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This Article is From Sep 28, 2020

कांग्रेस सांसद ने कृषि कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका

याचिका में कहा गया है कि यह कानून  गैरकानूनी है. याचिका में कहा गया है कि कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसे रद्द किया जाना चाहिए.

कांग्रेस सांसद ने कृषि कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका
कृषि कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है (प्रतीकात्‍मक फोटो)
  • कांग्रेस सांसद प्रतापन ने दाखिल की है यचिका
  • कहा, यह कानून मौलिक अधिकारों का उल्‍लंघन
  • किसान और विपक्षी पार्टियां कर रहे इस कानून का विरोध
नई दिल्ली:

Plea against Farmers Act: किसान और कृषि कानून (Farmers Act) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पहली याचिका दाखिल की गई है. एक कांग्रेस सांसद की ओर से यह याचिका दाखिल की गई है. केरल के कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन  ने किसानों के (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, 2020 को चुनौती दी है.याचिका में कहा गया है कि यह कानून  गैरकानूनी है. याचिका में कहा गया है कि कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसे रद्द किया जाना चाहिए.याचिका में कहा गया है कि कानून की कुछ धारा संविधान के मूल ढांचे और किसानों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं. यह कानून किसानों को तनाव में डालता है और यदि कोई विवाद  होता है तो उन्हें उपाय के लिए नौकरशाही के पीछे भागना होगा. ये कानून शिकायतों को दूर करने के लिए किसान केंद्रित अदालतों को स्थापित करने में विफल रहा हैऔर इस अधिनियम द्वारा व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का उल्लंघन किया गया है.

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गौरतलब है कि मानसून सत्र में संसद ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दी. विपक्ष के पुरजोर विरोध के बीच इन विधेयकों को मंजूरी दी गई है. कृषि कानून को लेकर देशभर में किसानों और विपक्षी दलों की ओर से प्रदर्शन किया जा रहा है. इनकी ओर से दलील दी जा रही है कि नए कृषि कानून किसानों को गुलाम बना देंगे.

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कृषि कानून के विरोध में आवाज बुलंद करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘एक त्रुटिपूर्ण जीएसटी ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को बर्बाद कर दिया. नए कृषि कानून हमारे किसानों को गुलाम बना देंगे.'' पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) ने भी किसानों के प्रदर्शन का समर्थन किया और आरोप लगाया कि ये कृषि विधेयक ‘ईस्ट इंडिया कंपनी राज' की याद दिलाते हैं. देश के दो राज्‍यों पंजाब और हरियाणा में इन कृषि कानूनों का सबसे ज्‍यादा विरोध हो रहा है.

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