SC OBC Scholarship News : अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अन्य वंचित वर्गों के छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप योजनाओं के इंप्लीमेंटेशन को लेकर सामाजिक न्याय और अधिकारिता पर संसदीय स्थायी समिति ने चिंता जताई है. समिति ने कहा है कि स्कॉलरशिप देने में लगातार हो रही देरी और लाभार्थी लक्ष्यों में कटौती छात्रों के हितों के खिलाफ है.
अपनी 21वीं रिपोर्ट में समिति ने कहा कि किसी एकेडमिक ईयर (शैक्षणिक वर्ष) के लिए तय स्कॉलरशिप अक्सर अगले एकेडमिक ईयर में जारी की जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को वेरिफिकेशन और दूसरी औपचारिकताओं को पूरा करने में "कुछ महीनों से लेकर एक साल तक" का समय लग जाता है. समिति ने कहा कि समय पर स्कॉलरशिप देने के लिए बार-बार सिफारिशें किए जाने के बावजूद यह समस्या बनी हुई है.
इसके साथ ही, स्थायी समिति ने 'अन्य पिछड़ा वर्ग' (OBC) के लिए 'पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम' के तहत 2026-27 के लाभार्थी लक्ष्य को कम करने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं. समिति ने कहा कि 2026-27 के लिए लाभार्थी लक्ष्य को घटाकर 34 लाख कर दिया गया है. समिति ने इस तरीके को अस्वीकार्य बताया और कहा कि पिछले लक्ष्यों को पूरा न कर पाने के बाद लक्ष्यों को कम करने के बजाय उन्हें हर साल बढ़ाया जाना चाहिए.
"रूटीन जवाब" से काम नहीं चलेगासमिति ने कहा कि किसी एकेडमिक ईयर की स्कॉलरशिप उसी साल दी जानी चाहिए ताकि छात्र ज़रूरत पड़ने पर उस मदद का इस्तेमाल कर सकें. समिति ने यह भी कहा कि इस समस्या को हल करने के उपाय "बार-बार" सुझाए गए हैं, लेकिन यह सिलसिला जारी है.
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने कहा कि जो राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने खुद के स्कॉलरशिप पोर्टल चलाते हैं, वे आम तौर पर उन्हें जुलाई और सितंबर के बीच खोलते हैं. वहीं, 'नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल' उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के योग्य आवेदकों के लिए जून में खुलता है जो इससे जुड़े हुए हैं.
विभाग ने बताया कि लाभार्थियों की संख्या का लक्ष्य अप्रैल-मई में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले 'एनुअल एक्शन प्लान' के आधार पर तय किया जाता है. हालांकि, स्कॉलरशिप अगले एकेडमिक ईयर में जारी की जाती है और कुछ राज्य व केंद्र शासित प्रदेश तय समय पर प्रोसेसिंग की औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाते हैं. वे पहले से भुगतान किए गए राज्य के हिस्से की जानकारी 'नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल' पर भेजते हैं.
विभाग ने आगे कहा कि अगर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश तीसरी तिमाही के अंत तक प्रक्रिया पूरी कर लें और तय शेड्यूल का पालन करें, तो आवेदन, वेरिफिकेशन और भुगतान की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है. साथ ही, अगले एकेडमिक ईयर तक जाने वाले मामलों को भी कम किया जा सकता है. समिति इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं थी.
उसने कहा कि विभाग ने लगातार बनी हुई समस्या का समाधान खोजने के बजाय फिर से वही "रूटीन जवाब" दिया है. रिपोर्ट में कहा गया, "समिति इस जवाब से निराश है क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि विभाग इस लगातार बनी हुई समस्या का कोई समाधान निकालेगा, लेकिन छात्रों को फिर से राज्यों के भरोसे छोड़ दिया गया है."
समिति ने फिर से कहा कि विभाग को तय समय-सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के लिए "सख्त कदम" उठाने चाहिए, और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर स्कॉलरशिप अगले साल तक टलने का सिलसिला जारी रहेगा. पैनल ने गौर किया कि स्कॉलरशिप से जुड़े नियमों में बदलाव किया जा रहा है और उम्मीद है कि 2026-27 से शैक्षणिक वर्ष के पहले चार से पांच महीनों के भीतर स्कॉलरशिप का भुगतान कर दिया जाएगा.
बजट बढ़ाने की सिफारिश
समिति की दूसरी बड़ी चिंता OBC के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना से जुड़ी है. उसने गौर किया कि 2024-25 के लिए तय लक्ष्य "पूरा नहीं हो पाया" और 2025-26 के लिए भी वही लक्ष्य तय कर दिया गया. जब समिति ने यह जानना चाहा कि क्या 2025-26 का लक्ष्य पूरा हो गया है, तो उन्हें बताया गया कि लाभार्थियों की जानकारी उपलब्ध नहीं है और यह जानकारी तभी मिलेगी जब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से 2026-27 के लिए प्रस्ताव मिलेंगे.
