- बिहार के समस्तीपुर के तेलनी गांव की दो बहनों ने प्रशासनिक सेवा और विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है
- बड़ी बेटी प्राची हनी ने UPSC की परीक्षा में ऑल इंडिया 28वीं रैंक प्राप्त कर IAS में चयनित हुई है
- प्राची हनी ने तीन बार असफलता के बाद चौथे प्रयास में सफलता हासिल कर निरंतर प्रयासों की मिसाल पेश की है
Success Story Bihar Sister: बिहार के समस्तीपुर जिले के बिथान प्रखंड स्थित तेलनी गांव की दो सगी बहनों ने कमाल कर दिखाया. इनकी सक्सेस स्टोरी हर किसी को प्रेरित करने वाली है. एक बहन आईएएस अफसर बन गई जबकि दूसरी वैज्ञानिक बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है. हम बात कर रहे हैं बिहार के समस्तीपुर में शिक्षक दंपती रजनीकांत वर्मा और चेतना कुमारी की बेटियों की. इनकी बड़ी बेटी प्राची हनी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 28वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जगह बनाई है. वहीं, छोटी बेटी प्रज्ञा चंद्र वर्मा हैदराबाद विश्वविद्यालय से माइक्रोबायोलॉजी की पढ़ाई कर वैज्ञानिक बनने की तैयारी में जुटी है.

success story bihar sister ias prachi honey pragya verma samastipur
Photo Credit: NDTV
UPSC में तीन बार फेल होने के बाद IAS बनी प्राची हनी
प्राची हनी की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत और संघर्ष की कहानी है. यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्हें लगातार तीन प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा. तीनों बार वह प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) से आगे नहीं बढ़ सकीं. हालांकि, उन्होंने असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना, तैयारी की रणनीति में बदलाव किया और लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं. आखिरकार चौथे प्रयास में वर्ष 2025 में उन्होंने पहली बार प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की. इसके बाद मुख्य परीक्षा (मेन्स) और साक्षात्कार में भी सफल रहीं. इस तरह उन्होंने ऑल इंडिया 28वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का गौरव प्राप्त किया. उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में शुरुआती असफलताओं के बाद निराश हो जाते हैं.

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छोटी बेटी प्रज्ञा भी वैज्ञानिक बनने की राह पर
बड़ी बहन प्राची जहां प्रशासनिक सेवा में अपनी पहचान बना चुकी हैं, वहीं छोटी बहन प्रज्ञा चंद्र वर्मा विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. वह हैदराबाद विश्वविद्यालय में एमएससी मॉलिक्यूलर माइक्रोबायोलॉजी के दूसरे वर्ष की छात्रा हैं. माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल कर वह वैज्ञानिक बनने का सपना साकार करने की दिशा में प्रयासरत हैं. दोनों बहनों ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपना लक्ष्य तय किया है. एक ने सिविल सेवा में सफलता हासिल की है तो दूसरी विज्ञान और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. उनकी उपलब्धियां परिवार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों को भी दर्शाती हैं.

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शिक्षक दंपती ने पेश की शिक्षा की मिसाल
प्राची और प्रज्ञा के पिता रजनीकांत वर्मा मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, खालिसपुर में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं. उनकी मां चेतना कुमारी तिरहुत हाई स्कूल, अघोरिया बाजार, मुजफ्फरपुर में शिक्षिका हैं. शिक्षा से जुड़े होने के कारण दंपती ने अपनी दोनों बेटियों की पढ़ाई और उनके भविष्य को प्राथमिकता दी. NDTV से बातचीत में रजनीकांत वर्मा ने बेटियों की उपलब्धियों पर खुशी जताई. परिवार के लिए यह गर्व का क्षण है कि दोनों बेटियां अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं.

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दोनों बहनों ने दिल्ली विश्वविद्यालय से की पढ़ाई
प्राची और प्रज्ञा की प्रारंभिक शिक्षा मुजफ्फरपुर में हुई. उनके पिता रजनीकांत वर्मा के अनुसार, दोनों बेटियों ने दसवीं तक डीएवी पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की, जबकि 12वीं की शिक्षा होली क्रॉस पब्लिक स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया. प्राची ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से भूगोल विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने भूगोल को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना. विषय की गहरी समझ, निरंतर अध्ययन और तैयारी में लगातार सुधार करते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए और अंततः बड़ी सफलता हासिल की.
बेटियों पर भरोसे ने दिखाई सफलता की राह
समाज में आज भी कुछ जगहों पर बेटों और बेटियों के बीच शिक्षा तथा अवसरों को लेकर भेदभाव देखने को मिलता है. ऐसे माहौल में रजनीकांत वर्मा और चेतना कुमारी ने अपनी दोनों बेटियों को समान अवसर देकर एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है. उन्होंने बेटियों की क्षमता पर भरोसा किया और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया.
समस्तीपुर जिले के एक छोटे से गांव तेलनी से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली प्राची और वैज्ञानिक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहीं प्रज्ञा की कहानी केवल एक परिवार की सफलता नहीं है, बल्कि उन तमाम अभिभावकों के लिए भी एक संदेश है जो अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा और अवसर देना चाहते हैं. दोनों बहनों ने साबित किया है कि सफलता का रास्ता प्रतिभा, परिश्रम, दृढ़ संकल्प और परिवार के सहयोग से बनता है.
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