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Shardiya Navratri Day 5: नवरात्रि के पांचवें दिन होती है मां स्कंदमाता की पूजा, यहां पढ़ें मां स्कंदमाता चालीसा, मां की आरती और मंत्र

अगर आप भी नवरात्रि के उपवास कर रहे हैं और माता की पूजा करते हैं, तो आज पूजा के दौरान आप यहां से पढ़कर स्कंदमाता चालीसा, स्कंदमाता की आरती और मंत्र पढ़ सकते हैं.

Shardiya Navratri Day 5: नवरात्रि के पांचवें दिन होती है मां स्कंदमाता की पूजा, यहां पढ़ें मां स्कंदमाता चालीसा, मां की आरती और मंत्र
स्कंदमाता की चालीसा
(Photo Credit: NDTV)

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है. आज यानी गुरुवार, 15 अक्टूबर को नवरात्रि का पांचवां दिन है. नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है. मां का रूप बेहद शांत, सुंदर और तेजस्वी है. मां के चेहरे पर दिव्य आभा होती है और मां का वर्ण गौर है. इसलिए स्कंदमाता को देवी गौरी और पार्वती भी कहा जाता है. ऐसे में अगर आप भी नवरात्रि के उपवास कर रहे हैं और माता की पूजा करते हैं, तो आज पूजा के दौरान आप यहां से पढ़कर स्कंदमाता चालीसा, स्कंदमाता की आरती और मंत्र पढ़ सकते हैं. 

स्कंदमाता की चालीसा | Maa Skandmata Chalisa

        ॥ दोहा ।।

जय गिरी तनये दक्षजे, शम्भू प्रिये गुणखानि।
गणपति जननी पार्वती, अम्बे शक्ति भवानि।

         ॥ चौपाई ॥

ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे,पंच बदन नित तुमको ध्यावे।
षड्मुख कहि न सकत यश तेरो, सहसबदन श्रम करत घनेरो।।

तेऊ पार न पावत माता, स्थित रक्षा लय हिय सजाता।
अधर प्रवाल सदृश अरुणारे,अति कमनीय नयन कजरारे।।

ललित ललाट विलेपित केशर,कुंकुम अक्षत शोभा मनहर।
कनक बसन कंचुकि सजाए, कटी मेखला दिव्य लहराए।।

कंठ मंदार हार की शोभा,जाहि देखि सहजहि मन लोभा।
बालारुण अनंत छबि धारी, आभूषण की शोभा प्यारी।।

नाना रत्न जड़ित सिंहासन,तापर राजति हरि चतुरानन।
इन्द्रादिक परिवार पूजित, जग मृग नाग यक्ष रव कूजित।।

गिर कैलास निवासिनी जय जय, कोटिक प्रभा विकासिनी जय जय।
त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी, अणु-अणु महं तुम्हारी उजियारी।।

हैं महेश प्राणेश तुम्हारे,त्रिभुवन के जो नित रखवारे।
उन सो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब, सुकृत पुरातन उदित भए तब।।

बूढ़ा बैल सवारी जिनकी, महिमा का गावे कोउ तिनकी।
सदा श्मशान बिहारी शंकर,आभूषण हैं भुजंग भयंकर।।

कंठ हलाहल को छबि छायी,नीलकंठ की पदवी पायी।
देव मगन के हित अस किन्हो, विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो।।

ताकी, तुम पत्नी छवि धारिणी, दुरित विदारिणी मंगल कारिणी।
देखि परम सौंदर्य तिहारो, त्रिभुवन चकित बनावन हारो।।

भयभीता सो माता गंगा,लज्जा मय है सलिल तरंगा।
सौत समान शम्भू पहआयी, विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी।।

तेहि को कमल बदन मुरझायो,लखी सत्वर शिव शीश चढ़ायो।
नित्यानंद करी वरदायिनी, अभय भक्त कर नित अनपायिनी।।

अखिल पाप त्रयताप निकंदिनी, माहेश्वरी हिमालय नंदिनी।
काशी पुरी सदा मन भायी, सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी।।

भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री, कृपा, प्रमोद, सनेह विधात्री।
रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे,वाचा सिद्ध करि अवलम्बे।।

गौरी, उमा, शंकरी, काली, अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली।
सब जन की ईश्वरी भगवती, पतिप्राणा परमेश्वरी सती।।

तुमने कठिन तपस्या कीनी,नारद सों जब शिक्षा लीनी।
अन्न न नीर न वायु अहारा,अस्थि मात्र तन भयउ तुम्हारा।।

पत्र-घास को खाद्य न भायउ,उमा नाम तब तुमने पायउ।
तप बिलोकी ऋषि सात पधारे,लगे डिगावन, डिगी न हारे।।

तब तव जय-जय-जय उच्चारेउ,सप्तऋषि निज गेह सिद्धारेउ।
सुर विधि विष्णु पास तब आए, वर देने के वचन सुनाए।।

मांगे उमा वर पति तुम तिनसों, चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों।
एवमस्तु कहि ते दोऊ गए, सुफल मनोरथ तुमने पाए।।

करि विवाह शिव सों भामा, पुनः कहाई हर की बामा।
जो पढ़िहै जन यह चालीसा,धन-जन-सुख देइहै तेहि ईसा।।

           ॥ दोहा ॥

कुटि चंद्रिका सुभग शिर,जयति जयति सुख खानी।
पार्वती निज भक्त हित, रहहु सदा वरदानी।

मां स्कंदमाता की आरती | Maa Skandmata Aarti in Hindi

जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥

सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥

तेरी जोत जलाता रहू मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहू मैं॥

कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥

कही पहाडों पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥

हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाएं तेरे भक्त प्यारे॥

भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥

इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करें पुकार तुम्हारे द्वारे॥

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।
तू ही खंडा हाथ उठाए॥

दासों को सदा बचाने आयी।
भक्त की आस भुजाने आयी॥

जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥

सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥

मां स्कंदमाता का मंत्र | Maa Skandmata Mantra

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

​ध्यान मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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