहादुर सिंह ने विधायक बनने के बाद ठेका लिया है, तो उन्हें उसी तारीख से बर्खास्त किया गया है।
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