भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. डॉ. अजय सूद ने कहा है कि AI से बढ़ते खतरे को देखते हुए अगर जरूरत पड़ेगी तो भारत सरकार AI को रेगुलेट करने के लिए नया कानून लाने के लिए तैयार है. NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में भारत सरकार के टॉप साइंटिस्ट प्रो. डॉ. अजय सूद ने कहा कि हमारे पास कानून हैं जो AI Risks को कवर करते हैं. लेकिन अगर जरूरत पड़ती है तो सरकार एक नया कानून लाने के लिए तैयार है.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि AI को रेगुलेट करने के लिए एक परामर्श पत्र (Consultative Paper) जल्दी ही जारी किया जाएगा. AI से जुड़े जोखिम बढ़ रहे हैं, इसलिए AI को सख्ती से नियंत्रित करने और विनियमित करने के लिए कुछ खास सुरक्षा उपाय तय करने पर विचार करना बेहद जरूरी हो गया है.
AI गवर्नेंस के लिए एक नियामक ढांचा तैयार करने के लिए संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि हम वैश्विक स्तर पर AI को रेगुलेट करने के लिए बनाये जा रहे कानूनों का भी अध्ययन करेंगे, ताकि दुनिया भर की बेहतरीन प्रथाओं को हम शामिल कर सकें. 'Responsible AI' के 7 सूत्रों में विशेष रूप से 'Do No Harm' की बात कही गई है.
सूद ने कहा कि हम इस बात पर काम कर रहे हैं कि AI कैसे उपयोगी हो सकता है, लेकिन साथ ही हमें स्पष्ट जोखिमों और पूर्वाग्रहों से भी बचना होगा. ऑस्ट्रेलिया में 'हगिंग फेस' (Hugging Face) से जुड़ी घटना ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है कि कैसे 'एजेंटिक AI' नुकसान पहुंचा सकता है. CERT-In ने इस संबंध में एक एडवाइजरी जारी की है. मुख्य उद्देश्य सुरक्षा उपायों को लागू करना है.
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