- बैतूल खंडवा वड़ोदरा कॉरिडोर एमपी महाराष्ट्र और गुजरात के बीच अहम प्रोजेक्ट है.
- यह एक्सप्रेसवे तीनों राज्यों के लिहाज से अहम है, जिसे केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है.
- एमपी में इस पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर काम शुरू हो चुका है.
खंडवा से मुंबई के बीच का सफर अब 8 घंटे में पूरा हो जाएगा. क्योंकि बैतूल खंडवा वडोदरा कॉरिडोर इसमें गेमचेंजर साबित होने वाला है. केंद्र सरकार की इस परियोजना से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के बीच सुपरफास्ट कनेक्टिविटी हो जाएगी. 4415.60 करोड़ की लागत से बनने इस फोरलेन कॉरिडोर बैतूल, नागपुर, वडोदरा, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी. सफर के समय में बचत होने की वजह से व्यापार और परिवहन को बड़ा फायदा होगा. खास तौर पर मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल के चार बड़े जिले खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी को इसका सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है. इस प्रोजेक्ट से इस इलाके की तस्वीर में अहम फायदा होगा.
खंडवा से मुंबई का सफर होगा आसान
खंडवा और मुंबई की दूरी में इस प्रोजेक्ट से बड़ी कमी आएगी. दरअसल, अभी खंडवा से मुंबई जाने के लिए दो लेन वाले रास्ते से होकर जाना पड़ता है, यह रास्ता घुमावदार और खराब पैच वाला है. जिसमें ट्रैफिक भी एक बड़ी दिक्कत होती है. लेकिन इस कॉरिडोर के बनने से खंडवा सीधे वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे ग्रिड से भी रूप से कनेक्ट हो जाएगा, जो सीधा खरगोन, बड़वानी से होते हुए महाराष्ट्र में एंट्री करेगा. वर्तमान में दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में 14 से 15 घंटे तक का समय लग जाता है. लेकिन यह फोरलेन बनने से खंडवा से मुंबई के बीच का सफर का समय 3 से 5 घंटे तक कम होगा. जिससे दोनों शहरों के बीच की दूरी 8 घंटे तक में पूरी हो जाएगी.
बैतूल-खंडवा-वड़ोदरा कॉरिडोर से कनेक्टिविटी
- मध्य प्रदेश: बैतूल, खंडवा, इंदौर, बुरहानपुर और बड़वानी कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
- महाराष्ट्र: नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ तक जुड़ेगा.
- गुजरात: वडोदरा और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों के बीच सीधा जुड़ाव होगा.

कैसे जुड़ेंगे मध्य प्रदेश और गुजरात
यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश और गुजरात के लिए बहुत फायेदमंद होने वाला है. क्योंकि यह हाईवे एमपी के जुलवानिया जो बड़वानी जिले में आता है, यहां से महाराष्ट्र के जलगांव-भुसावल जिले में एंट्री करेगा. फिर यहां से यह हाईवे गुजरात के वडोदरा में एंट्री करेगा. यहां पर यह हाईवे खत्म होगा. ऐसे में यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी भारत और मध्य भारत के बीच लाइफलाइन का काम करने वाला है. क्योंकि इससे दोनों राज्यों के बड़े शहरों के बीच सीधा और सुगम जुड़ाव हो जाएगा.
सिंहस्थ-2028 को भी फायदा
उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ का आयोजन होना है. इस महाकुंभ में बड़ी संख्या में भक्त महाराष्ट्र और गुजरात से भी आते हैं. यह प्रोजेक्ट उज्जैन और खंडवा में आने वाले ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंगों के बीच कनेक्टिविटी को बेहद मजबूत करेगा. जिसका फायदा सिंहस्थ-2028 में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को मिलेगा. इसके अलावा यह इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट तथा इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क को भी सीधा लिंक प्रदान करेगा. जिससे यहां आने वालों को भी फायदा होगा.
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जमीन अधिग्रहण होगा शुरू
तीन महीने पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी. 233 किलोमीटर का यह प्रोजेक्ट 4415.60 करोड़ है. परियोजना बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों अच्छी कनेक्टिविटी देगी. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस प्रोजेक्ट पर काम करेगा. जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो रही है. ताजा अपडेट के मुताबिक एमपी के बैतूल, खंडवा और बुरहानपुर जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जनवरी 2027 से जमीन पर इसका निर्माण कार्य शुरू हो सकता है. NHAI के मुताबिक यह महत्वकांक्षी प्रक्रिया 2029 से 2030 के बीच शुरू हो सकता है.
फिलहाल यह प्रोजेक्ट 233.65 किलोमीटर लंबा है, जिसे फोरलेन में बनाया जाएगा. यह बैतूल जिले के हैवारखेड़ी से शुरू होकर, आशापुर, खंडवा और देशगांव होते हुए बड़वानी जिले के जुलवानिया तक जाएगा. NHAI इसे हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर बनाएगा. जिसे भविष्य में सिक्स-लेन तक अपग्रेड करने की भी योजना है.
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