कभी-कभी बॉलीवुड में चेहरा नहीं, सिर्फ एक आवाज ही इतिहास लिख देती है. ऐसी आवाज जिसे सुनते ही लोगों की नजर सीधे स्क्रीन पर नजर आ रही हीरोइन पर चली जाती थी. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि 90 के दशक में करिश्मा कपूर और माधुरी दीक्षित के कई सुपरहिट गानों के पीछे एक ऐसी सिंगर थीं, जिन्होंने सिर्फ 11 साल की उम्र में मोहम्मद रफी के साथ गाना गाकर सबको चौंका दिया था. फिर शादी के बाद अचानक इंडस्ट्री से गायब हो गईं. सालों बाद जब लौटीं तो पुराने नाम से नहीं बल्कि नई पहचान के साथ. इसके बाद जो हुआ उसने उनकी किस्मत ही बदल दी.
11 साल की उम्र में मिला सबसे बड़ा मौका
नेपाल की रहने वाली सुपमा श्रेष्ठ बचपन से ही शानदार गाती थीं. सुषमा के पिता के एक दोस्त थे जो कि मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर शंकर-जयकिशन के असिस्टेंट हुआ करते थे. उसी दोस्त ने सुषमा का नाम म्यूजिक डायरेक्टर को सजेस्ट किया था. उन्हें सुषमा की आवाज पसंद आई और 11 साल की उम्र में मोहम्मद रफी के साथ गाने का मौका मिला. उनकी आवाज इतनी पसंद आई कि महज 11 साल की उम्र में उन्हें फिल्म अंदाज में मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर के साथ 'है ना बोलो बोलो' गाने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने 'तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई', 'एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल' और 'क्या हुआ तेरा वादा' जैसे कई यादगार गाने गाए. इतनी कम उम्र में ऐसी शुरुआत बहुत कम सिंगर्स को नसीब होती है.
शादी के बाद बदल गया सबकुछ
80 के दशक में शादी के बाद उनका सिंगिंग करियर धीमा पड़ गया और वो लंबे समय तक फिल्मों से दूर रहीं. लेकिन 90 के दशक में उन्होंने फिर वापसी करने का फैसला किया. इस दौरान एक म्यूजिक कंपनी ने उन्हें नया नाम रखने की सलाह दी. सुपमा श्रेष्ठ अब पूर्णिमा बन चुकी थीं. दिलचस्प बात ये रही कि नाम बदलते ही उनकी किस्मत भी बदल गई और उन्हें एक के बाद एक बड़े गाने मिलने लगे.
करिश्मा और माधुरी की बनीं आवाज
पूर्णिमा ने वापसी के बाद करिश्मा कपूर के लिए 'ऊई अम्मा ऊई अम्मा क्या करता है', 'हाय हुकू हाय हुकू', 'ऊंची है बिल्डिंग', 'सोना कितना सोना है' और 'मैं हूं बीवी नंबर 1' जैसे कई सुपरहिट गानों को अपनी आवाज दी. वहीं माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया 'चने के खेत में' भी उनकी आवाज में रिकॉर्ड हुआ और आज भी खूब सुना जाता है. इतना ही नहीं, स्कूलों में गाई जाने वाली मशहूर प्रार्थना 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' भी उनकी आवाज में रिकॉर्ड हुई थी. 90 के दशक की फिल्मों में उनकी आवाज ने कई हीरोइनों की स्क्रीन प्रेजेंस को और खास बना दिया.
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