फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने वाली कंपनी मेटा पर केंद्र सरकार ने अब सिर्फ कंटेंट हटाने या मॉनिटर करने का नहीं, बल्कि उसके पीछे काम करने वाले एल्गोरिद्म पर भी सवाल उठाया है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को साफ शब्दों में कहा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को किसी एक नैरेटिव, एकतरफा जानकारी या भ्रामक सामग्री के लगातार संपर्क में नहीं आना चाहिए.
सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर रिकमेंड करने वाले सिस्टम्स किसी खास तरह के कंटेट को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा देती हैं तो इससे भ्रम, डर और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
मंत्रालय ने एडवाइजरी में क्या लिखा?
सरकार ने इस बात पर चिंता जताई है कि कई बार सार्वजनिक घटनाओं, कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों या संवेदनशील परिस्थितियों से संबंधित वीडियो, तस्वीरें और ग्राफिक्स बिना पर्याप्त संदर्भ के बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाते हैं. अगर ऐसी सामग्री को एल्गोरिद्म बार-बार आगे बढ़ाता है तो इससे लोगों में भ्रम और आशंका फैल सकती है.
एडवाइजरी में कहा गया है कि सार्वजनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है. मंत्रालय ने खास तौर पर पुरानी तस्वीरों और वीडियो को नई घटना बताकर पेश करने, एडिट किए गए विजुअल्स, आपात प्रतिबंधों या पुलिस कार्रवाई से जुड़े अपुष्ट दावों और बिना पर्याप्त संदर्भ वाले ऑडियो-वीडियो कंटेंट को लेकर चिंता जताई है. सरकार का मानना है कि ऐसी सामग्री अगर तेजी से फैलती है तो उसका असर वास्तविक दुनिया में भी दिखाई दे सकता है.
नए सिस्टम की डेवलप किया जाए: मंत्रालय
MeitY ने Meta से यह भी कहा है कि वह ऐसे मजबूत तंत्र विकसित करे जो उन पोस्टों और सामग्रियों की पहचान कर सकें जिन्हें एल्गोरिद्म के जरिए असामान्य रूप से ज्यादा पहुंच मिल रही है. मंत्रालय चाहता है कि ऐसी सामग्री की समय रहते समीक्षा हो और जरूरत पड़ने पर उसे उच्च स्तर पर एस्केलेट किया जाए, खासकर तब जब उससे व्यापक भ्रम, हिंसा या सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा हो.
यह एडवाइजरी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी को लेकर चल रही बड़ी बहस के बीच आई है. अब चर्चा सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि प्लेटफॉर्म पर कौन-सा कंटेंट मौजूद है, बल्कि इस पर भी है कि आखिर कौन-सा कंटेंट लाखों लोगों तक पहुंचाया जा रहा है और क्यों.
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत जारी इस सलाह में मेटा से कहा गया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि भ्रामक, छेड़छाड़ किए गए या संदर्भ से बाहर सामग्री को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा न मिले. इसके साथ ही सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो के साथ पर्याप्त संदर्भ भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि यूजर्स उनकी तारीख, स्थान और वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ सकें.
हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि उसका मकसद वैध अभिव्यक्ति या सार्वजनिक चर्चा को रोकना नहीं है. मंत्रालय ने Meta से कहा है कि वह अपने मौजूदा सुरक्षा और मॉडरेशन तंत्र को मजबूत करे, लेकिन ऐसा करते समय कानूनी और लोकतांत्रिक संवाद पर अनावश्यक रोक न लगे. एडवाइजरी में कहा गया है कि यह कदम जिम्मेदार सूचना प्रसार को बढ़ावा देने और साथ ही वैध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान बनाए रखने के लिए उठाया गया है.
MeitY ने Meta को तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने और मंत्रालय को अनुपालन की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं. हालांकि एडवाइजरी में किसी विशेष पोस्ट, घटना या कंटेंट का जिक्र नहीं किया गया है और न ही यह बताया गया है कि Meta अपनी एल्गोरिद्मिक सिस्टम में क्या बदलाव करेगा.
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