आज यानी 16 अक्टूबर, शुक्रवार को नवरात्रि का छठा दिन है. छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी रूप की पूजा की जाती है. मां की चार भुजाएं हैं, जिसमें दाहिने हाथों में मां अभय और वर मुद्रा में हैं. बाएं हाथों में मां तलवार और कमल का फूल धारण करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा करने से रोग, शोक और भय से छुटकारा मिलता है. ऐसे में अगर आप भी नवरात्रि के उपवास कर रहे हैं और माता की पूजा करते हैं, तो आज पूजा के दौरान आप यहां से मां कात्यायनी चालीसा, मां कात्यायनी की आरती और मंत्र पढ़ सकते हैं.
मां कात्यायनी चालीसा | Maa Katyayani Chalisa
॥ दोहा ॥
जय कात्यायनी मां,जय महिषासुर मारिणी।
सुर नर मुनि आराधित,जय मंगल करिणी॥।
॥ चौपाई ॥
जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय महिषासुर घातिनी दानी।।
ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं।
शक्ति शक्ति सब जगत बनावैं।
रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा।
माँ कात्यायनी हैं सम्पूर्णा।।
कात्यायन ऋषि मुनि के आश्रय।
कात्यायनी माँ सबके बासय॥
भय, संकट हरिणी तुही माता।
भक्तों के दुःख हरती आपा।।
जो कोई तेरी शरण में आवे।
मनवांछित फल वह नर पावे॥।
ध्यान धार जो कोई नारी।
कात्यायनी पूर्ण सुखकारी।।
कुमारी पुजा जो नित ध्यावें।
अविवाहित जीवन न बितावे॥
हलर युग में मां तू सहाय।
जो भी भक्त करे मन लाय॥
कात्यानी मां तेरी महिमा।
सतयुमग त्रेता हो या द्वापर।।
सिंह सवारी मां भवानी।
जय-जय-जय अम्बे भवानी।।
जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जग माता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम है।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी।
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मन्दिर में भगत है कहते॥
कत्यानी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुडाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यानी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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