आज यानी 6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व माना जाता है. एक साल में कुल 24 एकादशी आती हैं. इनमें इंदिरा एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है. इस एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ-साथ पितरों की पूजा और तर्पण भी किया जाता है. मान्यता है कि इंदिरा एकादशी व्रत करने से श्री हरि के साथ-साथ पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है. हालांकि, एकादशी व्रत तभी पूर्ण माना जाता है, जब इसका पारण सही समय पर और सही विधि के साथ किया जाए. ऐसे में आइए जानते हैं इंदिरा एकादशी व्रत पारण का समय और विधि-
इंदिरा एकादशी व्रत का पारण कितने बजे किया जाएगा?
पंचांग के अनुसार, इंदिरा एकादशी व्रत का पारण 7 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से सुबह 8 बजकर 38 मिनट तक करना शुभ रहेगा. इसी समय के भीतर व्रत खोलना उत्तम माना गया है. एकादशी व्रत के नियमों में 'हरिवासर' का विशेष महत्व बताया गया है. द्वादशी तिथि के शुरुआती समय को 'हरिवासर' कहा जाता है. इस दौरान व्रत खोलना शुभ नहीं माना जाता. इसलिए हरिवासर समाप्त होने के बाद ही व्रत का पारण करें.
इंदिरा एकादशी व्रत पारण की विधि- पारण वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें.
- इसके बाद भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें.
- पूजा के दौरान श्री हरि को तुलसी दल जरूर चढ़ाएं. तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है.
- इसके बाद विष्णु मंत्र का जाप करें.
- अंत में आरती के साथ पूजा संपन्न करें.
- इसके बाद आप जल ग्रहण कर या तुलसी का पत्ता खाकर व्रत का पारण कर सकते हैं.
पारण के बाद जरूरतमंद लोगों को दान देना भी बेहद पुण्यकारी माना जाता है. आप अपनी क्षमता के अनुसार, जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, धन या प्रसाद का दान कर सकते हैं. इसके बाद हल्का और सात्विक भोजन करें. पारण के बाद तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और शराब का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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