विपक्ष के भारी विरोध के बीच मोदी सरकार गुरुवार को दो बिल पास करवाने में सफल रही. तीन तलाक बिल जहां लोकसभा से पास हुआ, वहीं, आरटीआई संशोधन विधेयक को सरकार राज्यसभा से पास करवाने में कामयाब रही. तीन तलाक बिल पर वोटिंग के दौरान पक्ष में 303 वोट, जबकि विरोध में 82 मत डाले गए. बता दें कि वोटिंग से पहले संसद से जेडीयू, टीआरएस, YSR कांग्रेस और TMC सांसदों ने वॉकआउट कर दिया और जेडीयू, टीएमसी वोट से अलग रहीं, वहीं, बीजेडी ने बिल के पक्ष में वोट किया. टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस बिल के खिलाफ रही. उधर, राज्यसभा में आरटीआई संशोधन विधेयक पर वोटिंग से पहले ही कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया. हालांकि सरकार ने इस बिल के लिए ज़रूरी नंबर पहले से ही जुटा लिए थे जब NDA के बाहर की कई पार्टियों का समर्थन उसे हासिल हो गया था. TRS, BJD और PDP भी इस बिल पर सरकार के साथ रही.
इससे पहले बिल पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्रिपल तलाक बिल पर लोकसभा में कहा, "ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 24 जुलाई, 2019 तक ट्रिपल तलाक के 345 मामले सामने आ चुके हैं.' साथ ही उन्होंने कहा कि यह इंसाफ और इंसानियत का मामला है, हमें मुस्लिम बहनों की चिंता है. लोकसभा में जहां चर्चा के बाद उसके पास होने की उम्मीद है. इस बिल को लेकर बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए कहा था. विधेयक में एक साथ तीन तलाक कह दिए जाने को अपराध करार दिया गया और साथ ही दोषी को जेल की सज़ा सुनाए जाने का भी प्रावधान है. अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार ने मई में इस बिल का मसौदा पेश किया था, जिसको लेकर कई विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी. विपक्ष के साथ बिहार में एनडीए में सहयोगी जेडीयू भी इस बिल का विरोध करती है. आपको बता दें कि लोकसभा में तो सरकार के पास इस बिल को पास कराने के लिए पर्याप्त नंबर है लेकिन राज्यसभा से इसे पास कराना आसान नहीं होगा.