समिति ने कहा कि उसे यह देखकर "हैरानी" हुई कि पिछले दो सालों की तुलना में 2026-27 के लिए लक्ष्य को घटाकर 34 लाख लाभार्थी कर दिया गया है. पैनल ने कहा कि योजना को तभी सफल माना जा सकता है जब तय लक्ष्य पूरे हों और अगले साल के लिए टारगेट को बढ़ाया जाए. ऐसे में समिति का मानना है कि हर साल तय लक्ष्य बढ़ना चाहिए ताकि उसके अनुसार रिवाइज्ड अनुमान भी बढ़ें.
विभाग ने कहा कि उसने 2025-26 के लिए 1,250 करोड़ रुपये के बजट अनुमान में से 1,138.88 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जो कुल आवंटन का 91 प्रतिशत से अधिक है. विभाग ने 2026-27 के लिए 33.24 लाख लाभार्थियों का लक्ष्य तय किया है.
विभाग ने कहा कि मौजूदा फाइनेंशियल साइकिल में जारी रहने वाली योजनाओं की समीक्षा स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर की जा रही है, जिसमें योजना के दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देना भी शामिल है.
2026-27 से 2030-31 तक के नए फाइनेंशियल साइकिल के लिए, विभाग ने OBC, EBC और DNT छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के वास्ते कुल 20,142.23 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव रखा है.
2026-27 से 2030 तक के नए फाइनेंशियल साइकिल के लिए सरकार ने OBC, EBC और DNT छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के तहत 2026-27 में 3,645.18 करोड़, 2027-28 में 3,827.50 करोड़, 2028-29 में 4,018.86 करोड़, 2029-30 में 4,219.85 करोड़ और 2030-31 में 4,430.83 करोड़ का प्रपोजस रखा है.
पांच साल के लिए इतना बजट है प्रस्तावित
पिछले फाइनेंशियल ईयर के लिए मंज़ूर किया गया खर्च 3,554.50 करोड़ था, जिसमें सालाना आवंटन 2021-22 में 582 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 852.50 करोड़ हो गया था.
SC पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप में आई कमी
रिपोर्ट में अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के प्रदर्शन का अलग से जिक्र किया गया है. समिति ने देखा कि इस स्कीम के तहत खर्च 2023-24 में 5,476.22 करोड़, 2024-25 में 5,581.52 करोड़ और 2025-26 में (24 मार्च 2026 तक) 4,934.67 करोड़ था. स्कॉलरशिप पाने वाले SC छात्रों की संख्या 2023-24 में 47.38 लाख, 2024-25 में 48.04 लाख और मार्च 2026 तक 2025-26 में 36.07 लाख थी.
समिति ने कहा कि उसे यह समझ नहीं आया कि विभाग उच्च शिक्षा में SC छात्रों के ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो को बढ़ाने की योजना कैसे बना रहा है, जबकि 2025-26 में खर्च और लाभार्थियों की संख्या दोनों में कमी आई है. इसने 76.55 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 36.07 लाख लाभार्थियों तक पहुंचने की उपलब्धि को "बहुत खराब" बताया.
इसके बाद सरकार ने समिति को बताया कि 31 मार्च, 2026 तक 47.53 लाख SC लाभार्थियों को इस योजना में शामिल किया गया था. सरकार ने कहा कि 76.58 लाख का आंकड़ा पिछले EFC चक्र के अनुमानों पर आधारित था, जबकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 2025-26 के लिए बताया गया कुल लक्ष्य 57,64,869 लाभार्थी था.
सरकार ने कहा कि केंद्र का हिस्सा 47.53 लाख लाभार्थियों को दिया जा चुका है. अनुमानित और वास्तविक आंकड़ों में अंतर का कारण राज्यों का हिस्सा जारी न होना, लाभार्थियों के वेरिफिकेशन में देरी और अन्य प्रक्रियात्मक जरूरतें थीं.
समिति ने यह भी गौर किया कि विभाग ने योजना में बदलाव के लिए 'एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी' (EFC) को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें आय की सीमा और स्कॉलरशिप की दरों में बदलाव शामिल हैं. पैनल ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से लाभार्थियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है और इसके परिणामस्वरूप, वित्तीय जरूरत भी बढ़ जाएगी.
पैनल ने कहा कि प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद मौजूदा बजट आवंटन शायद पर्याप्त न हो. समिति ने विभाग से कहा कि वह 2026-27 से इन प्रस्तावों को लागू करे और 'संशोधित अनुमान' (Revised Estimates) के चरण में बजट बढ़ाने की मांग करे, ताकि फंड की कमी के कारण छात्रों को कोई परेशानी न हो. समिति ने इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द मंजूरी देने की भी मांग की, ताकि लाभार्थियों को 2026-27 एकेडेमिक ईयर में ही इसका लाभ मिल सके.
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