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This Article is From Jan 29, 2015

दिल्ली चुनाव : बीजेपी और आप के बागी बने सिरदर्द

दिल्ली चुनाव : बीजेपी और आप के बागी बने सिरदर्द
किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल की फाइल तस्वीर
नई दिल्ली:

दिल्ली में दर्जन भर जगहों पर बीजेपी से बागी हुए उम्मीदवार और दस से ज्यादा जगहों पर आम आदमी पार्टी से बागी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच महज पांच फीसदी वोटों के अंतर ने राजनीतिक परिदृश्य बदलकर रख दिया था।

वहां बागी उम्मीदवार अगर इन दोनों पार्टियों के परांपरागत वोट बैंक में सेंधमारी करते हैं तो 10 सीटों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। नागलोई जाट विधानसभा जो बीजेपी का गढ़ माना जाता है पिछले बार बीजेपी के मनोज शौकीन ने यहां से जीत दर्ज की थी।

यहां आम आदमी पार्टी के बिजेंदर शौकीन बीजेपी से पार्षद थे, इस बार उन्होंने पाला बदल लिया। साथ ही नरेंद्र बिंदल जो 30 साल बीजेपी में रहकर इस बार गिलास चुनाव चिन्ह से निर्दलीय चुनाव लड़कर बीजेपी के प्रत्याशी को पानी पिला रहे हैं।

नरेद्र बिंदल कहते हैं कि बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल का हौव्वा खड़ा करके आम आदमी पार्टी से दलबदल कर आए लोगों को तुरंत टिकट दे दिया। जबकि सालों से कार्यकर्ता के रूप में लगे लोगों की अनदेखी हो रही है। इसी लिहाज से मैने चुनाव लड़ने का मन बनाया है, मेरे साथ बीजेपी और संघ के प्रचारकों का साथ है।

ये मुश्किल सिर्फ बीजेपी के साथ ही नहीं है आम आदमी पार्टी के साथ भी है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में सबसे कम उम्मीदवार अंबेडकर नगर से हैं। यहां सिर्फ 4 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से तीन का ताल्लुक आम आदमी पार्टी से रह चुका है। पिछली बार आप पार्टी के टिकट से चुनाव जीते अशोक चौहान ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। वहीं राजबीर सिंह टिकट न मिलने से नाराज बीएसपी के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं।

चौधरी प्रेम सिंह को छोड़कर बाकियों का ताल्लुक आप पार्टी से ही है। राजबीर सिंह कहते हैं कि आम आदमी पार्टी का मै निष्ठावान कार्यकर्ता रहा, लेकिन पैसों के लिए अजय दत्त को आप पार्टी यहां से लड़वा रही है। इसी के चलते मैंने बीएसपी से चुनाव लड़ने का मन बनाया है।

आप पार्टी इस बार दूसरी पार्टियों के बहुत सारे नेताओं को टिकट देकर चुनाव लड़वा रही है तो वहीं बीजेपी कैडर बेस पार्टियां भी विनोद कुमार बिन्नी और धीर जैसे आम आदमी पार्टी के नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा है। यही वजह है कि दोनों ही पार्टियों में कार्यकर्ताओं के बीच खासा असंतोष है। अगर ये असंतोष वोट काटने में सफल रहा तो चुनावी नतीजे दिलचस्प के साथ चौंकाने वाले भी हो सकते हैं।

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