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कॉलेज और यूनिवर्सिटी में Ragging रोकने के लिए UGC के क्या हैं नियम, कैसे और कहां करें स्टूडेंट शिकायत...?

UGC के अनुसार, रैगिंग किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और सभी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों को इसे रोकने, प्रतिबंधित करने और समाप्त करने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी.

कॉलेज और यूनिवर्सिटी में Ragging रोकने के लिए UGC के क्या हैं नियम, कैसे और कहां करें स्टूडेंट शिकायत...?
कार्रवाई में निलंबन, निष्कासन, हॉस्टल से हटाना या अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं.

Anti Ragging Rule 2026 : कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले नए स्टूडेंट्स के मन में रैगिंग को लेकर अक्सर डर बना रहता है. इसे देखते हुए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने देश के सभी हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस को रैगिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. हाल ही में UGC ने एक नोटिस जारी कर संस्थानों को एंटी-रैगिंग नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा है. तो चलिए जानते हैं यूजीसी के एंटी रैगिंग रूल क्या हैं और रैगिंग के खिलाफ स्टूडेंट्स को कहां शिकायत करनी चाहिए. 

क्या हैं UGC एंटी-रैगिंग नियम?

UGC के निर्देशों के मुताबिक सभी संस्थानों में एंटी-रैगिंग कमेटी और एंटी-रैगिंग स्क्वाड का गठन कंपल्सरी है. संस्थानों को कैंपस में एंटी-रैगिंग पोस्टर, जागरूकता सामग्री और हेल्पलाइन नंबर जारी करने होंगें.

इसके अलावा कॉलेज और यूनिवर्सिटी को छात्रों और अभिभावकों से एंटी-रैगिंग अंडरटेकिंग भी ली जाती है. कॉलेजों को हॉस्टल, कैंटीन और अन्य संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं.

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स्टूडेंट कहां कर सकते हैं शिकायत?

अगर किसी छात्र के साथ रैगिंग होती है या रैगिंग का प्रयास किया जाता है, तो वह कई तरीकों से शिकायत दर्ज करा सकता है. UGC ने इसके लिए 24x7 टोल फ्री हेल्पलाइन 1800-180-5522 नंबर जारी किए हैं.

स्टूडेंट्स www.antiragging.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं. इसके अलावा संस्थान के एंटी-रैगिंग सेल या प्रशासन को भी सीधे शिकायत दी जा सकती है.

शिकायत मिलने पर क्या कार्रवाई होती है?

UGC के निर्देशों के अनुसार, रैगिंग का प्रथम दृष्टया मामला सामने आने पर संस्थान को तत्काल कार्रवाई करनी होगी. जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है और दोषी छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.

कार्रवाई में निलंबन, निष्कासन, हॉस्टल से हटाना या अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं. आयोग ने संस्थानों से शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मामलों की समय पर रिपोर्टिंग करने को भी कहा है.

छात्रों के लिए क्यों जरूरी है एंटी-रैगिंग नियम?

विशेषज्ञों का मानना है कि रैगिंग न केवल छात्र के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है, बल्कि उसके मानसिक और एकेडेमिक डेवलपमेंट पर भी असर डाल सकती है. यही वजह है कि UGC रैगिंग के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने पर जोर देता है. नए स्टूडेंट्स को अपने अधिकारों और शिकायत के उपलब्ध माध्यमों की जानकारी जरूर रखनी चाहिए.

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