आप तो बस वोट दे दो. हम आपके कुंवारे लड़के की शादी भी करवा देंगे. गांव में चुनाव के लिए आम सभा हो रही है. सभा को संबोधित कर रहे नेताजी बिजली, पानी, सड़क जैसे मुद्दे के साथ लड़कों की शादी करने का वादा भी कर रहे हैं.
राजस्थान में पंचायत चुनाव चल रहे हैं. प्रदेश में पहली पहली बार 'वन स्टेट वन इलेक्शन' के तहत सभी ग्राम पंचायत, पंचायत समितियां और जिला परिषद में चुनाव हो रहे हैं. यह चुनाव चार चरणों में कराए जा रहे हैं. पहले चरण के चुनाव का मतदान हो चुका है. तीन चरण का चुनाव बाकी है.
पहले चरण के 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों में 62.90% वोटिंग हुई है. वहीं, सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव में 83.05 प्रतिशत मतदान हुआ. ग्रामीण सरकारों के चुनाव में कई रंग देखने को मिल रहे हैं. उम्मीदवार लगातार जनता के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर मतदान मांगने जा रहे हैं. लेकिन इस बार के चुनावों में बिजली, पानी, सड़क, मजदूरी जैसे मुद्दों के साथ कुंवारों का मुद्दा भी खूब चल रहा है.
कुंवारों के लिए दुल्हन लाने का वादा
पंचायत चुनावों में उम्मीदवार कुंवारे युवाओं के लिए दुल्हन लाने तक के वादे भी कर रहे हैं. खासकर ये वादे राजस्थान के शेखावाटी इलाके में ज्यादा किए जा रहे हैं.
झुंझुनू जिले में सूरजगढ़ विधानसभा से कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार ने एक चुनावी सभा के दौरान कुंवारों की सगाई करवाने का वादा किया.
कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में जनसभा करने के दौरान उन्होंने कहा कि आप तो बस वोट दे दो. आप कहोगे तो आपके कुंवारे लड़कों की सगाई भी करवा दूंगा.

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झुंझनू जिले के नवलगढ़ तहसील के झाझड़ गांव से सरपंच उम्मीदवार अनीता सैनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करके वादा किया कि वे गांव के कुंवारे युवाओं की शादी भी करवाएंगी. इसलिए वे गांव के कुंवारे लड़कों के लिए दुल्हन लाने की व्यवस्था करेंगी. इसके लिए चाहे यूपी बिहार से भी लड़कियां लेकर आ सकते हैं.

सरपंच उम्मीदवार अनीता सैनी
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यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. इसी तरह के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.
पहले भी ऐसे बयान आए हैं सामने
शहरी निकाय चुनाव के वक्त भी इस तरह के बयान सामने आए थे. भाजपा नेता और पूर्व विधायक रामलाल शर्मा ने ऐसी ही एक जनसभा के दौरान कार्यकर्ताओं और समर्थकों को कहा कि एक बार हमारे उम्मीदवार को जिता दो, आपके किसी भी काम में कोई कमी नहीं आएगी. उन्होंने स्थानीय लहजे में कहा कि 'आपका एक भी लड़का कुंवारा नहीं रहेगा'.
दरअसल, इससे पहले एक युवक ने उनका पत्र लिखकर शादी करवाने की मांग भी की थी. उनका यह बयान भी उस पत्र के साथ जोड़कर खूब वायरल हुआ. हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि यह बयान दूसरे संदर्भ में था.

