
फाइल फोटो
नई दिल्ली:
अस्सी और नब्बे के दशक में सिनेमा देखने के अंदाज में एक बड़ा बदलाव आया। पहली बार लोगों को मनचाही फिल्म देखने के लिए सिनेमा हॉल जाने की जरूरत खत्म हो गई। उसके बजाय घर पर ही परिवार के साथ चाय की चुस्कियों के बीच वीसीआर (वीडियो कैसेट रिकॉर्डर) के माध्यम से फिल्म देखने का चलन शुरू हुआ।
देखते ही देखते हर कस्बे, शहर में नुक्कड़ और चौराहों पर वीडियो कैसेट की दुकानें अनिवार्य रूप से दिखने लगीं। कस्बाई शहरों और गांवों में इसने लगभग एक क्रांति का रूप अख्तियार किया। उत्तरी भारत के गांवों में शादी-समारोहों में नौटंकी इत्यादि की जगह वीसीआर मंगाने की फरमाइश की जाने लगी। लोगों को सस्ते, सुगम अंदाज में सिनेमाई मनोरंजन का लुत्फ मिला। कुल मिलाकर इसके जरिये सिनेमाई मनोरंजन का लोकतांत्रीकरण हुआ। मैगनेटिक मीडिया की उस क्रांति का अब औपचारिक रूप से अवसान होने जा रहा है।
इसकी निर्माता जापान की फुनेई इलेक्ट्रिक कंपनी ने कहा है कि अब वह वीसीआर के उत्पादन को बंद करने जा रही है। इसके महीने के बाद इसका उत्पादन नहीं किया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि पिछले साल इसके महज साढ़े सात लाख यूनिटें ही बिकीं जबकि औसतन इसकी 15 लाख यूनिटें सालाना बिकती थीं। घटती मांग के चलते उत्पादन में गिरावट हुई और नतीजतन इसके उपकरण महंगे होते जा रहे थे। इसलिए इस महीने के आखिर में अंतिम वीसीआर के निर्माण के साथ ही इसका उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।
1970 के दशक के मध्य में यह तकनीक अस्तित्व में आई थी और तकरीबन दो दशक यानी 1997 तक यह दुनिया भर में छाई रही। 1994 में सोनी ने डीवीडी प्लेयर बनाया और 1997 में अमेरिका में इसका पर्दापण हुआ। उसके बाद से ही वीसीआर और वीडियो कैसेट के चलन में गिरावट दर्ज होनी शुरू हो गई।
पांच साल पहले ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के शब्दकोष से 'कैसेट प्लेयर' शब्द हटने का आशय भी स्मृति के पटल से इस शब्द के हटने से था। कुल मिलाकर बदलते वक्त और बदलती तकनीक की इस दुनिया में वीसीआर अब केवल गुजरे जमाने की बात होकर इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगा।
देखते ही देखते हर कस्बे, शहर में नुक्कड़ और चौराहों पर वीडियो कैसेट की दुकानें अनिवार्य रूप से दिखने लगीं। कस्बाई शहरों और गांवों में इसने लगभग एक क्रांति का रूप अख्तियार किया। उत्तरी भारत के गांवों में शादी-समारोहों में नौटंकी इत्यादि की जगह वीसीआर मंगाने की फरमाइश की जाने लगी। लोगों को सस्ते, सुगम अंदाज में सिनेमाई मनोरंजन का लुत्फ मिला। कुल मिलाकर इसके जरिये सिनेमाई मनोरंजन का लोकतांत्रीकरण हुआ। मैगनेटिक मीडिया की उस क्रांति का अब औपचारिक रूप से अवसान होने जा रहा है।
इसकी निर्माता जापान की फुनेई इलेक्ट्रिक कंपनी ने कहा है कि अब वह वीसीआर के उत्पादन को बंद करने जा रही है। इसके महीने के बाद इसका उत्पादन नहीं किया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि पिछले साल इसके महज साढ़े सात लाख यूनिटें ही बिकीं जबकि औसतन इसकी 15 लाख यूनिटें सालाना बिकती थीं। घटती मांग के चलते उत्पादन में गिरावट हुई और नतीजतन इसके उपकरण महंगे होते जा रहे थे। इसलिए इस महीने के आखिर में अंतिम वीसीआर के निर्माण के साथ ही इसका उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।
1970 के दशक के मध्य में यह तकनीक अस्तित्व में आई थी और तकरीबन दो दशक यानी 1997 तक यह दुनिया भर में छाई रही। 1994 में सोनी ने डीवीडी प्लेयर बनाया और 1997 में अमेरिका में इसका पर्दापण हुआ। उसके बाद से ही वीसीआर और वीडियो कैसेट के चलन में गिरावट दर्ज होनी शुरू हो गई।
पांच साल पहले ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के शब्दकोष से 'कैसेट प्लेयर' शब्द हटने का आशय भी स्मृति के पटल से इस शब्द के हटने से था। कुल मिलाकर बदलते वक्त और बदलती तकनीक की इस दुनिया में वीसीआर अब केवल गुजरे जमाने की बात होकर इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगा।
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