
दिल्ली के चुनावी जंग में राजनीतिक घमासान तेज़ हो गया है और राजनीतिक दल वोटरों को लुभाने के लिए हरसंभव हथकंडे अपना रहे हैं। इस चुनावी रस्साकशी के बीच ज़ुबानी जंग भी तेज़ हो गई है और उम्मीदवारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी।
हर बार की तरह इस बार भी मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की कवायद तेज़ हो रही है। दरअसल दिल्ली में आठ से ज़्यादा विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां मुस्लिम वोट 35 फीसदी से ज़्यादा है और हर बार नतीजा तय करने में निर्णायक होता है। इस बार भी दिल्ली के चुनावों में मुस्लिम वोटरों पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नज़र है।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) दोनों ये दावा कर रहे हैं कि बीजेपी को रोकने के लिए मुसलमान उनको वोट देंगे। एनडीटीवी से बातचीत में मटिया महल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार शोएब इकबाल ने दावा किया कि जबसे आम आदमी पार्टी राजनीति में आई है, मुस्लिम वोट का डिविज़न हो रहा है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला है। उनका आरोप है आम आदमी पार्टी बीजेपी की 'B' टीम की तरह काम कर रही है।
शोएब ने आम आदमी पार्टी पर पैसे लेकर उम्मीदवारों को टिकट बांटने का भी आरोप लगाया। शोएब इकबाल ने कहा, "मेरी समझ में नहीं आता कि गैर-राजनीतिक लोग जो राजनीति की ABCD नहीं समझते, वैसे लोगों को पैसे लेकर इन्होंने खड़े कर दिए हैं...इसे (मटिया महल में 'आप' उम्मीदवार को) पैसे लेकर टिकट क्यों दे दिया? (रिपोर्टर: आप AAP उम्मीदवार असीम अहमद की बात कर रहे हैं ?) शोएब: बिल्कुल...हां..."
शोएब इक़बाल जिस भी पार्टी में रहें, मटिया महल सीट उनकी है- ये 1993 के बाद से बीते 5 चुनावों के नतीजे बताते हैं। इस बार वह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और उनका मुक़ाबला आप के उम्मीदवार असीम अहमद खान से है, जो पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
पैसे से टिकट खरीदने के शोएब इकबाल के आरोप को असीम अहमद सिरे से खारिज कर देते हैं। उन्होंने शोएब को चुनौती दी कि अगर उनके पास सबूत हों, तो वे इसे साबित करें। उनका दावा है कि इस बार मटियामहल का मतदाता नतीजा बदलेगा।
एनडीटीवी से बातचीत में असीम ने कहा कि शोएब 20 साल से ज़्यादा समय से इलाके का दिल्ली विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन इस दौरान मटिया महल में कोई विकास नहीं हुआ। शोएब के कार्यकाल के दौरान विकास की कमी ही उनके लिए मुख्य चुनावी मु्द्दा है। कहते हैं मुसलमान हो या हिन्दू...सबको विकास चाहिए।
मटिया महल में करीब 60 फीसदी मतदाता मुस्लिम हैं, जो हर बार नतीजा तय करते हैं। लेकिन दिल्ली की राजनीति में मुस्लिम वोट के लिए राजनीतिक जंग का दायरा काफी बड़ा है। दिल्ली की करीब 12 फीसदी आबादी मुस्लिम है और यहां आठ विधान सभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां मुस्लिम मतदाता 35 से 50 फीसदी तक हैं जो सीधे चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। इनमें मटिया महल, बल्लीमारन, ओखला, मुस्तफाबाद. सीलमपुर, चांदनी चौक, किरारी और बाबरपुर शामिल हैं।
कांग्रेस ने 2013 के चुनावों में इनमें से पांच सीटें जीती थीं, जबकि आप को सिर्फ एक मिली थीं। ज़ाहिर है इस बार अगर दोनों पार्टियों को बेहतर करना है, तो उन्हें इन मुस्लिम-बहुल इलाकों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। अब देखना होगा कि 2015 के चुनावों में मुस्लिम मतदाता किसका साथ देता है - आम आदमी पार्टी या फिर कांग्रेस।
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