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गुरुग्राम में ब्लैक आउट जैसे हालात! आखिर हरियाणा में 40 हजार कर्मचारी क्यों गए हड़ताल पर? जान लीजिए इसकी वजह

हरियाणा में 40 हजार बिजली कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं. इससे गुरुग्राम पर बड़ा असर पड़ रहा है. फेस्टिव सीजन में बिजली संकट के कारण कारोबार भी प्रभावित हो रहा है.

गुरुग्राम में ब्लैक आउट जैसे हालात! आखिर हरियाणा में 40 हजार कर्मचारी क्यों गए हड़ताल पर? जान लीजिए इसकी वजह
गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल जारी है.
PTI
गुरुग्राम:

हरियाणा में बिजली विभाग के 40 हजार से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर हैं. बिजली का लाइसेंस निजी कंपनी के हाथ में देने के फैसले के विरोध में कर्मचारी गुरुवार से हड़ताल कर रहे हैं. इस कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूहं में बुधवार रात 10 बजे से ही अंधेरा छा गया. इसी बीच हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिज विज का कहना है कि निजी बिजली लाइसेंस जारी करने के फैसले को रद्द किया जा सकता है.

हालांकि, बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल के चलते साइबर सिटी गुरुग्राम में बड़ा संकट खड़ा हो गया है. 

पिछले 36 से 40 घंटों से शहर के दर्जनों इलाकों में बिजली की सप्लाई पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे न केवल घरों में लाइट और पानी का संकट हो गया है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में भी भारी हाहाकार मच गया है. 

सेक्टर-37, दौलताबाद और कादीपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 1500 से ज्यादा इंडस्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह ठप पड़ा है.

करोड़ों के नुकसान की आशंका

फेस्टिव सीजन के ठीक पहले हुए इस बिजली संकट ने कारोबारियों की कमर तोड़ दी है. 

ऑटोमोबाइल पार्ट्स और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के पास करोड़ों रुपयों के ऑर्डर पेंडिंग पड़े हैं, लेकिन पावर कट के कारण कारखानों की मशीनें शांत हैं और लाखों मजदूर खाली हाथ बैठने को मजबूर हैं. 

इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू 'ग्रेप-1' (GRAP-1) नियमों के तहत जनरेटर चलाने पर सख्त पाबंदी है. ऐसे में बैकअप की सुविधा न होने और भारी चालान के डर से कारोबारियों के सामने काम बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.

गुरग्राम में कहां-कहां संकट

गुरुग्राम के करीब 8.5 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से 5.5 लाख से ज्यादा लोग इस बिजली संकट से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं. 

पालम विहार, न्यू पालम विहार, अशोक विहार, सेक्टर-4, 5, 9, 104, सोहना डिवीजन और फर्रुखनगर सहित कई इलाकों में लोगों का जीना दूभर हो गया है. कई जगहों पर लोगों ने सड़कों पर उतरकर जाम भी लगाया. 

अधिकारियों के भी हड़ताल पर होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था करने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं, और उद्योगपति जल्द से जल्द सरकार से हस्तक्षेप कर इस संकट का समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं.

क्या है पूरा माजरा?

हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) ने 19 अक्टूबर को एक निजी कंपनी को गुरुग्राम और नूंह में सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के साथ बिजली सप्लाई करने का लाइसेंस जारी किया था. 

ये लाइसेंस इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को दिया गया है. इस कंपनी को HERC ने 25 साल का लाइसेंस दिया है.

HERC के इसी फैसले के खिलाफ बिजली विभाग के करीब 40 हजार कर्मचारी गुरुवार से हड़ताल पर हैं. 

हालांकि, सरकार भी इसका विरोध कर रही है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को कहा था कि सरकार HERC के फैसले के खिलाफ अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) जाएगी.

वहीं, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गुरुवार को कहा था कि यह हड़ताल गैर-जरूरी है, क्योंकि निजी कंपनी को बिजली लाइसेंस देने का फैसला HERC ने किया है.

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निजी बिजली लाइसेंस जारी करने के फैसले को रद्द कर सकती है.

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