शादी क्यों बन गई मुद्दा?
दरअसल, पंचायत और निकाय चुनाव में किया जा रहे इन वादों को भले ही मजाक या पब्लिसिटी स्टंट की तरह देखा जा रहा हो लेकिन इन बयानों के पीछे एक बड़ी सामाजिक समस्या और मानसिकता की चुनौती है.
घटते चाइल्ड बर्थ लिंगानुपात के चलते राजस्थान के शेखावाटी इलाके में लड़कों की शादी बड़ी चुनौती बन रही है. लंबे समय तक सामाजिक कुरीतियों और रूढ़िवादी मानसिकता के कारण भ्रूण हत्या जैसे कृत्यों से महिलाओं की संख्या कम है.
सेंट्रल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की ओर से जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में चाइल्ड सेक्स रेशो एट बर्थ (CRS) 806 है. यानी, अगर एक हजार लड़के पैदा हो रहे हैं तो उनकी तुलना में लड़कियां 806 ही पैदा हो रही हैं.
शेखावाटी में यह और गंभीर है. 2016 के आधार पर जारी की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक सीकर में जन्म के समय लिंगानुपात (CRS) सबसे कम 649 दर्ज किया गया. नागौर में 664, बीकानेर 693 और झुंझनू में यह 723 दर्ज किया गया.
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान का लिंगानुपात 928 था. यह राष्ट्रीय औसत 943 से भी कम था. लिंगानुपात में यह अंतर शादी योग्य लड़कियों की कमी को दर्शाता है.
जानकार क्या कहते हैं?
समाजशास्त्री प्रोफेसर राजीव गुप्ता बताते हैं कि इस समस्या के कई कारण है. सबसे पहली बात तो ग्रामीण अर्थव्यस्था की अस्थिरता की है. पूरे भारत के साथ-साथ खासकर शेखावाटी क्षेत्र में कृषि और युवाओं का सेना में जाना मुख्य पेश है. कृषि खराब मौसम, खाद बीज की कमी और कई अन्य कारणों से बहुत स्थिर अर्थव्यवस्था का पेशा नहीं रही है.
दूसरा कारण है कि अब लड़कियां शिक्षित होने लगी हैं. वे बाहर बड़े शहरों में नौकरी करती है तो अपना साथी वे अपना जैसा चुनना चाहती है. रोजगार के लिए अर्बन माइग्रेशन हुआ है. अब लड़कियां गांवों में नहीं बल्कि शहरों में अपने जैसे विचार के साथी चाहती है.
वह कहते हैं कि जेन जी जनरेशन केवल पॉलिटिकल नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी बोल रही है. वे पुरुष प्रधान जैसे सिंड्रोम को तोड़ रही हैं.

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लड़कियां खरीदकर लाने वाला रैकेट बन गया
राजस्थान में लड़कों की शादी न होने का यह मुद्दा इतना गंभीर है कि यूपी बिहार से लड़कियां खरीद कर लाने की कई घटनाएं भी सामने आती हैं. ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिनमें यूपी, बिहार, बंगाल जैसे प्रदेशों से लड़कियां खरीद कर शादी करने का ट्रेंड है.
यह केवल सामाजिक आधार पर नहीं बल्कि एक आपराधिक रूप से बड़ा रैकेट बन चुका है. कई मामलों में बड़े दलालों के गिरोह इस सब में सामने आए हैं.
पुलिस की कई कार्रवाइयों में ऐसे बड़े गिरोह का भी पर्दाफाश हुआ है. स्थानीय स्तर पर इस प्रथा को 'पारो प्रथा' या 'मोल्की प्रथा' कहा जाता है. इन दुल्हनों को 'पारो' कहा जाता है. ये लड़कियां खरीद कर दलालों के नेटवर्क के जरिए यहां लाई जाती है और फिर कभी वापस नहीं जा पाती.
कई मामलों में इनको दी जाने वाली प्रताड़ना भी सामने आती है. अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए इस तरह से शादी करने की कुरीति अब एक संगठनात्मक अपराध बन गया है.
यूपी-बिहार से लाई जाती हैं लड़कियां
प्रोफेसर राजीव गुप्ता कहते हैं कि यह पैटर्न लंबे समय से चले आ रहा है. बिहार, उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के गरीब इलाकों से बच्चियों को बेहतर जीवन और पति का आश्वासन देकर लाया जाता है. वहां गरीबी के कारण उन्हें यहां लाया जाता है.
कई मामलों में उन्हें बंधुआ मजदूरी और जबरन विवाह जैसी परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ता है. सबसे बड़ी बात है कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय इस गठजोड़ की जानकारी होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से इसे तोड़ने के लिए संगठित प्रयास नहीं किए गए. यह गंभीर बात है.
राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विशाल विक्रम बताते हैं कि पंचायत चुनाव में उठ रहा यह मुद्दा भले ही मजाकिया अंदाज में देखा जा रहा हो, लेकिन यह गंभीर सामाजिक समस्या को दिखाता है.
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा नहीं है कि नेता शादी करवा पाएंगे या नहीं, यह समस्या इतनी गहरी है कि आम लोगों के सेंटीमेंट को और व्यवहार को प्रभावित कर रही है. यह समस्या एक विस्फोट की तरह है, जिसे सही ढंग से योजनाबद्ध तरीके से एड्रेस नहीं किया जाता है, तो आगे जाकर यह बड़े कल्चरल गैप और अन्य सामाजिक समस्याओं को जन्म देगी.
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